फिलीस्तीनी गांव को आग लगाने पर आक्रोश, नेतन्याहू ने सेटलर हमला बताया कानून के खिलाफ

वेस्ट बैंक के अल-जबा गांव में इजरायली सेटलर्स ने घरों और गाड़ियों को आग लगाई, जिससे तनाव बढ़ गया। झड़पों में कई गिरफ्तार हुए। बढ़ती हिंसा क्षेत्र की शांति

वेस्ट बैंक के अल-जबा गांव में इजरायली सेटलर्स द्वारा घरों और गाड़ियों को आग लगाने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। पुलिस ने झड़पों के बीच छह लोगों को गिरफ्तार किया। बढ़ती सेटलर हिंसा स्थानीय सुरक्षा और शांति के लिए गंभीर चुनौती बन रही है।

World News: वेस्ट बैंक के फिलीस्तीनी गांव अल-जबा में इजरायली सेटलर्स द्वारा किए गए ताजा हमले ने क्षेत्र में तनाव और हिंसा को एक बार फिर बढ़ा दिया है। सोमवार रात को हुए इस हमले में कई घरों और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। यह घटना पिछले कई हफ्तों से वेस्ट बैंक में लगातार बढ़ रही सेटलर हिंसा की श्रृंखला का हिस्सा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया है।

अल-जबा गांव में रात के अंधेरे में हुआ हमला

अल-जबा गांव बैतलहम के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यही छोटा सा गांव सोमवार रात हिंसा की चपेट में आ गया जब इजरायली सेटलर्स ने अचानक हमला कर दिया। हमलावरों ने गांव में मौजूद कई घरों और गाड़ियों पर आग लगाई। स्थानीय लोगों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि कई परिवारों को अपने घर छोड़कर बाहर भागना पड़ा।

इजरायल की सेना ने बताया कि जैसे ही तोड़फोड़ और आगजनी के समाचार मिले, सेना और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। यह हमला उस स्थान के पास हुआ जहां कुछ घंटे पहले ही एक अवैध यहूदी चौकी को तोड़ने का काम चल रहा था। इस चौकी को हटाने की प्रक्रिया के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था।

झड़पों के बाद 6 लोगों को किया गिरफ्तार

सेटलर्स और इजरायली सुरक्षाबलों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आईं। झड़प के दौरान दर्जनों सेटलर्स वहां मौजूद थे और उन्होंने पत्थर, लोहे की रॉड फेंके और टायर जलाए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की और कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये हमलावर कुछ उग्रवादी हैं जो कानून को अपने हाथ में लेकर पूरे क्षेत्र को अस्थिर करना चाहते हैं। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि वह स्वयं इस मामले को देखेंगे और जल्द ही संबंधित मंत्रियों की बैठक बुलाकर इसका समाधान निकालेंगे।

वेस्ट बैंक में लगातार बढ़ रही हिंसा

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब वेस्ट बैंक पिछले कई महीनों से लगातार हिंसा की चपेट में है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार इस साल सितंबर तक यहां 2,660 से ज्यादा सेटलर हमले दर्ज किए जा चुके हैं। ज़ैतून की फसल के मौसम में पिछले कुछ हफ्तों में 87 गांवों में 167 हमले हुए।

हिंसा का असर दोनों समुदायों पर पड़ा है। पिछले दिनों हुई घटनाओं में 14 फिलीस्तीनी और 6 इजरायली मारे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह हिंसा ऐसे ही बढ़ती रही, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर पड़ेगा।

अमेरिका ने भी इस हिंसा को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वेस्ट बैंक की बढ़ती हिंसा गाजा में एक महीने पहले हुए ceasefire (युद्धविराम) को खतरे में डाल सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह चिंता बढ़ रही है कि यदि वेस्ट बैंक की स्थिति नहीं सुधरी, तो गाजा और बाकी क्षेत्रों में लागू शांति प्रक्रियाएं बाधित हो सकती हैं।

नेतन्याहू सरकार पर उठे सवाल

इसी घटनाक्रम के बीच एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रविवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले की सरकारी जांच कमेटी बनाने की मंजूरी दी। इस हमले में लगभग 1200 इजरायली मारे गए थे। लेकिन विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने इस कमेटी पर सवाल उठा दिए हैं क्योंकि यह कमेटी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है।

रिपोर्टों के अनुसार नेतन्याहू स्वयं इस कमेटी के सदस्यों का चयन करेंगे। विपक्ष के नेता यायर लापिद ने इसे शहीदों और युद्ध में मारे गए सैनिकों के साथ किया गया बड़ा अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि सरकार सच से भाग रही है और हकीकत को सामने आने नहीं देना चाहती।

‘मूवमेंट फॉर क्वालिटी गवर्नमेंट’ नामक संगठन ने भी आलोचना करते हुए इसे ‘लीपा-पोती कमेटी’ बताया। उनका कहना है कि यह कमेटी वास्तविक जांच की जगह सिर्फ औपचारिकता पूरी करने के लिए बनाई गई है।

गाजा में सीजफायर के बाद भी जारी संकट

गाजा में एक महीने पहले हुए ceasefire के बावजूद फिलीस्तीनियों की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। हालात इतने कठिन हैं कि रविवार को भारी बारिश के कारण मवासी कैंप में हजारों टेंट पानी में डूब गए। इससे करीब 13 हजार परिवार प्रभावित हुए।

बारिश के कारण कई लोगों को ठंड से जूझना पड़ा और राहत सामग्री की कमी से स्थिति और खराब हो गई। लोगों का कहना है कि युद्ध ने उन्हें पहले ही बेघर कर दिया था और अब मौसम ने उन्हें और संकट में डाल दिया है।

सऊदी क्राउन प्रिंस की वॉशिंगटन यात्रा

इस सप्ताह सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान वॉशिंगटन की यात्रा पर जाएंगे। उनकी इस यात्रा का अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनसे मुलाकात कर इजरायल से संबंध सामान्य करने और Abraham Accords में शामिल होने का दबाव डालेंगे। हालांकि क्राउन प्रिंस ने पहले ही साफ किया है कि जब तक फिलीस्तीनियों के लिए स्वतंत्र राष्ट्र का रास्ता साफ नहीं हो जाता, तब तक वे किसी भी सामान्यीकरण प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे। 

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