प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे इंडोनेशिया दौरे पर जकार्ता पहुंच गए हैं। इस यात्रा में भारत-इंडोनेशिया रक्षा सहयोग, ब्रह्मोस मिसाइल समझौता, समुद्री सुरक्षा और ऐतिहासिक प्रम्बानन हिंदू मंदिर की यात्रा प्रमुख एजेंडा हैं। दौरा दोनों देशों की रणनीतिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई मजबूती दे सकता है।
जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आधिकारिक दौरे पर सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका तीसरा इंडोनेशिया दौरा है। एयरपोर्ट पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनका औपचारिक स्वागत किया। प्रधानमंत्री के विमान को इंडोनेशियाई वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया, जो दोनों देशों के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। सबसे अधिक ध्यान भारत निर्मित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली से जुड़े संभावित रक्षा समझौते पर है।
ब्रह्मोस मिसाइल समझौता बन सकता है दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि
भारत और इंडोनेशिया के बीच लगभग 2,500 करोड़ रुपये के संभावित ब्रह्मोस मिसाइल समझौते को इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा माना जा रहा है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इंडोनेशिया फिलीपींस के बाद ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा विदेशी देश बन जाएगा।
ब्रह्मोस मिसाइल का संयुक्त विकास भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की कंपनी एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया ने किया है। यह दुनिया की सबसे तेज़ परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है और अपनी सटीक मारक क्षमता के लिए जानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की रक्षा निर्यात नीति को नई गति देगा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के सामरिक सहयोग को और मजबूत करेगा।
प्रम्बानन मंदिर का करेंगे दौरा
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान इंडोनेशिया के प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर भी जाएंगे। यह देश का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है और 9वीं शताब्दी में निर्मित इस भव्य मंदिर को भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित किया गया है। यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित यह मंदिर भारतीय और इंडोनेशियाई सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। मंदिर परिसर में कुल 240 मंदिर हैं और यह हर वर्ष लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है।
समुद्री सहयोग पर भी रहेगा विशेष फोकस
भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्री सुरक्षा और नौवहन सहयोग भी इस यात्रा का प्रमुख विषय है। विशेष रूप से साबंग पोर्ट दोनों देशों के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
यह बंदरगाह भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के निकट स्थित है। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान दोनों देशों ने साबंग पोर्ट के विकास, समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक्स और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की थी। विशेषज्ञों के अनुसार हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों के बीच यह सहयोग दोनों देशों के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
102वां विदेश दौरा, तीसरी बार इंडोनेशिया पहुंचे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह 102वां विदेश दौरा है। इससे पहले वे मई 2018 और सितंबर 2023 में इंडोनेशिया का दौरा कर चुके हैं।
साल 2023 में उन्होंने जकार्ता में आयोजित आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और ईस्ट एशिया समिट में भाग लिया था। लगातार हो रहे उच्चस्तरीय संपर्क इस बात का संकेत हैं कि भारत और इंडोनेशिया अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर तक ले जाना चाहते हैं।

2000 वर्षों पुरानी है भारत-इंडोनेशिया की सांस्कृतिक विरासत
भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल कूटनीति और व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच लगभग दो हजार वर्षों से सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव रहा है।
प्राचीन काल में भारतीय व्यापारी, विद्वान और बौद्ध एवं हिंदू धर्म के प्रचारक समुद्री मार्ग से इंडोनेशिया पहुंचे। इसके परिणामस्वरूप वहां भारतीय संस्कृति, भाषा, साहित्य, स्थापत्य कला और धार्मिक परंपराओं का व्यापक प्रभाव पड़ा। आज भी इंडोनेशिया के कई क्षेत्रों, विशेषकर बाली और जावा, में रामायण और महाभारत पर आधारित नृत्य-नाटकों तथा सांस्कृतिक आयोजनों की समृद्ध परंपरा जीवित है।
85 प्रतिशत मुस्लिम आबादी के बावजूद भारतीय संस्कृति की झलक
इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, जहां लगभग 85 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म का पालन करते हैं। इसके बावजूद देश की सांस्कृतिक पहचान में हिंदू-बौद्ध विरासत आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
साल 1998 में इंडोनेशिया ने 20,000 रुपिया का एक बैंक नोट जारी किया था, जिस पर भगवान गणेश की तस्वीर छपी थी। यह नोट शिक्षा और ज्ञान की थीम पर आधारित था तथा भगवान गणेश को विद्या और बुद्धिमत्ता के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया था। यह उदाहरण दर्शाता है कि इंडोनेशिया ने अपनी ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक राष्ट्रीय पहचान के साथ संतुलित रूप से संरक्षित रखा है।
भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताएं काफी हद तक समान हैं।
यदि ब्रह्मोस मिसाइल समझौते को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो यह भारत की रक्षा निर्यात क्षमता के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। वहीं, प्रम्बानन मंदिर की यात्रा दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देने का अवसर भी बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका और इंडोनेशिया के साथ उसकी दीर्घकालिक साझेदारी को भी नई दिशा देगा।











