पीएम मोदी की मंत्रिपरिषद बैठक: ‘विकसित भारत’ के लिए सुधारों, ईज ऑफ लिविंग और बिजनेस पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘विकसित भारत’ के विजन को लेकर सुधारों, Ease of Living और Ease of Doing Business पर खास जोर दिया। बैठक में

Narendra Modi ने पांच देशों की यात्रा से लौटने के तुरंत बाद दिल्ली में मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक की। इस बैठक के एक दिन बाद शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने लिए गए प्रमुख निर्णयों और चर्चाओं की जानकारी साझा की।

नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पांच देशों की विदेश यात्रा से लौटने के तुरंत बाद नई दिल्ली में मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में ‘ईज ऑफ लिविंग’ (जीवन को आसान बनाने) और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने की सुगमता) से जुड़े सुधारों पर विस्तृत चर्चा की गई। सरकार का मुख्य फोकस भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों को तेज करना रहा।

प्रधानमंत्री ने बैठक के एक दिन बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि मंत्रिपरिषद की बैठक “सार्थक और भविष्य-केंद्रित” रही। उन्होंने बताया कि विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतरीन तौर-तरीकों और सुधारों से जुड़े विचारों का आदान-प्रदान किया गया, ताकि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सके।

विदेश दौरे से लौटते ही हुई अहम बैठक

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में यह बैठक गुरुवार शाम नई दिल्ली स्थित ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित की गई। इसमें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। यह वर्ष 2026 की पहली पूर्ण मंत्रिपरिषद बैठक मानी जा रही है। बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। 

विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत सरकार घरेलू आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सतर्क रणनीति पर काम कर रही है।

‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर फोकस

बैठक में नागरिकों के दैनिक जीवन को आसान बनाने और कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल करने पर विशेष जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक सुधार, डिजिटल गवर्नेंस और तेज सेवाएं भारत की आर्थिक प्रगति को नई गति दे सकती हैं। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाना, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देना, और उद्योगों के लिए नियामकीय बाधाओं को कम करना प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। वहीं, ‘ईज ऑफ लिविंग’ के तहत आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने पर चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में बढ़ती तेल कीमतों, वैश्विक महंगाई और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों पर भी चर्चा हुई। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिसका असर भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर पड़ सकता है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह ईंधन आपूर्ति, महंगाई नियंत्रण और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर लगातार नजर बनाए हुए है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में नागरिकों से ऊर्जा के जिम्मेदार उपयोग की अपील भी की थी।

ऊर्जा बचत और जिम्मेदार उपभोग पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने और अनावश्यक खर्च कम करने का आग्रह किया है। इसमें ‘वर्क फ्रॉम होम’ को बढ़ावा देना, ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन मीटिंग्स करना और गैर-जरूरी यात्रा से बचना जैसे सुझाव शामिल हैं। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए नागरिकों को फिलहाल गैर-जरूरी खर्चों में सावधानी बरतनी चाहिए। इसमें विदेश यात्राओं को सीमित करना और महंगे निवेशों से कुछ समय के लिए बचना भी शामिल है।

प्रधानमंत्री मोदी लगातार ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य भारत को अगले दशक में दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करना है। इसके लिए बुनियादी ढांचे, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, रोजगार, विनिर्माण और निवेश जैसे क्षेत्रों में सुधारों को प्राथमिकता दी जा रही है।

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