चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर संसद के बाहर विपक्षी सांसदों ने शुक्रवार को अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव साधु के वेश में नजर आए। उनके सामने दान पेटी रखी गई थी। प्रदर्शन को प्रतीकात्मक रूप देने के लिए राहुल गांधी की भूमिका निभाने वाले एक व्यक्ति ने दान पेटी में पैसे डाले। इसके बाद पैसे चोरी करने का मंचन किया गया और सपा सांसदों ने कथित चोर को पकड़ लिया।
प्रदर्शन का मकसद मंदिरों में चढ़ावे और दान की रकम से जुड़े कथित विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाना था। सांसदों ने प्रदर्शन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि श्रद्धालुओं की ओर से मंदिरों में दिए जाने वाले चढ़ावे की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव साधु के रूप में संसद के बाहर बैठे नजर आए। उनके सामने दान पेटी रखी गई थी। कुछ देर बाद वहां प्रतीकात्मक तौर पर चढ़ावा डालने की प्रक्रिया दिखाई गई। इसी दौरान पैसे लेकर भागने का दृश्य बनाया गया।
मंचन के मुताबिक, जैसे ही दान पेटी में पैसे डाले गए, कथित चोर पैसे लेकर भागने लगा। वहां मौजूद सपा सांसदों ने उसे पकड़ लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी भी की। पूरे प्रदर्शन को कैमरों ने रिकॉर्ड किया और इसके वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए।
प्रदर्शन में शामिल सांसदों ने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे की रकम की सुरक्षा और उसके इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। उनका कहना था कि श्रद्धालु आस्था के कारण दान करते हैं और उस धन का सही इस्तेमाल होना चाहिए।
संसद के बाहर हुए इस प्रदर्शन में राजनीतिक संदेश के साथ व्यंग्य का भी इस्तेमाल किया गया। साधु का रूप, दान पेटी और पैसे चोरी करने का मंचन उसी व्यंग्यात्मक प्रस्तुति का हिस्सा था। सांसदों ने वास्तविक चोरी का दावा नहीं किया, बल्कि प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया।
राहुल गांधी के दान पेटी में पैसे डालने और उसके बाद चोरी का मंचन किए जाने से प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया। सपा सांसदों द्वारा कथित चोर को पकड़ने का दृश्य भी प्रदर्शन का प्रमुख हिस्सा रहा।
पप्पू यादव समेत प्रदर्शन में शामिल सांसदों ने इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाबदेही की मांग की। उनका कहना था कि धार्मिक आस्था से जुड़े आर्थिक मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता की शिकायत होने पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने अपने हाथों में पोस्टर और तख्तियां भी रखीं। इन पर चढ़ावे की कथित चोरी और मंदिरों में वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े संदेश लिखे गए थे। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाकर अपनी मांगें सामने रखीं।
संसद के बाहर विपक्षी सांसदों की ओर से इस तरह का प्रतीकात्मक प्रदर्शन कोई पहली घटना नहीं है। राजनीतिक दल अक्सर गंभीर मुद्दों को जनता और मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए रचनात्मक या व्यंग्यात्मक तरीके से उठाते रहे हैं। इस प्रदर्शन में भी इसी रणनीति का इस्तेमाल किया गया।
प्रदर्शन के दौरान मौजूद सांसदों ने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। साथ ही चढ़ावे की रकम के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था होनी चाहिए।











