पंजाब केसरी समूह ने CM भगवंत मान पर प्रेस को डराने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया। राज्य में मीडिया स्वतंत्रता और राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
Punjab: पंजाब की राजनीति और मीडिया जगत में उस वक्त बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान पंजाब केसरी अखबार समूह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पंजाब केसरी समूह का दावा है कि आम आदमी पार्टी सरकार निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता से असहज होकर प्रेस को डराने और दबाव में लाने की कोशिश कर रही है। इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों से लेकर मीडिया जगत तक बहस तेज हो गई है।
पंजाब केसरी समूह का सीएम मान को पत्र
पंजाब केसरी समूह के वरिष्ठ पदाधिकारियों विजय कुमार चोपड़ा, अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान से सीधे हस्तक्षेप की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में पंजाब केसरी समूह और उससे जुड़े संस्थानों के खिलाफ जिस तरह से लगातार छापेमारी और कार्रवाई की जा रही है, उससे यह संदेह गहराता है कि सरकार का मकसद प्रेस को डराना है।
निष्पक्ष रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ विवाद
पंजाब केसरी समूह का दावा है कि यह पूरा घटनाक्रम 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। यह रिपोर्ट सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के खिलाफ विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ी थी। समूह का कहना है कि यह खबर पूरी तरह संतुलित और निष्पक्ष थी, लेकिन इसके बाद ही सरकारी एजेंसियों की गतिविधियां तेज हो गईं।
सरकारी विज्ञापनों पर रोक का आरोप
पत्र में यह भी कहा गया है कि 2 नवंबर 2025 से पंजाब सरकार ने पंजाब केसरी समूह को दिए जाने वाले सभी सरकारी विज्ञापनों पर रोक लगा दी। पंजाब केसरी समूह हिंदी और पंजाबी भाषा के सबसे अधिक प्रसार संख्या वाले अखबारों में शामिल है। समूह का आरोप है कि यह कदम प्रेस पर आर्थिक दबाव बनाने के इरादे से उठाया गया। इसके बावजूद समूह ने अपनी स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता जारी रखने का दावा किया है।
छापेमारी की लंबी श्रृंखला का जिक्र
पंजाब केसरी समूह ने पत्र में विस्तार से उन कार्रवाइयों का उल्लेख किया है, जिन्हें वह लक्षित कार्रवाई बता रहा है। 11 जनवरी को जालंधर स्थित पार्क प्लाजा होटल में FSSAI द्वारा छापा मारा गया। इसके अगले दिन 12 जनवरी को उसी होटल में GST विभाग और आबकारी विभाग ने कार्रवाई की। इसी दिन लुधियाना स्थित पंजाब केसरी प्रिंटिंग प्रेस पर कारखाना विभाग के उप निदेशक द्वारा छापा मारे जाने का भी उल्लेख किया गया।
लगातार बढ़ती कार्रवाई से चिंता
पत्र में बताया गया है कि 13 जनवरी को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जालंधर के होटल में छापा मारा। इसी दिन आबकारी विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और 14 जनवरी को होटल का लाइसेंस रद्द करने का आदेश पारित किया गया। इसके अलावा 14 जनवरी को होटल का बिजली कनेक्शन काटे जाने की भी बात कही गई है। 15 जनवरी को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लुधियाना और जालंधर स्थित प्रिंटिंग प्रेस पर कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया।
कामकाज ठप होने की आशंका
पंजाब केसरी समूह ने चेतावनी दी है कि इन कार्रवाइयों के कारण जालंधर, लुधियाना और बठिंडा स्थित प्रिंटिंग प्रेस का कामकाज बाधित हो सकता है या पूरी तरह बंद होने की नौबत आ सकती है। पत्र में यह भी कहा गया है कि सुरानुस्सी जालंधर, फोकल प्वाइंट लुधियाना और आईजीसी बठिंडा स्थित प्रेस के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, जिससे डर और दबाव का माहौल बन रहा है।
