NITI Aayog की नई रिपोर्ट में देश की स्कूली शिक्षा को लेकर गंभीर तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक कक्षा 3 के अधिकांश बच्चे किताब नहीं पढ़ पा रहे, जबकि कक्षा 5 के 70% छात्र साधारण भाग के सवाल हल करने में असफल रहे।
NITI Aayog Education Report: NITI Aayog की हालिया रिपोर्ट ने देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में बच्चे बुनियादी पढ़ाई और गणित जैसी जरूरी स्किल्स में कमजोर पाए गए हैं। कक्षा 3 के ज्यादातर छात्र दूसरी कक्षा की किताब तक सही से नहीं पढ़ पा रहे, जबकि कक्षा 5 के अधिकतर बच्चे साधारण भाग के सवाल हल करने में असफल रहे हैं।
पढ़ाई और गणित में बच्चों की कमजोर पकड़
नीति आयोग की रिपोर्ट ‘भारत में स्कूल एजुकेशन सिस्टम: क्वालिटी बढ़ाने के लिए समय का एनालिसिस और पॉलिसी रोडमैप’ में स्कूली शिक्षा की चिंताजनक स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार कक्षा 3 के केवल 27.1 प्रतिशत छात्र ही कक्षा 2 स्तर का पाठ पढ़ पा रहे हैं। यानी लगभग 73 प्रतिशत बच्चे बुनियादी पढ़ने की क्षमता में पीछे हैं।

वहीं गणित की स्थिति भी गंभीर बताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कक्षा 5 के सिर्फ 30.7 प्रतिशत छात्र ही भाग का सामान्य सवाल हल कर पा रहे हैं। इसका मतलब है कि करीब 70 प्रतिशत बच्चों की गणितीय समझ कमजोर है।
यह रिपोर्ट UDISE+, PARAKH, NAS और ASER जैसे राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है।
नामांकन बढ़ा, लेकिन सीखने का स्तर कमजोर
रिपोर्ट के मुताबिक देश में 14.71 लाख स्कूलों में 24.69 करोड़ से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। प्राथमिक स्तर पर लगभग सभी बच्चों की स्कूल तक पहुंच हो चुकी है, लेकिन उच्च माध्यमिक स्तर पर स्थिति अब भी कमजोर बनी हुई है।
उच्च माध्यमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (GER) केवल 58.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है। अलग-अलग राज्यों में इसमें बड़ा अंतर देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार छात्रों को उच्च प्राथमिक के बाद स्कूल में बनाए रखना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
असम में शिक्षा की स्थिति पर खास फोकस
रिपोर्ट में Assam को उदाहरण के तौर पर शामिल किया गया है, जहां बुनियादी ढांचे में सुधार के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता बड़ी चुनौती बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार:
- असम में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 17.5 प्रतिशत है
- उच्च माध्यमिक स्तर पर GER केवल 43.5 प्रतिशत दर्ज किया गया
- कई स्कूल अब भी एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं
- गणित और विज्ञान में छात्रों के स्कोर कमजोर पाए गए
हालांकि पिछले दशक में बिजली, इंटरनेट, शौचालय और डिजिटल सुविधाओं में तेजी से सुधार हुआ है, जिससे शुरुआती स्तर पर नामांकन और छात्राओं की भागीदारी बढ़ी है।
शिक्षा सुधारों का भी किया गया जिक्र
रिपोर्ट में भारतीय शिक्षा व्यवस्था के विकास को भी विस्तार से समझाया गया है। इसमें मुदालियर आयोग, कोठारी आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नई शिक्षा नीति 2020 तक के बदलावों का उल्लेख किया गया है।
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत 5+3+3+4 मॉडल, डिजिटल क्लासरूम और बुनियादी साक्षरता पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों को अब सिर्फ नामांकन नहीं, बल्कि सीखने की गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
रिपोर्ट में क्या-क्या सुझाव दिए गए?
नीति आयोग ने शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए कई अहम सिफारिशें भी दी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बुनियादी पढ़ाई और गणितीय समझ को मजबूत करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने की जरूरत है।
इसके अलावा:
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल और बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने
- गणित और विज्ञान शिक्षकों की कमी दूर करने
- स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को रोकने
- लड़कियों के लिए छात्रवृत्ति और छात्रावास सुविधाएं बढ़ाने
- पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए लाइब्रेरी और रीडिंग कैंपेन चलाने
जैसे सुझाव दिए गए हैं।
सीखने की गुणवत्ता बनी सबसे बड़ी चुनौती
रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि केवल स्कूलों में नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बच्चों की वास्तविक सीखने की क्षमता, पढ़ने की समझ और गणितीय कौशल में सुधार अब सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुरुआती कक्षाओं में बुनियादी शिक्षा मजबूत नहीं हुई, तो आगे की पढ़ाई और रोजगार दोनों पर इसका असर पड़ सकता है।










