टियाला में रजवाहा टूटा, 100 एकड़ धान की फसल डूबी पानी रोकने की कोशिश नाकाम, किसानों ने नहरी विभाग पर लगाए लापरवाही के आरोप

पटियाला में रजवाहा टूटने से करीब 100 एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई। किसानों ने पानी रोकने की कोशिश की, नहरी विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए।
टियाला में रजवाहा टूटा, 100 एकड़ धान की फसल डूबी पानी रोकने की कोशिश नाकाम, किसानों ने नहरी विभाग पर लगाए लापरवाही के आरोप
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पटियाला: पंजाब के पटियाला में रजवाहा टूटने से किसानों को बड़ा नुकसान होने की आशंका है। रजवाहे का पानी तेजी से आसपास के खेतों में फैल गया, जिससे करीब 100 एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूब गई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी खेतों में पहुंचने से किसानों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों और किसानों ने अपने स्तर पर पानी रोकने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के कारण प्रयास सफल नहीं हो सके।

किसानों का आरोप है कि नहरी विभाग की कथित लापरवाही के कारण यह स्थिति पैदा हुई। उनका कहना है कि रजवाहे की पहले से उचित तरीके से निगरानी और मरम्मत की जाती तो टूटने की स्थिति को टाला जा सकता था। किसानों के मुताबिक धान की फसल इस समय खेतों में खड़ी है और पानी भरने से फसल को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

रजवाहे में अचानक आई दरार के बाद पानी आसपास के खेतों की ओर बहने लगा। देखते ही देखते खेतों में पानी भर गया और धान की पौध पानी में डूब गई। कई किसानों ने मौके पर पहुंचकर मिट्टी और अन्य साधनों से पानी रोकने का प्रयास किया। लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि अस्थायी इंतजाम टिक नहीं पाए।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के किसान भी मौके पर पहुंच गए। किसानों ने मिलकर रजवाहे से निकल रहे पानी को रोकने और उसका बहाव दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर मिट्टी डालकर बांध बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन लगातार पानी आने के कारण राहत नहीं मिल सकी।

किसानों का कहना है कि धान की फसल के लिए खेतों में पानी जरूरी होता है, लेकिन नहरी पानी का इस तरह अनियंत्रित तरीके से भर जाना फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा रहने पर पौधों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं और फसल के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

करीब 100 एकड़ फसल प्रभावित होने की बात सामने आने के बाद किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है। धान की खेती में किसान बीज, खेत तैयार करने, पौध रोपाई, खाद, कीटनाशक और मजदूरी पर पहले ही काफी खर्च कर चुके होते हैं। ऐसे समय में फसल डूबने से उनकी पूरी लागत प्रभावित हो सकती है।

किसानों का आरोप है कि रजवाहे की हालत को लेकर विभाग को पहले भी जानकारी दी गई थी। उनका कहना है कि यदि समय रहते कमजोर हिस्से की मरम्मत कर दी जाती तो पानी के दबाव से रजवाहा टूटने की स्थिति नहीं आती। हालांकि विभाग की ओर से इस आरोप पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

रजवाहा टूटने के बाद आसपास के खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई। जिन खेतों में धान की फसल लगी थी, वहां पानी का स्तर बढ़ने लगा। कुछ खेतों में फसल पूरी तरह पानी के नीचे दिखाई दी, जबकि अन्य खेतों में भी पानी तेजी से फैलता रहा।

किसानों ने नहरी विभाग के अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और पानी की सप्लाई रोकने की मांग की। किसानों का कहना है कि जब तक रजवाहे से पानी का बहाव बंद नहीं होगा, तब तक खेतों में जमा पानी निकालना मुश्किल रहेगा।

पानी रोकने के लिए स्थानीय लोगों ने उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया। मिट्टी, बोरे और अन्य सामान की मदद से टूटे हिस्से को बंद करने की कोशिश की गई। लेकिन पानी के दबाव के कारण यह प्रयास नाकाफी साबित हुआ। किसानों का कहना है कि विभाग के पास ऐसे हालात से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन होने चाहिए।

इस घटना ने नहरी व्यवस्था के रखरखाव पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब में बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए नहरों और रजवाहों पर निर्भर हैं। ऐसे में नहर या रजवाहे में टूट होने से केवल पानी की आपूर्ति प्रभावित नहीं होती, बल्कि आसपास की खड़ी फसल को भी नुकसान पहुंच सकता है।

किसानों के मुताबिक रजवाहों की नियमित सफाई और मरम्मत बेहद जरूरी है। बरसात या नहरी पानी के दबाव के दौरान कमजोर हिस्से टूटने का खतरा बढ़ जाता है। यदि समय रहते ऐसे स्थानों की पहचान कर मरम्मत कर दी जाए तो किसानों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

