प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या पर रिकॉर्ड भीड़ के चलते प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम नोज जाने से रोक दिया। इस दौरान समर्थकों की नाराजगी के चलते मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
UP News: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। संगम नोज की ओर जाने वाले रास्तों पर श्रद्धालुओं का दबाव इतना बढ़ गया कि प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े। इसी बीच ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का काफिला जब संगम की ओर बढ़ रहा था, तो सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। शंकराचार्य के समर्थक इस फैसले से नाराज हो गए और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की घटना सामने आई। हालात को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की गई।
क्यों रोका गया शंकराचार्य का जुलूस
मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान को लेकर पहले से ही प्रशासन अलर्ट मोड पर था। सुबह से ही लाखों श्रद्धालु संगम नोज की ओर पहुंच रहे थे। इसी दौरान जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रथ संगम की तरफ बढ़ा, तो पुलिस ने सुरक्षा और crowd management को ध्यान में रखते हुए उनका काफिला रोक दिया।
प्रशासन ने शंकराचार्य से आग्रह किया कि वे रथ से उतरकर पैदल आगे बढ़ें, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी तरह की भगदड़ की स्थिति न बने। हालांकि, उनके समर्थकों ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया और वे रथ के साथ ही आगे बढ़ने पर अड़े रहे। इसी बात को लेकर पुलिस और समर्थकों के बीच कहासुनी बढ़ गई, जो बाद में धक्का-मुक्की में बदल गई।
मौके पर रुका रहा काफिला, अधिकारी पहुंचे
घटना के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जुलूस काफी देर तक वहीं रुका रहा। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराने की कोशिश की गई। प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया था, ताकि किसी श्रद्धालु को नुकसान न पहुंचे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भीड़ का दबाव लगातार बढ़ रहा था और संगम नोज पर पहले से ही लाखों लोग मौजूद थे। ऐसे में किसी भी बड़े काफिले को आगे बढ़ने देना जोखिम भरा हो सकता था।
सुबह से ही रिकॉर्ड भीड़, 1 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
माघ मेले में इस बार मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं की संख्या ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8 बजे तक 1 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगा चुके थे। मेला प्रशासन का अनुमान है कि पूरे दिन में यह संख्या करीब 3 करोड़ तक पहुंच सकती है।
सुबह 4 बजे तक ही करीब 50 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। वहीं सुबह 7 बजे तक यह आंकड़ा 75 लाख के पार चला गया। लगातार बढ़ती भीड़ के कारण संगम और आसपास के इलाकों में जबरदस्त दबाव बना रहा।
बीते दिनों से ही उमड़ रही है भीड़
शनिवार को भी प्रयागराज में संगम स्नान के लिए करीब 1.5 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। इसके चलते प्रशासन ने पहले से ही अतिरिक्त इंतजाम किए थे, लेकिन मौनी अमावस्या पर आस्था का सैलाब उम्मीद से कहीं ज्यादा रहा।
धूप निकलने के साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ गई। देश के अलग-अलग राज्यों से लोग प्रयागराज पहुंचे हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और हाईवे पर भी भारी भीड़ देखने को मिली।
माघ मेले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए माघ मेले में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। संगम क्षेत्र और पूरे मेला परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। UP ATS की पेट्रोलिंग टीमें लगातार गश्त कर रही हैं।
प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। ड्रोन और CCTV कैमरों के जरिए भीड़ पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि किसी भी स्थिति में भगदड़ या अप्रिय घटना न हो।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करें। भीड़ अधिक होने के कारण कुछ जगहों पर रोक लगाई जा सकती है, लेकिन यह सब श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए ही किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि साधु-संतों और प्रमुख धार्मिक व्यक्तियों के काफिलों को भीड़ के हिसाब से नियंत्रित किया जा रहा है, ताकि आम श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।











