Noida Jail Health Camp से गायब रहे 4 डॉक्टर, एक दिन का वेतन रोका, 3 से मांगा जवाब

नोएडा जिला कारागार के स्वास्थ्य शिविर में अनुपस्थित रहने पर 4 डॉक्टरों का एक दिन का वेतन रोका गया। CMO ने 3 डॉक्टरों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।

नोएडा जिला कारागार में आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर में अनुपस्थित रहने पर चार डॉक्टरों का एक दिन का वेतन रोक दिया गया है। सीएमओ ने तीन डॉक्टरों से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा है और विभागीय कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

नोएडा: जिला कारागार में आयोजित विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर में ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने चार डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने उनका एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं, जबकि तीन डॉक्टरों से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

जिला कारागार में ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर चार डॉक्टरों पर कार्रवाई

Noida Jail Health Camp से गायब रहे 4 डॉक्टर, एक दिन का वेतन रोका, 3 से मांगा जवाब

नोएडा के जिला कारागार में आयोजित विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर में ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने चार डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने सभी संबंधित डॉक्टरों का एक दिन का वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को निर्देश दिया गया है कि ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले डॉक्टरों से लिखित स्पष्टीकरण लिया जाए। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जिम्मेदारियों के निर्वहन में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विशेष स्वास्थ्य शिविर में लगाई गई थी डॉक्टरों की ड्यूटी

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रविवार को नोएडा जिला कारागार में बंदियों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी, ताकि कैदियों की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों में फिजिशियन डॉ. प्रदीप, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सतेंद्र कुमार सहित कुल चार डॉक्टर शामिल थे। हालांकि, निर्धारित समय पर कोई भी डॉक्टर शिविर में नहीं पहुंचा, जिसके कारण स्वास्थ्य जांच प्रभावित हुई और संबंधित अधिकारियों ने इस पर नाराजगी जाहिर की।

CMO ने दिए सख्त निर्देश, मांगा गया लिखित जवाब

घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को नोटिस जारी कर अनुपस्थित डॉक्टरों से लिखित स्पष्टीकरण लेने को कहा है। साथ ही चारों डॉक्टरों का एक दिन का वेतन रोकने का आदेश भी दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि डॉक्टरों की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके खिलाफ विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सरकारी ड्यूटी में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

डॉक्टर ने दी अपनी सफाई

इस मामले में फिजिशियन डॉ. प्रदीप ने अपनी ओर से सफाई भी दी है। उनका कहना है कि उन्हें जिला कारागार में ड्यूटी के संबंध में CMO या CMS कार्यालय की ओर से कोई लिखित आदेश या आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई थी। उन्होंने दावा किया कि यदि समय पर उन्हें ड्यूटी का आदेश मिलता, तो वे निश्चित रूप से स्वास्थ्य शिविर में उपस्थित रहते। डॉक्टर का यह भी कहना है कि मामले की पूरी जानकारी विभाग के समक्ष रखी जाएगी और लिखित स्पष्टीकरण में सभी तथ्यों का उल्लेख किया जाएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन पर विभाग का जोर

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जिला अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात डॉक्टरों की जिम्मेदारी केवल अस्पताल तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रशासन की ओर से लगाए गए विशेष शिविरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भी उनकी उपस्थिति आवश्यक होती है। ऐसे शिविरों का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना होता है। जिला कारागार में आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर भी इसी उद्देश्य से लगाया गया था, ताकि बंदियों की नियमित जांच कर आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर असर डालती हैं। इसलिए भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को भी सतर्क रहने और ड्यूटी से जुड़े निर्देश समय पर जारी करने के लिए कहा गया है। अब सभी की निगाहें डॉक्टरों के लिखित स्पष्टीकरण पर हैं। विभाग उनके जवाब का परीक्षण करने के बाद यह तय करेगा कि आगे केवल वेतन कटौती तक कार्रवाई सीमित रहेगी या संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

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