तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच 6G समेत आठ अहम समझौतों पर सहमति बनी। इस साझेदारी से टेलीकॉम रिसर्च, तकनीकी विकास और भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति मिलने की उम्मीद है।
Tech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों ने तकनीक, इनोवेशन और संचार क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। खासतौर पर 6G तकनीक को लेकर दोनों पक्षों के बीच साझेदारी पर सहमति बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के टेलीकॉम सेक्टर, रिसर्च और डिजिटल इकोनॉमी को लंबी अवधि में बड़ा फायदा मिल सकता है।
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में तकनीकी सहयोग पर जोर
तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन के साथ कुल आठ अहम समझौतों पर मुहर लगी। इन समझौतों में ग्रीन टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, जलवायु सहयोग और नेक्स्ट-जेनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता दी गई।

सम्मेलन में STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स से जुड़े संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर भी विशेष फोकस रहा। दोनों पक्षों ने भविष्य की तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
6G टेक्नोलॉजी पर मिलकर करेंगे रिसर्च
सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में 6G तकनीक को लेकर सहयोग शामिल रहा। भारत और नॉर्डिक देश अब नेक्स्ट-जेनरेशन मोबाइल नेटवर्क और कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिलकर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साझेदारी से रिसर्च, नेटवर्क डेवलपमेंट और इनोवेशन इकोसिस्टम को नई मजबूती मिलेगी।
फिनलैंड और स्वीडन जैसे देश पहले से टेलीकॉम हार्डवेयर और नेटवर्क तकनीक में अग्रणी माने जाते हैं। वहीं, भारत के पास मजबूत सॉफ्टवेयर क्षमता और बड़ा डिजिटल मार्केट है। ऐसे में दोनों क्षेत्रों की साझेदारी 6G तकनीक के विकास को तेज कर सकती है।
भारत के टेलीकॉम और डिजिटल सेक्टर को होगा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, इस सहयोग का असर आने वाले वर्षों में भारत के टेलीकॉम सेक्टर और डिजिटल इकोनॉमी पर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोकिया और एरिक्सन जैसी कंपनियां भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का विस्तार कर सकती हैं।
माना जा रहा है कि इससे भारत केवल 6G तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में इसके उपकरण और नेटवर्क समाधान एक्सपोर्ट करने वाला बड़ा केंद्र भी बन सकता है। 6G की संभावित स्पीड 5G से कई गुना अधिक बताई जा रही है, जिससे ऑटोमेशन, स्मार्ट सिटी और एडवांस डिजिटल सेवाओं को नई दिशा मिल सकती है।










