बिहार की ग्रामीण महिलाओं की बढ़ेगी कमाई, PNB ने बताया पैकेजिंग से ब्रांडिंग तक का तरीका

राजगीर में PNB ने जीविका समूहों को क्रेडिट लिंकेज के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया। तीन समूहों को 20-20 लाख की वित्तीय सहायता मिली।
बिहार की ग्रामीण महिलाओं की बढ़ेगी कमाई, PNB ने बताया पैकेजिंग से ब्रांडिंग तक का तरीका
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बिहार की ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आमदनी बढ़ाने की दिशा में पंजाब नेशनल बैंक ने एक नई पहल पर जोर दिया है। नालंदा के राजगीर में पंजाब नेशनल बैंक की ओर से स्वयं सहायता समूहों के लिए आयोजित आउटरीच कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं को केवल ऋण लेकर कच्चा माल खरीदने तक सीमित नहीं रहने, बल्कि अपने उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और स्मार्ट मार्केटिंग पर भी ध्यान देने की सलाह दी गई। बैंक का कहना है कि अगर स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद को बेहतर तरीके से तैयार करने के साथ उसकी पहचान और बाजार तक पहुंच मजबूत करें, तो उनकी आय और मुनाफे में बढ़ोतरी की संभावना है।

राजगीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन पंजाब नेशनल बैंक के अंचल कार्यालय पटना की ओर से किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता PNB के एमडी एवं सीईओ अशोक चंद्रा ने की। इस दौरान जीविका से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को बैंक की क्रेडिट लिंकेज सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सहायता के जरिए आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना और स्वयं सहायता समूहों के कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए बैंकिंग सहयोग उपलब्ध कराना था।

कार्यक्रम में बैंक की ओर से ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए जिस मॉडल पर जोर दिया गया, उसमें केवल कर्ज उपलब्ध कराना ही शामिल नहीं है। PNB के अनुसार स्वयं सहायता समूहों को ऋण मिलने के बाद अपने उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी काम करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं कई तरह के उत्पाद तैयार करती हैं, लेकिन कई बार बेहतर उत्पाद होने के बावजूद बाजार तक उनकी पहुंच सीमित रह जाती है। ऐसे में उत्पाद को आकर्षक पैकेजिंग और एक पहचान देने से उसे बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

PNB के एमडी एवं सीईओ अशोक चंद्रा ने कार्यक्रम में कहा कि बैंक का प्रयास है कि क्रेडिट लिंकेज के जरिए जीविका दीदियां केवल कच्चा माल खरीदने तक सीमित न रहें। उन्हें अपने उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और स्मार्ट मार्केटिंग पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि आमदनी और मुनाफा बढ़ाया जा सके। बैंक के मुताबिक स्वयं सहायता समूह अब बिहार की ग्रामीण, अर्ध-शहरी और शहरी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।

ग्रामीण महिलाओं के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से छोटी-छोटी आर्थिक गतिविधियों को कारोबार में बदला जा सकता है। महिलाएं समूह बनाकर बचत करती हैं और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने के बाद कारोबार के लिए ऋण ले सकती हैं। इसके जरिए खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई, पशुपालन, कृषि आधारित गतिविधियों और दूसरे स्थानीय कारोबार को आगे बढ़ाने के अवसर बनते हैं। हालांकि किसी कारोबार की वास्तविक आय बाजार, लागत, बिक्री और प्रबंधन जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।

PNB ने कार्यक्रम में अपने बैंकिंग नेटवर्क और स्वयं सहायता समूहों के साथ क्रेडिट लिंकेज की स्थिति की जानकारी भी साझा की। बैंक के आंकड़ों के मुताबिक PNB ने कुल 85,321 स्वयं सहायता समूहों को बैंक से जोड़ा है। इनमें से 72,547 समूहों को क्रेडिट लिंकेज उपलब्ध कराया गया है। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में SHG बैंकिंग प्रणाली से जुड़ चुके हैं और उनके लिए ऋण सुविधा का रास्ता बनाया गया है।

राजगीर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तीन जीविका समूहों को वित्तीय सहायता की स्वीकृति भी दी गई। चांदनी जीविका, विष्णु जीविका और दुर्गा स्वयं सहायता समूह को 20-20 लाख रुपये की स्वीकृति का चेक प्रदान किया गया। इस तरह इन तीन समूहों को कुल 60 लाख रुपये की स्वीकृत वित्तीय सहायता मिली। यह राशि समूहों को अपनी आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और कारोबार के विस्तार में इस्तेमाल करने का अवसर दे सकती है।

