ऑनलाइन ठगी से गैंगवार तक! जानें झुंझुनूं में रविंद्र कटेवा की क्राइम कुंडली

झुंझुनूं गैंगवार में जमीन विवाद से जुड़ा जानलेवा हमला। ऑनलाइन ठगी से करोड़ों कमाने वाला रविंद्र कटेवा कैसे बना जमीन माफिया, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

झुंझुनूं की गैंगवार ने शेखावाटी में सक्रिय अपराध जगत की सच्चाई उजागर कर दी। ऑनलाइन ठगी से करोड़ों कमाने वाला रविंद्र कटेवा आज जमीन माफिया बन चुका है। जमीन विवाद में उसकी जान बच गई, लेकिन यह घटना पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। 

Jhunjhunu: झुंझुनूं में हुई गैंगवार की वारदात पूरी तरह योजनाबद्ध थी। बदमाशों का मकसद गैंगस्टर रविंद्र कटेवा को मारना था, लेकिन किस्मत ने उसका साथ दिया और वह बच गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह हमला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ था। रविंद्र कटेवा शेखावाटी क्षेत्र में दबदबा रखने वाला नाम है और सीकर-झुंझुनूं में उसके खिलाफ कई संगीन मामले दर्ज हैं।

रविंद्र कटेवा पर जमीनों पर जबरन कब्जा करने, विवादों में मारपीट करने और जानलेवा हमले करवाने जैसे आरोप रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ राजनीतिक संरक्षण के चलते उसका कद लगातार बढ़ता गया।

रविंद्र कटेवा का अपराधी सफर

जमीन माफिया बनने से पहले रविंद्र कटेवा ऑनलाइन ठगी का बड़ा नाम था। वह क्रेडिट कार्ड फ्रॉड का मास्टरमाइंड रह चुका है। मई 2022 में कोटा के अनंतपुरा थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। उस समय प्रोबेशन आईपीएस और तत्कालीन सीआई मनीष चौधरी की टीम ने इस पूरे ऑनलाइन ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया था।

18 अप्रैल 2022 को कोटा के व्यापारी पवन गुप्ता के क्रेडिट कार्ड से तीन बार में करीब 2 लाख 18 हजार रुपये की ठगी हुई थी। जब व्यापारी ने क्रेडिट कार्ड कस्टमर केयर से संपर्क किया, तब वह रविंद्र के गिरोह के जाल में फंस गया।

ऐप के जरिए करता था ठगी

पुलिस जांच में सामने आया कि रविंद्र और उसकी गैंग ने एक फर्जी ऐप बना रखा था। जैसे ही कोई व्यक्ति क्रेडिट कार्ड से जुड़ी शिकायत करने के लिए उस ऐप या नंबर पर संपर्क करता, गिरोह उससे बातचीत कर उसके मोबाइल में वही ऐप डाउनलोड करवा देता था।

ऐप डाउनलोड होते ही मोबाइल को रिमोट एक्सेस पर ले लिया जाता और फिर क्रेडिट कार्ड से पैसे निकाल लिए जाते। यह रकम रविंद्र अपने, अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर करवा देता था। बाद में पेट्रोल पंप और फोन-पे जैसे माध्यमों से कैश निकाल लिया जाता। जिनके खातों का इस्तेमाल होता था, उन्हें कमीशन दिया जाता था।

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि इस तरीके से करीब 100 लोगों से डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की गई। इसी काले धन से रविंद्र ने कई जगह जमीनों में निवेश किया।

आरके ग्रुप 0056 गैंग का गठन

ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में जमानत पर बाहर आने के बाद रविंद्र कटेवा ने साल 2023 में अपनी गैंग बनाई, जिसका नाम रखा गया आरके ग्रुप 0056। वह झुंझुनूं जिले के खिरोड़ गांव का रहने वाला है। उसके पिता बिजली विभाग में लाइनमैन हैं और एक भाई इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में अधिकारी है।

रविंद्र ने पैसों का लालच देकर कई युवकों को अपनी गैंग में शामिल किया। वर्तमान में उसकी गैंग में करीब 100 से 150 लड़के बताए जाते हैं। यह गैंग जमीनों पर जबरन कब्जा, जमीन विवाद में मारपीट और जानलेवा हमलों जैसी वारदातों को अंजाम देती है।

सोशल मीडिया पर भी दिखाता था दबदबा

रविंद्र कटेवा सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहता था। उसके नाम से कई अकाउंट मौजूद हैं, जिन पर वह खुद के वीडियो, गैंग के साथियों के साथ तस्वीरें और घटनाओं से जुड़े वीडियो अपलोड करता था। इससे इलाके में उसका खौफ और प्रभाव बढ़ता गया।

देवर-भाभी के जमीन विवाद से जुड़ा गैंगवार

ताजा गैंगवार की वजह सीकर के भादवासी इलाके में स्थित 24 बीघा जमीन का विवाद बताया जा रहा है। यह जमीन श्रवण फगेड़िया और उसकी भाभी शारदा के बीच विवाद का कारण बनी हुई थी। इस विवाद में रविंद्र कटेवा ने भाभी शारदा का साथ दिया।

इसी मामले में रविंद्र पर आरोप है कि उसने श्रवण के साथी सुरेश पर जानलेवा हमला किया था। बाद में दोनों पक्षों में राजीनामा भी हुआ, लेकिन इसके बावजूद जमीन श्रवण के नाम नहीं करवाई गई। इसी रंजिश में श्रवण ने कथित तौर पर सुपारी देकर बदमाशों को रविंद्र की हत्या के लिए भेजा, जिससे यह गैंगवार हुई।

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