पटियाला क्षेत्र में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। धान की फसल के लिए किसान मौसम, सिंचाई और नहरी पानी पर काफी निर्भर रहते हैं। ऐसे में फसल के महत्वपूर्ण चरण में खेतों में अचानक पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

किसानों का कहना है कि उन्हें फसल बचाने के लिए तत्काल सहायता की जरूरत है। यदि खेतों से पानी जल्द नहीं निकाला गया तो पौधों को नुकसान बढ़ सकता है। इसके अलावा लगातार पानी भरा रहने से मिट्टी की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित खेतों का मौके पर निरीक्षण कराया जाए और नुकसान का आकलन किया जाए। यदि फसल का नुकसान साबित होता है तो किसानों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके साथ रजवाहे की मरम्मत कर भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग भी की गई है।

ग्रामीणों के अनुसार पानी का बहाव रोकने के प्रयासों के दौरान कई किसान मौके पर जुटे रहे। कुछ किसानों ने अपनी फसल बचाने के लिए खेतों के आसपास छोटे रास्ते बनाकर पानी को दूसरी ओर निकालने की कोशिश की। लेकिन बड़ी मात्रा में पानी आने के कारण राहत सीमित रही।

किसानों का यह भी कहना है कि नहरी विभाग के कर्मचारियों को रजवाहों की स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए। खासकर धान के सीजन में पानी की मांग बढ़ने के कारण नहरों और रजवाहों में पानी का दबाव भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में कमजोर हिस्सों की निगरानी और मजबूत करना जरूरी होता है।

घटना के बाद किसानों में नाराजगी है। उनका कहना है कि खेती पहले ही मौसम और लागत बढ़ने जैसी कई चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में यदि विभागीय लापरवाही के कारण फसल खराब होती है तो इसका सीधा असर किसान परिवारों की आय पर पड़ता है।

हालांकि रजवाहे के टूटने का वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। यह भी देखा जाना जरूरी है कि टूटे हिस्से की स्थिति कैसी थी, पानी का दबाव कितना था और क्या वहां पहले से कोई क्षति मौजूद थी। विभागीय जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में जलभराव की स्थिति का आकलन किया जाना भी जरूरी है। यदि पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहता है तो नुकसान का क्षेत्र बढ़ सकता है। इसलिए सबसे पहले पानी का बहाव रोकना और खेतों से अतिरिक्त पानी निकालना किसानों के लिए प्राथमिकता है।

किसानों का कहना है कि वे अपने स्तर पर जितना संभव था, उतना प्रयास कर चुके हैं। अब विभागीय मशीनरी और अधिकारियों की मदद की जरूरत है। रजवाहे की मरम्मत के साथ-साथ खेतों में जमा पानी को निकालने के लिए भी व्यवस्था की मांग की जा रही है।

घटना के बाद आसपास के अन्य किसान भी सतर्क हो गए हैं। उन्हें डर है कि यदि रजवाहे का टूटा हिस्सा पूरी तरह बंद नहीं किया गया तो और खेतों में पानी फैल सकता है। इसलिए किसान लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की फसल में पानी की मात्रा नियंत्रित रखना जरूरी होता है। खेत में पानी होना और लगातार गहरा जलभराव होना अलग स्थिति है। अत्यधिक पानी और लंबे समय तक जलभराव से पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। ऐसे में प्रभावित खेतों की जल्द जांच जरूरी है।

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का सर्वे जल्द कराया जाए। सर्वे में प्रभावित क्षेत्र, फसल की स्थिति और किसान की संभावित आर्थिक क्षति का आकलन किया जाना चाहिए। इसके आधार पर सहायता या मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

रजवाहे के टूटने की घटना ने एक बार फिर सिंचाई ढांचे के रखरखाव की जरूरत को सामने ला दिया है। किसानों के लिए नहर और रजवाहे केवल पानी पहुंचाने का साधन नहीं हैं, बल्कि उनकी पूरी फसल व्यवस्था इससे जुड़ी होती है। इसलिए छोटी सी तकनीकी खराबी भी बड़े आर्थिक नुकसान में बदल सकती है।

पटियाला में सामने आए इस मामले में किसानों का आरोप है कि यदि नहरी विभाग ने समय रहते रजवाहे की स्थिति पर ध्यान दिया होता तो करीब 100 एकड़ धान की फसल को पानी में डूबने से बचाया जा सकता था। अब किसानों की नजर प्रशासन और विभाग की अगली कार्रवाई पर है।

फिलहाल खेतों में पानी भरने के कारण प्रभावित किसान परेशान हैं। किसान चाहते हैं कि रजवाहे की टूट तुरंत बंद हो, खेतों से पानी निकाला जाए और नुकसान का सरकारी स्तर पर आकलन कराया जाए। इसके साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रजवाहों की नियमित जांच और मरम्मत की व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी उठ रही है।

 

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