संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू, मिडिल ईस्ट संकट पर विदेश मंत्री एस जयशंकर दोनों सदनों में देंगे बयान

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू, मिडिल ईस्ट संकट पर विदेश मंत्री एस जयशंकर दोनों सदनों में देंगे बयान

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर मिडिल ईस्ट की स्थिति पर दोनों सदनों में बयान देंगे। सत्र के दौरान विदेश नीति, तेल आपूर्ति और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार-विपक्ष के बीच बहस संभव है।

New Delhi: संसद के बजट सत्र (Budget Session) का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है और इसके साथ ही राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहने की संभावना है। इस चरण में कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। खास तौर पर पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट (Middle East) की मौजूदा स्थिति, खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और भारत की विदेश नीति जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

सत्र की शुरुआत के साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तृत बयान देंगे। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के समय में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। ऐसे में भारत सरकार की नीति और रणनीति को लेकर संसद में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।

पश्चिम एशिया पर सरकार का आधिकारिक रुख

विदेश मंत्री एस जयशंकर का संसद में दिया जाने वाला बयान इस पूरे मुद्दे पर सरकार का आधिकारिक रुख साफ कर सकता है। पश्चिम एशिया के कई देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे देश शामिल हैं।

मौजूदा हालात को देखते हुए इन देशों में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। ऐसे में सरकार यह बताने की कोशिश कर सकती है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठा रहा है और अगर स्थिति बिगड़ती है तो किस तरह की तैयारी की गई है।

विपक्ष सरकार से पूछ सकता है सवाल

विदेश मंत्री के बयान के बाद विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से कई सवाल उठा सकता है। विपक्ष का मानना है कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात का भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है।

विपक्ष यह भी पूछ सकता है कि अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो वहां काम कर रहे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने या उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार की क्या योजना है।

इसके अलावा विदेश नीति को लेकर भी विपक्ष सरकार की रणनीति पर सवाल उठा सकता है। संसद में इस विषय पर होने वाली बहस के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क पेश करेंगे।

कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने

बजट सत्र के दूसरे चरण में केवल विदेश नीति ही नहीं बल्कि कई अन्य राजनीतिक मुद्दे भी चर्चा में रहेंगे। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्ष के बीच कई विषयों पर टकराव देखने को मिल सकता है।

इनमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भी एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष द्वारा उठाए गए इस कदम को लेकर पहले ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी है।

इसके अलावा पश्चिम एशिया का संकट और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसे विषय भी संसद में बहस का कारण बन सकते हैं। इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी चर्चा होने की संभावना है।

तेल आपूर्ति पर बढ़ी वैश्विक चिंता

संसद में होने वाली चर्चा के दौरान वैश्विक तेल आपूर्ति का मुद्दा भी उठ सकता है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज (Strait of Hormuz) को लेकर चिंता जताई जा रही है।

यह समुद्री मार्ग दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संभालता है। अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर करीब एक चौथाई तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। ऐसे में अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

इसी बीच अमेरिका प्रशासन ने भारत को 30 दिनों के लिए रूस से तेल खरीदने की छूट दी है। इस फैसले को लेकर भी राजनीतिक बहस की संभावना है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछ सकता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर आगे की रणनीति क्या है।

राष्ट्रपति से जुड़े विवाद पर एनडीए का रुख

बजट सत्र के दौरान एक और मुद्दा राजनीतिक बहस को तेज कर सकता है। यह मुद्दा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से जुड़े कथित प्रोटोकॉल विवाद का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में राष्ट्रपति के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान हुए विवाद को शर्मनाक और अभूतपूर्व बताया था। उन्होंने इस घटना के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।

ऐसे में सत्तारूढ़ एनडीए इस मुद्दे को संसद में उठा सकता है और विपक्ष पर निशाना साध सकता है। इससे सदन में राजनीतिक माहौल और अधिक गरमाने की संभावना है।

विदेश नीति पर राहुल गांधी की आलोचना

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी हाल ही में सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भारत की विदेश नीति देश के इतिहास, भूगोल और सत्य-अहिंसा के मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए।

राहुल गांधी के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि भारत किस दिशा में अपनी विदेश नीति को आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में संसद में होने वाली बहस के दौरान यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है।

2 अप्रैल तक चलेगा संसद सत्र

संसद का यह बजट सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान सरकार को कई अहम विधायी काम पूरे करने हैं। इनमें वित्त विधेयक (Finance Bill) को पारित कराना और विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों को मंजूरी दिलाना शामिल है।

हालांकि अभी तक सरकार ने इस सत्र के लिए अपना पूरा विधायी एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया है। इसके बावजूद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

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