पश्चिम एशिया तनाव: भारत को BRICS में साझा सहमति बनाने में आ रही दिक्कतें, विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

Ministry of External Affairs ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण भारत को BRICS में साझा सहमति बनाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारत के लिए कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ा दी हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jyaiswal ने बताया कि इस क्षेत्र में हाल की घटनाओं के कारण BRICS देशों के बीच साझा बयान पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। 

नई दिल्ली: Ministry of External Affairs के प्रवक्ता Randeep Goyal Jaiswal ने कहा कि पाकिस्तान का अवैध परमाणु कार्यक्रम दुनिया के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए हमलों की भी निंदा की और कहा कि इन हमलों में नागरिक ढांचों को भी निशाना बनाया गया। जब उनसे पूछा गया कि क्या पश्चिम एशिया के मामले में भारत को BRICS के साझा बयान में सहमति बनाने में दिक्कत हो रही है, तो जायसवाल ने माना कि इसमें चुनौतियां हैं। 

उन्होंने बताया कि हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री Mohammad Javad Zarif Araghchi ने भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar से बातचीत में यह कहा कि ब्रिक्स के साझा बयान में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की निंदा की जाए और ब्रिक्स देशों की एकजुटता दिखाई जाए।

BRICS में साझा बयान पर सहमति में दिक्कतें

भारत के लिए BRICS के साझा बयान तैयार करना इस समय कठिन हो गया है, क्योंकि कई सदस्य देश ईरान-इजरायल युद्ध की घटनाओं से प्रभावित हैं। ईरान के विदेश मंत्री Hossein Amir-Abdollahian ने हाल ही में विदेश मंत्री S. Jaishankar से बातचीत में BRICS के बयान में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों की निंदा शामिल करने की मांग की थी।

रणधीर जायसवाल ने कहा, ब्रिक्स में साझा बयान पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। भारत इस प्रयास में सभी देशों के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान की आलोचना और अफगानिस्तान पर हमले

जायसवाल ने पाकिस्तान की ओर से जारी अवैध परमाणु कार्यक्रम और अफगानिस्तान में नागरिक ढांचे पर हमलों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान का परमाणु इतिहास दुनिया के लिए खतरा है और अफगानिस्तान में नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। इस बयान से भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने वाली गतिविधियों की कड़ी निंदा की जा रही है।

विदेश मंत्रालय ने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति के बारे में जानकारी दी। ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक थे, जिनमें से अधिकांश ने लड़ाई शुरू होने से पहले ही देश छोड़ दिया था। जायसवाल ने बताया कि इस समय करीब 882 भारतीय नागरिक, जिनमें छात्र, व्यवसायी और तीर्थयात्री शामिल हैं, अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते भारत लौट रहे हैं। इनमें से कुछ पहले ही देश पहुंच चुके हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि 284 तीर्थयात्रियों में से 280 पहले ही आ चुके हैं और शेष तीन-चार लोगों के जल्द लौटने की उम्मीद है। ईरानी जमीनी बॉर्डर के माध्यम से 772 लोग आर्मेनिया पहुंचे, जबकि अजरबैजान के रास्ते से वापसी धीमी है। विदेश मंत्रालय ने भारत में लौटने वाले सभी नागरिकों को सुरक्षा सलाह का पालन करने की चेतावनी दी।

कॉन्सुलर एक्सेस और कानूनी प्रक्रियाएं

जायसवाल ने यूक्रेनी और अमेरिकी नागरिकों से जुड़े मामले की भी जानकारी दी। हाल ही में NIA ने छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को हिरासत में लिया है। इन नागरिकों को कॉन्सुलर एक्सेस प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि, यह मामला कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है। संबंधित एजेंसियां जांच कर रही हैं। कुछ इलाके प्रतिबंधित या संवेदनशील हैं, जिनमें जाने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है।

भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता संभाल रहा है और साझा बयान तैयार करना उसकी जिम्मेदारी है। लेकिन पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम और ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण सदस्य देशों के दृष्टिकोण अलग हैं।

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