ओडिशा में बाढ़ से दो लाख से अधिक लोग प्रभावित, राहत-बचाव अभियान तेज

ओडिशा में भीषण बाढ़ से 2 लाख से अधिक लोग प्रभावित। कई जिले जलमग्न हैं, हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

ओडिशा में लगातार बारिश और नदियों के उफान से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। दो लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, कई जिले जलमग्न हैं और प्रशासन एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ व फायर सर्विस की मदद से राहत एवं बचाव कार्य तेज़ी से चला रहा है।

भुवनेश्वर: ओडिशा में लगातार हो रही भारी बारिश और नदियों के जलस्तर में तेज़ बढ़ोतरी के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों के कई जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दो लाख से अधिक लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं, जबकि सैकड़ों गांव अब भी जलमग्न हैं। प्रशासन, राष्ट्रीय और राज्य आपदा राहत बलों के सहयोग से राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है।

तीन लोगों की मौत, राहत कार्य के दौरान फायर सर्विस कर्मी की जान गई

बाढ़ से जुड़े हादसों में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें ड्यूटी के दौरान करंट लगने से एक फायर सर्विस कर्मी की मृत्यु हो गई। इसके अलावा एक बुजुर्ग की दीवार गिरने से मौत हुई, जबकि एक बच्चे का शव बाढ़ के पानी में मिला। अधिकारियों के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित जिलों में अब तक किसी बड़े पैमाने पर जनहानि की सूचना नहीं है, जिससे राहत एजेंसियों को समय रहते लोगों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली है।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले

बाढ़ का सबसे अधिक असर बालेश्वर, भद्रक और जाजपुर जिलों में देखा गया है। इसके अलावा मयूरभंज, संबलपुर, ढेंकानाल, केंदुझर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, नुआपाड़ा, कालाहांडी, रायगढ़ा और गजपति जिलों में भी जलभराव और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। लगातार बारिश के कारण कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है।

266 गांव अब भी जलमग्न

सरकारी जानकारी के अनुसार, 44 विकासखंडों के 266 गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। कई स्थानों पर सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। प्रशासन नावों और विशेष बचाव उपकरणों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है।

हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

बाढ़ प्रभावित निचले इलाकों से लगभग 30,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी, चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन लगातार नए प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है ताकि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त निकासी अभियान चलाया जा सके।

एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ और फायर सर्विस की संयुक्त कार्रवाई

राहत एवं बचाव अभियान में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) और फायर सर्विस की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। पिछले 24 घंटों में बचाव दलों ने सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती भी की है, ताकि राहत कार्यों की निगरानी और समन्वय प्रभावी ढंग से किया जा सके।

कृषि और मकानों को भारी नुकसान

बाढ़ के कारण 761 से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि लगभग 7,900 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। धान और अन्य खरीफ फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पानी जल्दी नहीं उतरा तो किसानों को आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 10 जिलों के स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बुधबलंगा, जलका, बैतरणी और सालंदी जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वहीं महानदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण जल प्रवाह बढ़ रहा है। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो जलाशयों से अतिरिक्त पानी छोड़ा जा सकता है, जिससे निचले इलाकों में सतर्कता और बढ़ानी पड़ेगी।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के दौरान ओडिशा के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके चलते प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रखा है। बचाव दलों को संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से तैनात किया गया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।

सरकार की अपील

मुख्यमंत्री ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

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