प्रेस की आजादी का इतिहास याद दिलाया

पंजाब केसरी समूह ने अपने पत्र में अपने इतिहास का भी जिक्र किया है। समूह ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि दिवंगत लाला जगत नारायण ने 1949 में हिंद समाचार की स्थापना की थी और 1965 में पंजाब केसरी का प्रकाशन शुरू हुआ। समूह ने कहा कि पंजाब में उग्रवाद और आतंकवाद के दौर में निडर पत्रकारिता के कारण लाला जगत नारायण, रमेश चंद्र चोपड़ा और 60 से अधिक कर्मचारी, एजेंट, हॉकर और पत्रकार शहीद हुए।
डराने की मंशा का आरोप
पत्र में साफ कहा गया है कि विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा एक साथ और पूर्वनिर्धारित इरादे से की जा रही कार्रवाइयां डराने और दबाव बनाने की मंशा को दर्शाती हैं। समूह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से उम्मीद जताई है कि उनका कार्यालय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को डराने की किसी भी कोशिश को रोकेगा।
चुनावी माहौल में लोकतंत्र पर खतरे की चेतावनी
पंजाब केसरी समूह ने यह भी कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता में किसी भी तरह का हस्तक्षेप पंजाब में लोकतंत्र को गंभीर रूप से कमजोर करेगा, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में चुनाव नजदीक हैं। समूह का कहना है कि स्वतंत्र मीडिया के बिना निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं।
पंजाब सरकार का जवाब और आरोपों से इनकार
पंजाब सरकार ने देर शाम एक आधिकारिक बयान जारी कर पंजाब केसरी समूह के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकार ने कहा कि यह पूरा मामला मीडिया को डराने का नहीं, बल्कि कानून के तहत सामने आए गंभीर उल्लंघनों से जुड़ा है। सरकार के मुताबिक पंजाब केसरी समूह चुनिंदा कार्रवाइयों का जिक्र कर एक कहानी गढ़ने की कोशिश कर रहा है।
सरकार ने क्या कहा
पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन कार्रवाइयों का जिक्र किया जा रहा है, वे वैधानिक प्राधिकरणों द्वारा कानून के दायरे में रहकर की गई हैं। सरकार का कहना है कि इन कार्रवाइयों के कारण, निष्कर्ष और आदेश आधिकारिक जांच रिपोर्टों और वैधानिक नोटिसों में दर्ज हैं, जिन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
पार्क प्लाजा होटल पर कार्रवाई का पक्ष
सरकार ने कहा कि जालंधर के पार्क प्लाजा होटल पर की गई आबकारी कार्रवाई कोई सामान्य निरीक्षण नहीं थी। यह एक औपचारिक जांच का नतीजा थी, जिसमें आबकारी कानून के कई गंभीर उल्लंघन सामने आए। सरकार के अनुसार कारण बताओ नोटिस, व्यक्तिगत सुनवाई, रिकॉर्ड की जांच और लाइसेंसधारक के कबूलनामे के बाद ही लिखित आदेश पारित किया गया।
प्रिंटिंग प्रेस में भी उल्लंघन का दावा
पंजाब सरकार ने यह भी कहा कि जांच केवल होटल तक सीमित नहीं थी। श्रम और कारखाना विभाग द्वारा समूह से जुड़ी प्रिंटिंग इकाइयों के निरीक्षण में श्रम कानूनों, सुरक्षा मानकों और वैधानिक रिकॉर्ड से जुड़े गंभीर उल्लंघन पाए गए। सरकार का कहना है कि प्रेस की स्वतंत्रता के नाम पर श्रम, सुरक्षा और पर्यावरण कानूनों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
विपक्ष का सरकार पर हमला
इस विवाद के बाद भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल सहित विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला। भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता की ताकत का इस्तेमाल कर मीडिया की आवाज दबा रही है। भाजपा ने यह भी कहा कि उसका प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे पर राज्यपाल से मुलाकात करेगा।











