पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी राज्य में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए CAPF की 500 कंपनियां तैनात रहेंगी। CRPF महानिदेशक जीपी सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अगले आदेश तक केंद्रीय बल राज्य में बने रहेंगे।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भी राज्य में केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती जारी रहेगी। चुनाव आयोग ने कानून-व्यवस्था और संवेदनशील इलाकों में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 500 कंपनियों को अगले आदेश तक राज्य में तैनात रखने का निर्णय लिया है।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब चुनावी हिंसा और राजनीतिक तनाव को लेकर राज्य पहले से ही राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि चुनाव परिणाम आने तक और उसके बाद भी हालात पर करीबी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
दूसरे चरण के मतदान के साथ संपन्न हुई चुनाव प्रक्रिया
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को दूसरे चरण के मतदान के साथ पूरी हो गई। दूसरे चरण में 142 विधानसभा सीटों पर वोट डाले गए।
चुनाव आयोग ने पूरे चुनाव के दौरान स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की थी। कई संवेदनशील जिलों और राजनीतिक रूप से तनावग्रस्त क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
CRPF डीजी जीपी सिंह ने की पुष्टि
जीपी सिंह, जो Central Reserve Police Force (CRPF) के महानिदेशक हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर इस फैसले की पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि सभी फोर्स कमांडरों को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं कि चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद भी CAPF की 500 कंपनियां पश्चिम बंगाल में तैनात रहेंगी, जब तक कोई नया आदेश जारी नहीं होता।
उन्होंने यह भी बताया कि यह व्यवस्था चुनाव आयोग के 19 मार्च 2026 के आधिकारिक आदेश का हिस्सा है।
किन-किन बलों की कितनी कंपनियां रहेंगी तैनात?
चुनाव आयोग की योजना के अनुसार राज्य में निम्न केंद्रीय बलों की कंपनियां तैनात रहेंगी—
- Central Reserve Police Force (CRPF) – 200 कंपनियां
- Border Security Force (BSF) – 150 कंपनियां
- Central Industrial Security Force (CISF) – 50 कंपनियां
- Indo-Tibetan Border Police (ITBP) – 50 कंपनियां
- Sashastra Seema Bal (SSB) – 50 कंपनियां
इन बलों को राज्य के विभिन्न जिलों, संवेदनशील मतदान क्षेत्रों और संभावित तनावग्रस्त इलाकों में तैनात किया जाएगा।
चुनाव बाद भी क्यों जरूरी मानी जा रही है सुरक्षा?
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया केवल मतदान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि परिणाम घोषित होने के बाद भी राजनीतिक हिंसा और टकराव की आशंका बनी रहती है।
पिछले चुनावों में भी कई इलाकों में—
- राजनीतिक झड़पें
- बूथ कब्जे के आरोप
- हिंसक प्रदर्शन
- पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले
- आगजनी और तोड़फोड़
जैसी घटनाएं सामने आई थीं।
इसी अनुभव को देखते हुए चुनाव आयोग इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
चुनाव आयोग की रणनीति क्या है?
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग की रणनीति तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है—
1. संवेदनशील इलाकों की निगरानी
उन जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे जहां पहले हिंसा या तनाव की घटनाएं हुई हैं।
2. मतगणना केंद्रों की सुरक्षा
मतगणना से पहले और बाद में स्ट्रॉन्ग रूम तथा काउंटिंग सेंटर की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी।
3. राजनीतिक टकराव रोकना
परिणाम घोषित होने के बाद संभावित राजनीतिक संघर्षों को रोकने के लिए फ्लैग मार्च और गश्त बढ़ाई जाएगी।

राजनीतिक माहौल पर क्या असर पड़ेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार CAPF की लंबी तैनाती से राज्य में सुरक्षा का माहौल मजबूत होगा, लेकिन यह फैसला राजनीतिक बहस का विषय भी बन सकता है।
कुछ विपक्षी दल लंबे समय से राज्य में केंद्रीय बलों की अधिक मौजूदगी की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि स्थानीय प्रशासन निष्पक्ष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रहा है।
वहीं सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं ने पहले केंद्रीय बलों की अत्यधिक तैनाती पर सवाल भी उठाए थे।
बंगाल चुनाव पर देशभर की नजर
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में चुनाव प्रचार के दौरान कई बड़े नेताओं ने रैलियां कीं और चुनावी मुकाबला काफी तीखा रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य की राजनीतिक दिशा और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ी
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां लगातार इंटेलिजेंस इनपुट्स की निगरानी कर रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार—
- संवेदनशील इलाकों में ड्रोन निगरानी बढ़ाई गई
- सोशल मीडिया मॉनिटरिंग तेज की गई
- स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय बलों के बीच समन्वय बढ़ाया गया
- त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को तैयार रखा गया है
अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता आम नागरिकों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना है।












