पाकिस्तान के कराकोरम पर्वत श्रृंखला स्थित ब्रॉड पीक पर आए हिमस्खलन में प्रसिद्ध ब्रिटिश-नेपाली पर्वतारोही निम्स पुरजा समेत 10 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। बचाव दल ने उनका शव बरामद कर लिया है, जबकि अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की कराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित 8,047 मीटर ऊंचे ब्रॉड पीक पर आए भीषण हिमस्खलन ने वैश्विक पर्वतारोहण समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। प्रसिद्ध ब्रिटिश-नेपाली पर्वतारोही निम्स (निर्मल) पुरजा का शव बचाव दल ने पर्वत से बरामद कर लिया है। इस हादसे में कुल 10 पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि की गई है। पाकिस्तान के अल्पाइन क्लब ने रविवार को बताया कि 43 वर्षीय निम्स पुरजा का शव समुद्र तल से लगभग 5,700 मीटर की ऊंचाई पर मिला। बचाव अभियान के दौरान तीन अन्य शव भी दिखाई दिए हैं, हालांकि उनकी पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हिमस्खलन में गई 10 पर्वतारोहियों की जान
निम्स पुरजा की पर्वतारोहण कंपनी Elite Expeditions ने शनिवार को उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि ब्रॉड पीक पर आए हिमस्खलन में उनके अभियान दल के कुल 10 सदस्य मारे गए। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, पहले जिन पर्वतारोहियों के शव बरामद किए गए उनमें अमेरिका की मैलोरी गीस, ओमान की नधीरा अहमद अब्दुल्ला अल हार्थी और नेपाल के पुर बहादुर गुरूंग शामिल हैं। अन्य मृतकों की पहचान और शवों को सुरक्षित नीचे लाने का अभियान जारी है।
जापानी कैंप तक पहुंचाए जाएंगे शव
अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान ने बताया कि जमीनी बचाव दल बरामद शवों को पर्वत पर बने जापानी बेस कैंप तक पहुंचाएगा। खराब मौसम, ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, खोज अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी लापता पर्वतारोहियों का पता नहीं चल जाता।
नेपाल के प्रधानमंत्री ने जताया शोक
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पाकिस्तान के कराकोरम पर्वत क्षेत्र में छह नेपाली और चार विदेशी पर्वतारोहियों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि निम्स पुरजा और उनके साथियों का साहस, समर्पण और पर्वतारोहण में दिया गया योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
परिवार ने कहा – उनकी विरासत अमर रहेगी
निम्स पुरजा के बड़े भाई कमल पुरजा ने भावुक संदेश में कहा कि उनके छोटे भाई और उनके साथी अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनका साहस और उपलब्धियां हमेशा जीवित रहेंगी। उन्होंने कहा कि परिवार का दिल टूट चुका है, फिर भी उन्हें अपने भाई पर गर्व है क्योंकि उन्होंने दुनिया को यह दिखाया कि दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
दुनिया भर से श्रद्धांजलि
ब्रिटेन के प्रिंस विलियम ने निम्स पुरजा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने पहले एक सैनिक के रूप में देश की सेवा की और बाद में दुनिया के महानतम पर्वतारोहियों में अपनी पहचान बनाई। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि निम्स पुरजा एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे। उन्होंने वर्षों तक ब्रिटिश सशस्त्र बलों में सेवा दी और बाद में अपनी साहसिक पर्वतारोहण उपलब्धियों से पूरी दुनिया को प्रेरित किया।
बचाव दल ने बताया बेहद कठिन था अभियान
पाकिस्तान के अल्पाइन क्लब की प्रवक्ता और पर्वतारोही नायला कियानी ने बताया कि निम्स पुरजा अत्यंत अनुभवी, निडर और उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता वाले पर्वतारोही थे। उन्होंने कई अभियानों का सफल नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा कि हिमस्खलन के बाद शुरू हुए खोज अभियान में शुरुआती आशंका यही थी कि दल के सभी सदस्य जीवित नहीं बचे होंगे। कठिन मौसम और ऊंचाई के कारण राहत कार्य बेहद जोखिम भरा रहा।

पर्वतारोहण की दुनिया का चमकता सितारा
निम्स पुरजा ने वर्ष 2019 में इतिहास रच दिया था, जब उन्होंने दुनिया के 8,000 मीटर से ऊंचे सभी 14 पर्वतों पर केवल 189 दिनों में चढ़ाई पूरी कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने यह उपलब्धि पहले के रिकॉर्ड से सात वर्ष से अधिक कम समय में हासिल की थी। उनकी इस असाधारण यात्रा पर आधारित नेटफ्लिक्स की चर्चित डॉक्यूमेंट्री "14 Peaks: Nothing Is Impossible" ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने उस समय कहा था कि यह छह महीने का सफर बेहद कठिन जरूर था, लेकिन इससे यह साबित हुआ कि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
सेना से शिखरों तक का सफर
नेपाल में जन्मे निम्स पुरजा ने ब्रिटिश सेना में कुल 16 वर्षों तक सेवा दी। इनमें से 10 वर्ष उन्होंने ब्रिटिश स्पेशल फोर्सेज में बिताए। वर्ष 2018 में उन्हें अत्यधिक ऊंचाई वाले पर्वतारोहण में उत्कृष्ट योगदान के लिए एमबीई (Member of the Order of the British Empire) सम्मान से नवाजा गया था। वह ब्रिटिश सेना में सेवा के दौरान माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले पहले गोरखा सैनिक भी बने थे।
आखिरी पोस्ट में जताई थी बड़ी महत्वाकांक्षा
हादसे से कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर किए गए अपने अंतिम संदेश में निम्स पुरजा ने लिखा था कि उनकी मूल योजना केवल गैशरब्रुम-2 (G2) पर चढ़ाई करने की थी। हालांकि पाकिस्तान रवाना होने से पहले उन्होंने ब्रॉड पीक को भी अभियान में शामिल करने का निर्णय लिया। उनका लक्ष्य दुनिया के सभी 14 आठ-हजार मीटर से ऊंचे पर्वतों पर बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के दो बार सफल चढ़ाई करने वाले इतिहास के पहले पर्वतारोही बनने का था।
उन्होंने अपने संदेश में लिखा था कि यह योजना पहले से तय नहीं थी, लेकिन अवसर उन्हीं लोगों को दिखाई देते हैं जो लगातार मेहनत करते रहते हैं। साथ ही उन्होंने ब्रॉड पीक से सुरक्षित वापसी की कामना भी की थी।
ब्रॉड पीक क्यों माना जाता है खतरनाक?
कराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित ब्रॉड पीक दुनिया का 12वां सबसे ऊंचा पर्वत है। इसकी पहली सफल चढ़ाई 1957 में ऑस्ट्रियाई अभियान दल ने की थी। तब से सैकड़ों पर्वतारोही इस शिखर तक पहुंचे हैं, लेकिन कठिन मौसम, हिमस्खलन, तेज हवाओं और खड़ी बर्फीली ढलानों के कारण यह दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतों में गिना जाता है। वर्ष 2013 इस पर्वत के सबसे घातक वर्षों में शामिल रहा, जब यहां कम से कम छह पर्वतारोहियों की जान चली गई थी। निम्स पुरजा की मृत्यु पर्वतारोहण जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति मानी जा रही है। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के पर्वतारोहियों को साहस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ अपने सपनों का पीछा करने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।











