बिहार में पीएम सूर्य घर योजना से घटेगा बिजली बिल, छत पर लगाएं सोलर प्लांट; 98 हजार रुपये तक मिलेगी मदद

बिहार में घर की छत पर सोलर प्लांट लगाने पर केंद्र और राज्य से 98 हजार रुपये तक सहायता मिलेगी। इससे बिजली बिल घटेगा और अतिरिक्त बिजली का लाभ भी मिलेगा।
बिहार में पीएम सूर्य घर योजना से घटेगा बिजली बिल, छत पर लगाएं सोलर प्लांट; 98 हजार रुपये तक मिलेगी मदद
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पटना। बिहार में बिजली बिल का बोझ कम करने के लिए घर की छत को ही बिजली उत्पादन का माध्यम बनाने की योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अब बिहार के घरेलू उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की सब्सिडी के साथ राज्य सरकार की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी मिल रही है। यानी घर की छत पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने वाले पात्र परिवारों को सोलर सिस्टम की क्षमता के आधार पर कुल 98 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है। इससे सोलर प्लांट लगाने की शुरुआती लागत कम होगी और लंबे समय में बिजली बिल में भी बचत हो सकती है। बिहार सरकार ने 22 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सोलर प्रोत्साहन योजना की शुरुआत करते हुए इस अतिरिक्त सहायता की घोषणा की थी।

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य देशभर में घरों की छत पर सोलर पैनल लगाकर परिवारों को अपनी बिजली की जरूरत का एक हिस्सा खुद पूरा करने में सक्षम बनाना है। केंद्र सरकार की योजना के तहत आवासीय रूफटॉप सोलर सिस्टम पर 1 किलोवाट के लिए 30 हजार रुपये, 2 किलोवाट के लिए 60 हजार रुपये और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के लिए अधिकतम 78 हजार रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता निर्धारित है। केंद्र की सहायता 3 किलोवाट क्षमता तक सीमित है।

बिहार में अब इसके ऊपर राज्य सरकार की ओर से भी सहायता जोड़ी गई है। राज्य सरकार के अनुसार 1 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाने पर केंद्र से 30 हजार रुपये के साथ बिहार सरकार 10 हजार रुपये अतिरिक्त देगी। इस तरह 1 किलोवाट सिस्टम पर कुल सहायता 40 हजार रुपये हो जाएगी। 2 किलोवाट सिस्टम पर केंद्र की 60 हजार रुपये की सहायता के साथ राज्य सरकार 20 हजार रुपये देगी, जिससे कुल सहायता 80 हजार रुपये तक पहुंच जाएगी। वहीं 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट पर केंद्र से 78 हजार रुपये और बिहार सरकार से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता मिलेगी। इस तरह कुल सहायता अधिकतम 98 हजार रुपये तक हो सकती है।

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को हो सकता है जिनके घर में हर महीने बिजली की खपत लगातार बनी रहती है। छत पर सोलर पैनल लगने के बाद दिन के समय सौर ऊर्जा से बिजली तैयार होगी और इसका इस्तेमाल घर के विभिन्न उपकरण चलाने में किया जा सकता है। योजना के तहत ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सिस्टम में जरूरत से ज्यादा बिजली बनने पर अतिरिक्त बिजली को डिस्कॉम को भेजने की व्यवस्था भी है। केंद्र सरकार के अनुसार 3 किलोवाट का सिस्टम औसतन महीने में 300 यूनिट से अधिक बिजली पैदा करने में सक्षम हो सकता है, हालांकि वास्तविक उत्पादन धूप, मौसम, छत की दिशा, पैनल की स्थिति और सिस्टम की क्षमता पर निर्भर करेगा।

बिहार में इस योजना को केवल शहरी इलाकों तक सीमित रखने के बजाय ज्यादा से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की तैयारी है। राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है। ऊर्जा विभाग की ओर से सितंबर में जारी जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में पीएम सूर्य घर योजना के तहत आवासीय उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राज्य सहायता देने के लिए 49.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी गई है।

इस योजना के तहत बिहार में गरीब परिवारों के लिए भी अलग स्तर पर सोलर प्लांट लगाने का अभियान चल रहा है। जून 2026 में राज्य सरकार ने 1512 करोड़ रुपये की लागत से 2.5 लाख कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं के घरों की छत पर सोलर प्लांट लगाने की शुरुआत की थी। सरकार ने इन घरों में सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य 20 नवंबर 2026 तक पूरा करने की बात कही थी। इस पहल के तहत पात्र गरीब परिवारों को बिजली खर्च में राहत के साथ निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

राज्य सरकार के अनुसार जिन घरों में सोलर पैनल से जरूरत से अधिक बिजली पैदा होगी, वहां अतिरिक्त बिजली को सरकार द्वारा खरीदने की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग को ऐसी ऑटोमेटिक व्यवस्था तैयार करने की बात कही है, जिससे उपभोक्ता की अतिरिक्त सौर बिजली ग्रिड में जाने के बाद उसके बदले मिलने वाली राशि सीधे खाते में पहुंच सके। यदि यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी होती है तो रूफटॉप सोलर केवल बिजली बिल घटाने का माध्यम नहीं रहेगा, बल्कि अतिरिक्त बिजली से परिवार को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।

बिहार में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की जरूरत इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि घरेलू बिजली कनेक्शनों की संख्या काफी अधिक है। राज्य सरकार के मुताबिक बिहार में करीब 2.22 करोड़ बिजली कनेक्शन हैं, जिनमें लगभग 1.94 करोड़ घरेलू उपभोक्ता हैं। ऐसे में अगर बड़ी संख्या में घर अपनी छतों पर सोलर प्लांट लगाने लगते हैं तो बिजली की मांग और पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही उपभोक्ताओं के बिजली खर्च में भी लंबे समय में कमी आ सकती है।

योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता को निर्धारित राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होता है। केंद्र सरकार के अनुसार योजना के लिए आवेदन राष्ट्रीय पोर्टल पर किया जा सकता है और वहां से उपभोक्ता अपने लिए उपयुक्त रूफटॉप सोलर सिस्टम का विकल्प चुन सकता है। पोर्टल पर पंजीकृत विक्रेताओं की जानकारी उपलब्ध रहती है और उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार विक्रेता का चयन कर सकता है।

आवेदन के बाद घर की छत और बिजली कनेक्शन से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाती है। चयनित विक्रेता द्वारा रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जाने के बाद संबंधित निरीक्षण और मीटरिंग की प्रक्रिया होती है। सब्सिडी की राशि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थी के बैंक खाते में दी जाती है। इसलिए किसी अनधिकृत व्यक्ति या एजेंट को केवल सब्सिडी दिलाने के नाम पर पैसे देने के बजाय आधिकारिक पोर्टल और अधिकृत विक्रेता के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।

सोलर प्लांट लगवाने से पहले परिवारों को अपनी औसत बिजली खपत का भी आकलन करना चाहिए। अगर किसी घर की खपत कम है तो छोटे क्षमता वाले सिस्टम से भी जरूरत पूरी हो सकती है, जबकि ज्यादा बिजली खपत वाले घरों में बड़ी क्षमता का सिस्टम अधिक उपयोगी हो सकता है। हालांकि सब्सिडी की अधिकतम केंद्रीय सीमा 3 किलोवाट तक है, इसलिए 3 किलोवाट से अधिक क्षमता का सिस्टम लगाने पर अतिरिक्त क्षमता की लागत पर वही केंद्रीय सहायता नहीं मिलती।

सोलर पैनल लगाने के लिए घर की छत पर पर्याप्त खुली जगह होना भी जरूरी है। आसपास ऊंची इमारत, पेड़ या दूसरी संरचना की वजह से अगर पैनल पर दिन के समय लगातार छाया पड़ती है तो बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए सिस्टम लगवाने से पहले अधिकृत विक्रेता से साइट सर्वे कराना उपयोगी रहता है। छत की मजबूती, पैनल की दिशा, धूप की उपलब्धता और सिस्टम की क्षमता जैसे पहलुओं को देखकर ही अंतिम क्षमता तय करना बेहतर होता है।

बिहार सरकार की अतिरिक्त सहायता के कारण अब 3 किलोवाट तक के सिस्टम में उपभोक्ता को मिलने वाली कुल वित्तीय मदद 98 हजार रुपये तक पहुंच रही है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर परिवार को सीधे 98 हजार रुपये मिलेंगे। सहायता सोलर प्लांट की स्वीकृत क्षमता और योजना की पात्रता के अनुसार अलग-अलग होगी। 1 किलोवाट, 2 किलोवाट और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के लिए सहायता अलग निर्धारित है।

इस योजना के विस्तार का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि देश में रूफटॉप सोलर अपनाने की रफ्तार लगातार बढ़ी है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार जुलाई 2026 तक पीएम सूर्य घर योजना के तहत देशभर में 50 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का आंकड़ा पार हो चुका था। लगभग 19 लाख परिवारों को बिजली का बिल शून्य मिलने की जानकारी भी सरकार ने दी थी। योजना के तहत 14.8 गीगावाट के बराबर रूफटॉप सोलर क्षमता चालू होने की बात भी सरकारी आंकड़ों में कही गई है।

बिहार के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इस योजना का फायदा केवल तत्काल सब्सिडी तक सीमित नहीं है। सोलर सिस्टम एक बार स्थापित होने के बाद कई वर्षों तक बिजली उत्पादन कर सकता है। इससे सामान्य परिस्थितियों में ग्रिड से खरीदी जाने वाली बिजली की मात्रा घट सकती है। हालांकि सिस्टम की वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि परिवार की बिजली खपत कितनी है, सोलर सिस्टम कितनी बिजली पैदा करता है और अतिरिक्त बिजली के समायोजन या बिक्री की स्थानीय व्यवस्था किस तरह लागू होती है।

बिहार में राज्य सहायता फिलहाल योजना को और आकर्षक बनाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्य की अतिरिक्त सहायता 31 मार्च 2027 तक उपलब्ध है। इसलिए जो घरेलू उपभोक्ता अपने घर पर रूफटॉप सोलर लगाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें आवेदन से पहले मौजूदा पात्रता, सब्सिडी और समयसीमा की जानकारी आधिकारिक पोर्टल से जरूर जांच लेनी चाहिए, क्योंकि सरकारी योजनाओं के नियम और समयसीमा में आगे बदलाव हो सकता है।

कुल मिलाकर बिहार में पीएम सूर्य घर योजना के जरिए घर की छत अब बिजली बचाने के साथ बिजली बनाने का साधन भी बन सकती है। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त सहायता से 1 किलोवाट पर कुल 40 हजार रुपये, 2 किलोवाट पर 80 हजार रुपये और 3 किलोवाट या उससे अधिक पर अधिकतम 98 हजार रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। सोलर पैनल से घर की बिजली जरूरत पूरी करने के साथ बिजली बिल में बचत की संभावना बढ़ती है और अतिरिक्त उत्पादन होने पर उसे ग्रिड में भेजने की व्यवस्था से भविष्य में अतिरिक्त आर्थिक लाभ का रास्ता भी खुल सकता है। योजना का लाभ लेने वाले परिवारों को आवेदन और स्थापना की पूरी प्रक्रिया अधिकृत माध्यम से ही पूरी करनी चाहिए।

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