पटना में ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मी यानी ‘पुलिस दीदी’ के साथ मारपीट और थप्पड़ मारने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस के अनुसार, खेमनीचक इलाके में गश्त के दौरान महिला पुलिसकर्मी के साथ कथित तौर पर हाथापाई करने वाले युवकों में से एक की पहचान की जा चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 22 वर्षीय प्रदीप कुमार की पहचान हुई और उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं आपके दिए विवरण में संबंधित युवक के फरार होने और उसके रिश्तेदार की ओर से थाने में मारपीट तथा 60 हजार रुपये लेने के आरोप लगाए जाने की बात कही गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
घटना पटना के रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र के खेमनीचक स्थित सुभाष नगर इलाके की बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार 30 सितंबर की शाम ‘पुलिस दीदी’ टीम इलाके में गश्त कर रही थी। महिला पुलिसकर्मी महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे गश्ती अभियान के तहत क्षेत्र में मौजूद थीं। इसी दौरान कुछ युवकों को देखकर पुलिस टीम ने उन्हें रोककर पूछताछ करने की कोशिश की। बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और आरोप है कि एक युवक ने महिला पुलिसकर्मी के साथ हाथापाई करते हुए उन्हें थप्पड़ मार दिया। पूरी घटना आसपास लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई थी।
पुलिस के मुताबिक, घटना के समय महिला सब-इंस्पेक्टर प्रियंका आनंद समेत महिला पुलिसकर्मियों की टीम इलाके में गश्त कर रही थी। युवकों से पूछताछ के दौरान बहस शुरू हुई और मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। इसके बाद एक युवक द्वारा महिला पुलिसकर्मी को थप्पड़ मारने का आरोप है। घटना के बाद वहां मौजूद अन्य महिला पुलिसकर्मियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की। पुलिस ने बाद में CCTV फुटेज को जांच का आधार बनाया और आरोपियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। CCTV फुटेज में महिला पुलिसकर्मियों और युवकों के बीच विवाद तथा हाथापाई की स्थिति दिखाई देती है। पुलिस ने इसी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश शुरू की। जांच में एक युवक की पहचान प्रदीप कुमार के रूप में होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक उसकी उम्र 22 वर्ष है और वह खुशरूपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है।
मामले में रामकृष्ण नगर थाने में प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार केस 30 सितंबर को दर्ज किया गया और इसमें अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई। इसके बाद CCTV फुटेज और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। पुलिस के मुताबिक मामले में दो अन्य युवक भी शामिल थे और उनकी पहचान तथा गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस घटना से जुड़ा एक और पक्ष आपके दिए विवरण में सामने आया है, जिसमें युवक के एक रिश्तेदार ने थाने में उसके साथ कथित मारपीट किए जाने और 60 हजार रुपये लिए जाने का आरोप लगाया है। यह आरोप पुलिस की कार्रवाई और हिरासत से जुड़े एक अलग पहलू की ओर इशारा करता है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए इसे फिलहाल रिश्तेदार के आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। पुलिस जांच में यदि इस संबंध में कोई शिकायत या साक्ष्य सामने आता है तो उसकी भी अलग से जांच की जा सकती है।
पुलिस दीदी अभियान के तहत महिला पुलिसकर्मियों को खासतौर पर उन इलाकों में गश्त की जिम्मेदारी दी गई है जहां स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान और अन्य स्थानों पर छात्राओं तथा महिलाओं की आवाजाही अधिक होती है। ऐसे अभियान का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और छेड़छाड़ या संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना है। इसी ड्यूटी के दौरान महिला पुलिसकर्मी के साथ मारपीट का मामला सामने आने से पुलिस विभाग ने भी घटना को गंभीरता से लिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, घटना के समय पुलिस टीम ने युवकों को रोककर पूछताछ की थी। पुलिस की ओर से इसे सामान्य गश्ती और रोको-टोको कार्रवाई के संदर्भ में बताया गया है। इसके बाद विवाद किस बात पर शुरू हुआ और किस तरह हाथापाई तक पहुंचा, यह पुलिस जांच का हिस्सा है। अलग-अलग रिपोर्टों में युवकों की ओर से कथित टिप्पणी और पुलिस द्वारा पूछताछ किए जाने का उल्लेख है, लेकिन घटना की पूरी परिस्थितियों को CCTV और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकेगा।