इसके अलावा लखपति दीदी योजना के तहत दो जीविका दीदियों को कुल चार लाख रुपये का चेक भी दिया गया। लखपति दीदी पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय को बढ़ाकर उन्हें अधिक मजबूत आर्थिक स्थिति तक पहुंचाना है। ऐसे कार्यक्रमों में बैंक ऋण और समूह आधारित कारोबार को जोड़कर महिलाओं को आय के नए अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान बैंक सखी रानी कुमारी और रूपम कुमारी को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। बैंक सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं और आम लोगों के बीच संपर्क का माध्यम बनती हैं। ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी, वित्तीय लेनदेन और योजनाओं तक पहुंच बनाने में स्थानीय स्तर पर काम करने वाली ऐसी महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

बिहार में स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी लगातार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के DAY-NRLM के तहत भी ग्रामीण परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर वित्तीय समावेशन, आजीविका और उद्यमिता को बढ़ावा देने की व्यवस्था है। अगस्त 2026 में केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 13,53,025 महिला स्वयं सहायता समूह दर्ज थे।

SHG मॉडल में बैंक क्रेडिट का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने वाली महिलाओं के सामने शुरुआती पूंजी की समस्या रहती है। यदि समूह को संस्थागत ऋण मिलता है तो वह अपने कारोबार के लिए जरूरी सामान खरीद सकता है। इसके बाद उत्पादन बढ़ाने, उपकरण खरीदने, पैकेजिंग सुधारने या बाजार तक पहुंच बनाने के लिए भी पूंजी का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि ऋण के साथ समय पर भुगतान और कारोबार से पर्याप्त आय सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

PNB की ओर से पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर जोर दिए जाने के पीछे भी यही विचार है कि उत्पाद तैयार करने के बाद उसे बाजार के हिसाब से पेश किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले कई उत्पाद स्थानीय स्तर पर अच्छी मांग रखते हैं, लेकिन उनकी बिक्री का दायरा सीमित हो सकता है। यदि वही उत्पाद बेहतर पैकिंग, स्पष्ट लेबल, पहचान और डिजिटल या संगठित बाजार के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचे तो बिक्री के नए अवसर बन सकते हैं।

ब्रांडिंग से किसी उत्पाद को एक अलग पहचान देने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के लिए किसी समूह द्वारा तैयार खाद्य सामग्री, हस्तशिल्प या अन्य स्थानीय उत्पाद को एक सामूहिक नाम और पहचान के साथ बाजार में उतारा जाए तो ग्राहक उसे दोबारा पहचान सकता है। इसके साथ उत्पाद की गुणवत्ता, साफ-सफाई, पैकेजिंग और उचित मूल्य भी महत्वपूर्ण रहते हैं। बैंक ने इसी तरह उत्पादन के साथ बाजार की जरूरत समझने पर जोर दिया है।

स्मार्ट मार्केटिंग का मतलब भी केवल दुकान में सामान रखने तक सीमित नहीं है। आज ग्रामीण उत्पादों के लिए स्थानीय बाजार के अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, मेलों और प्रदर्शनियों जैसे माध्यम भी उपलब्ध हैं। स्वयं सहायता समूह इन माध्यमों के जरिए अपने उत्पादों की जानकारी ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। हालांकि डिजिटल बिक्री के लिए प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स, भुगतान व्यवस्था और ग्राहक सेवा जैसी सुविधाओं की भी जरूरत होती है।

बिहार में जीविका से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर मेले और बाजार संपर्क कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। हाल में पटना में आयोजित बिहार सरस मेला में बिहार सहित कई राज्यों की ग्रामीण महिला उद्यमियों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए। इस तरह के आयोजन ग्रामीण उत्पादों को शहरी ग्राहकों तक पहुंचाने का एक माध्यम बन सकते हैं।

PNB का राजगीर कार्यक्रम भी बैंकिंग सहायता को कारोबार विस्तार से जोड़ने की दिशा में इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। यहां केवल ऋण देने की बात नहीं हुई, बल्कि समूहों को यह समझाने पर जोर दिया गया कि ऋण का इस्तेमाल किस तरह ऐसी गतिविधियों में किया जाए जिससे आय पैदा हो और कारोबार आगे बढ़े। बैंक ने जीविका के साथ सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जताई।

कार्यक्रम में यह भी संदेश दिया गया कि स्वयं सहायता समूह अब केवल बचत और छोटे ऋण तक सीमित नहीं हैं। इन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उद्यमिता के आधार के रूप में विकसित किया जा सकता है। अगर समूह उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के स्तर पर मजबूत होते हैं तो उनकी गतिविधियां छोटे घरेलू कारोबार से आगे बढ़कर संगठित व्यवसाय का रूप ले सकती हैं।

ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए केवल ऋण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उन्हें बाजार की जानकारी, उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने का प्रशिक्षण, पैकेजिंग की समझ, डिजिटल भुगतान, हिसाब-किताब और ग्राहक तक पहुंच बनाने जैसी चीजों की जानकारी भी जरूरी होती है। इसी वजह से बैंक और आजीविका मिशन के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है।

PNB की ओर से दिए गए आंकड़े बताते हैं कि बैंक के साथ हजारों स्वयं सहायता समूहों का क्रेडिट लिंकेज बना हुआ है। 85,321 समूहों को बैंक से जोड़ना और 72,547 समूहों को क्रेडिट लिंकेज देना बैंक की SHG केंद्रित गतिविधियों के बड़े पैमाने को दिखाता है। हालांकि प्रत्येक समूह को मिलने वाली राशि, कारोबार का प्रकार और ऋण की शर्तें अलग हो सकती हैं।

राजगीर में तीन समूहों को 20-20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की स्वीकृति इस कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रही। इन समूहों के लिए यह राशि अपने मौजूदा कारोबार को विस्तार देने, जरूरी सामान खरीदने या उत्पादन क्षमता बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है। हालांकि राशि का वास्तविक इस्तेमाल संबंधित समूहों की योजना और ऋण की शर्तों के अनुसार होगा।

कार्यक्रम के बाद PNB के एमडी एवं सीईओ अशोक चंद्रा ने पटना में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात भी की। इस दौरान उन्होंने बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और बैंक की ओर से एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दिए जाने की जानकारी दी।

ग्रामीण महिलाओं के लिए बैंकिंग और आजीविका से जुड़े ऐसे प्रयासों का असर केवल व्यक्तिगत आय तक सीमित नहीं रहता। जब किसी महिला की अपनी आमदनी बढ़ती है तो परिवार के खर्च, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू निवेश में उसकी भागीदारी बढ़ सकती है। इससे महिलाओं की आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत हो सकती है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि कारोबार कितना टिकाऊ रहता है और महिला को बाजार में कितनी नियमित बिक्री मिलती है।

बिहार में ग्रामीण महिलाओं को डेयरी जैसे व्यवसायों के लिए भी संस्थागत ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 8,723 ग्रामीण महिलाओं को डेयरी कारोबार के लिए कुल 32.26 करोड़ रुपये का ऋण दिया जा चुका था। इससे यह संकेत मिलता है कि अलग-अलग बैंकिंग माध्यमों से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए पूंजी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

अब PNB की ओर से पैकेजिंग, ब्रांडिंग और स्मार्ट मार्केटिंग पर जोर देने से ग्रामीण महिलाओं के कारोबार के अगले चरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यदि कोई समूह केवल उत्पादन करता है लेकिन अपने उत्पाद को सही बाजार तक नहीं पहुंचा पाता, तो उसकी आय सीमित रह सकती है। इसके विपरीत उत्पादन के साथ बाजार की मांग, ग्राहक की पसंद और उत्पाद की प्रस्तुति पर ध्यान दिया जाए तो कारोबार का दायरा बढ़ सकता है।

राजगीर में आयोजित कार्यक्रम में दिया गया संदेश इसी बदलाव की ओर इशारा करता है कि स्वयं सहायता समूहों को केवल ऋण लेने वाले समूह के रूप में नहीं, बल्कि छोटे उद्यम चलाने वाली इकाइयों के रूप में विकसित किया जाए। बैंकिंग सहायता के साथ कौशल, बाजार और ब्रांडिंग का जुड़ाव ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक अवसरों का दायरा बढ़ा सकता है।

फिलहाल PNB ने स्वयं सहायता समूहों के साथ अपने क्रेडिट लिंकेज को आगे बढ़ाने और जीविका के साथ सहयोग जारी रखने की बात कही है। राजगीर कार्यक्रम में तीन समूहों को 20-20 लाख रुपये की स्वीकृति और दो जीविका दीदियों को चार लाख रुपये की सहायता दिए जाने से यह पहल स्थानीय स्तर पर भी सामने आई है। आने वाले समय में इन समूहों की राशि किस कारोबार में लगती है और उससे कितनी आय बढ़ती है, यह उनके कारोबार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

बिहार की ग्रामीण महिलाओं के लिए इस पहल का मुख्य संदेश यही है कि बैंक ऋण को केवल खर्च करने के बजाय उसे ऐसे कारोबार में लगाया जाए, जिससे नियमित आय पैदा हो। उत्पाद तैयार करने के बाद उसकी पैकेजिंग, पहचान और बाजार तक पहुंच पर भी ध्यान दिया जाए। PNB ने इसी दिशा में जीविका दीदियों और स्वयं सहायता समूहों को आगे बढ़ने का संदेश दिया है।

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