सब्जी के ठेले से राष्ट्रमंडल खेलों तक: पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार का संघर्ष अब ग्लासगो में चमकेगा

पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार का संघर्ष प्रेरणा बन गया है। सब्जी का ठेला लगाने से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में चयन तक का सफर चर्चा में है।
सब्जी के ठेले से राष्ट्रमंडल खेलों तक: पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार का संघर्ष अब ग्लासगो में चमकेगा
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बिहारशरीफ-झंडू कुमार की कहानी संघर्ष, मेहनत और जुनून की मिसाल बन गई है। कभी परिवार का गुजारा चलाने के लिए सब्जी का ठेला लगाने वाले झंडू कुमार अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करने जा रहे हैं।

पैरा पावरलिफ्टिंग में शानदार प्रदर्शन के दम पर उनका चयन कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में हुआ है। अब वे ग्लासगो में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।

झंडू कुमार का सफर आसान नहीं रहा। आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को टूटने नहीं दिया। दिन में मेहनत-मजदूरी और ठेले पर सब्जी बेचने के बाद वे घंटों अभ्यास किया करते थे।

परिवार और स्थानीय लोगों के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे पावरलिफ्टिंग में अपनी पहचान बनाई। लगातार मेहनत और अनुशासन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया और अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का टिकट भी दिला दिया।

कॉमनवेल्थ गेम्स में चयन होने के बाद उनके गांव और इलाके में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोग इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात बता रहे हैं।

कोचों का कहना है कि झंडू कुमार बेहद मेहनती खिलाड़ी हैं और उन्होंने सीमित संसाधनों में भी कभी हार नहीं मानी। उनकी इच्छाशक्ति ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है।

भारत के लिए खेलना हर खिलाड़ी का सपना होता है और झंडू कुमार ने अपने संघर्ष से यह सपना पूरा कर दिखाया है। अब उनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

सोशल मीडिया पर भी उनकी कहानी तेजी से वायरल हो रही है। लोग उन्हें “रियल हीरो” और युवाओं के लिए प्रेरणा बता रहे हैं। कई यूजर्स ने सरकार और खेल संस्थाओं

से ऐसे खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने की मांग की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे शहरों और गांवों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत केवल सही अवसर, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग की होती है।

ग्लासगो में होने वाली प्रतियोगिता को लेकर झंडू कुमार लगातार तैयारी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य देश के लिए पदक जीतना और अपने संघर्ष को नई पहचान देना है।

उनकी कहानी यह साबित करती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और हौसले से सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है।

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