IAF Chief AP Singh: क्या भारत बनाएगा अलग Drone Force? एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने दिया जवाब

IAF Chief AP Singh ने अलग ड्रोन फोर्स बनाने की संभावना से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन को मौजूदा हथियार प्रणालियों के साथ एकीकृत

भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में हुए कथित आतंकी हमले के दौरान कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की सराहना की।

IAF Chief AP Singh on Drone Force: भारतीय वायु सेना में ड्रोन की बढ़ती भूमिका के बीच अलग Drone Force बनाने को लेकर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्थिति स्पष्ट की है। वायु सेना दिवस से पहले आयोजित सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन की संख्या बढ़ा रही है, लेकिन इनके लिए अलग से कोई स्वतंत्र फोर्स बनाने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक ड्रोन को मौजूदा सैन्य ढांचे और दूसरे हथियारों के साथ एकीकृत करके इस्तेमाल करना ज्यादा प्रभावी होगा।

एपी सिंह ने ड्रोन तकनीक को भारतीय वायु सेना के लिए “क्रांतिकारी” के बजाय “विकासवादी” बताया। उन्होंने कहा कि वायु सेना में मानवरहित प्रणालियों की क्षमता पहले से मौजूद है और अब इनके प्रकार, संख्या तथा ऑपरेशनल क्षमताओं को लगातार बढ़ाया जा रहा है।

अलग ड्रोन फोर्स बनाने की जरूरत नहीं

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अनुसार भविष्य के युद्ध में किसी एक हथियार प्रणाली को अलग-थलग इस्तेमाल करने के बजाय अलग-अलग प्लेटफॉर्म और हथियारों के बीच तालमेल जरूरी होगा। ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन, फाइटर जेट और अन्य हथियार प्रणालियां एक साथ काम करें, तो उनकी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने संकेत दिया कि वायु सेना के मौजूदा ढांचे में ऐसी क्षमताओं को संभालने वाली यूनिट्स मौजूद हैं और आवश्यकता के अनुसार उनका विस्तार किया जा सकता है। इस रणनीति का उद्देश्य ड्रोन को अलग शाखा बनाने के बजाय व्यापक एयर-पावर नेटवर्क का हिस्सा बनाना है।

पाकिस्तान के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर क्या बोले?

पाकिस्तान की ओर से चीनी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल करने की संभावनाओं और पायलटों की ट्रेनिंग से जुड़े सवाल पर भी एपी सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संकेत दिया कि भारत को क्षेत्र में बदलती हवाई क्षमता पर नजर रखनी होगी, लेकिन केवल किसी एक विमान को हासिल करना पर्याप्त नहीं होता।एयर चीफ ने हथियारों और प्लेटफॉर्म के इंटीग्रेशन को महत्वपूर्ण बताया। 

उनके मुताबिक किसी भी एयर पावर की वास्तविक क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके अलग-अलग सिस्टम कितनी प्रभावी तरीके से एक-दूसरे के साथ काम करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भी उन्होंने इसी पहलू पर जोर दिया। यह उनका आकलन था कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म होना पर्याप्त नहीं है; सेंसर, हथियार, कमांड सिस्टम और अन्य क्षमताओं के बीच तालमेल भी अहम भूमिका निभाता है।

AMCA पर भारत की नजर

भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) कार्यक्रम भी आगे बढ़ रहा है। AMCA को भारतीय वायु सेना के लिए स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर विकसित करने की परियोजना के तौर पर तैयार किया जा रहा है। मई 2026 में रक्षा मंत्रालय ने AMCA के डिजाइन और प्रोटोटाइप विकास के लिए तीन निजी क्षेत्र की कंपनियों/कंसोर्टियम को RFP जारी किया था। परियोजना के तहत पांच प्रोटोटाइप और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट एयरफ्रेम विकसित किए जाने हैं।

एपी सिंह ने कहा कि यदि AMCA कार्यक्रम में देरी होती है तो भारतीय वायु सेना को अन्य फाइटर प्लेटफॉर्म पर भी विचार करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि रूस ने Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमान का विकल्प भारत के सामने रखा है, लेकिन इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

IAF के सामने फाइटर स्क्वाड्रन की चुनौती

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने वायु सेना के मौजूदा फाइटर स्क्वाड्रन स्तर को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार भारतीय वायु सेना के पास वर्तमान में 29 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि अधिकृत संख्या 42 है। उन्होंने इस कमी को दूर करने के लिए हर साल करीब 36 से 40 नए फाइटर एयरक्राफ्ट शामिल करने की जरूरत बताई।

इसी क्रम में 114 Rafale लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद भी महत्वपूर्ण है। रक्षा सचिव ने हाल में कहा था कि इस खरीद प्रक्रिया में इस वित्त वर्ष के अंत तक निष्कर्ष पर पहुंचने की उम्मीद है और प्रस्तावित विमानों में भारतीय हथियारों तथा प्रणालियों के अधिक एकीकरण पर जोर दिया जा रहा है।

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