इस मामले में CCTV फुटेज पुलिस के लिए अहम साक्ष्य माना जा रहा है। वीडियो के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मौके पर कितने लोग मौजूद थे, किस व्यक्ति ने महिला पुलिसकर्मी के साथ हाथापाई की और घटना के बाद कौन-कौन लोग वहां से निकले। CCTV के आधार पर एक आरोपी की पहचान होने की जानकारी सामने आ चुकी है, जबकि बाकी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस कार्रवाई जारी है।
पुलिस के सामने अब दो स्तर पर जांच की चुनौती है। पहला, महिला पुलिसकर्मी के साथ हुई मारपीट की घटना में शामिल सभी लोगों की पहचान और उनकी भूमिका स्पष्ट करना। दूसरा, रिश्तेदार की ओर से लगाए गए थाने में मारपीट और 60 हजार रुपये लेने के आरोपों की सच्चाई की जांच करना। यदि इन आरोपों को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज होती है तो संबंधित पुलिस अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका भी तथ्यों के आधार पर जांची जा सकती है।
घटना के बाद महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। जिन पुलिसकर्मियों को महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए सड़क पर गश्त करनी होती है, उनके सामने कई बार विवाद की स्थिति बन सकती है। ऐसे में उन्हें पर्याप्त सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराना भी पुलिस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पटना में पुलिस दीदी या अभया ब्रिगेड की व्यवस्था महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के उद्देश्य से शुरू की गई है। रिपोर्टों के अनुसार इस पहल के तहत महिला पुलिसकर्मियों को स्कूटी और मोटरसाइकिल उपलब्ध कराकर स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में गश्त कराई जा रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं और छात्राओं से जुड़े अपराधों को रोकने के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाना है।
ऐसे में ड्यूटी के दौरान किसी महिला पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की घटना पुलिस के लिए गंभीर विषय बन जाती है। हालांकि मामले में शामिल आरोपियों की ओर से घटना के कारण और परिस्थितियों को लेकर क्या पक्ष है, यह भी जांच के दौरान सामने आना बाकी है। किसी आरोपी को दोषी मानने से पहले पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज, प्राथमिकी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले को आगे बढ़ा रही है। एक आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी बताई गई है। पुलिस उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
वहीं 60 हजार रुपये लेने और थाने में मारपीट के आरोप मामले को एक अलग दिशा देते हैं। यदि यह आरोप आधिकारिक शिकायत में दर्ज किए गए हैं तो उनकी जांच भी निष्पक्ष तरीके से होना जरूरी है। इस तरह के आरोपों की पुष्टि बिना दस्तावेज या जांच के आधार पर नहीं की जा सकती। पुलिस के स्तर पर यदि कोई जांच सामने आती है तो उसके निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है।
घटना के बाद इलाके में भी इसकी चर्चा बनी हुई है। लोगों का कहना है कि पुलिसकर्मियों के साथ सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की घटना कानून व्यवस्था के लिहाज से गंभीर है। वहीं पुलिस की ओर से भी आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। CCTV फुटेज सामने आने के बाद पुलिस के लिए आरोपियों तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान हुआ है।
कुल मिलाकर पटना के खेमनीचक में ‘पुलिस दीदी’ टीम के साथ हुई मारपीट का मामला अब पुलिस जांच के दौर में है। एक आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। इसी बीच रिश्तेदार की ओर से थाने में मारपीट और 60 हजार रुपये लेने के लगाए गए आरोपों ने मामले में एक नया पहलू जोड़ दिया है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।











