पुलिस हिरासत में घायल छात्र की हैंडकफिंग पर विवाद, पुलिस प्रमुख ने परिवार से मांगी माफी

ब्रिटेन में छात्र Henry Nowak की चाकू हमले के बाद पुलिस द्वारा हथकड़ी लगाने और हिरासत में लेने के दौरान मौत हो गई। पुलिस प्रमुख Alexis Boon ने माफी मांगी

ब्रिटेन में छात्र Henry Nowak की चाकू हमले के बाद पुलिस द्वारा हथकड़ी लगाने और हिरासत में लेने के दौरान मौत हो गई। पुलिस प्रमुख Alexis Boon ने माफी मांगी और मामले की जांच जारी है।

साउथेम्प्टन: ब्रिटेन के हैम्पशायर और आइल ऑफ वाइट क्षेत्र में एक गंभीर पुलिस कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 18 वर्षीय छात्र हेनरी नोवाक की हत्या के मामले में घायल अवस्था में होने के बावजूद उन्हें हथकड़ी लगाने और गिरफ्तार करने की घटना सामने आने के बाद पुलिस प्रमुख ने सार्वजनिक रूप से पीड़ित परिवार से माफी मांगी है।

यह मामला तब सामने आया जब घटना से जुड़ा बॉडीकैम फुटेज मीडिया में जारी हुआ, जिसमें छात्र को बार-बार यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उन्हें चाकू मारा गया है और वे सांस नहीं ले पा रहे हैं।

बॉडीकैम फुटेज से खुला गंभीर मामला

जारी किए गए फुटेज में देखा गया कि हेनरी नोवाक, जो उस समय गंभीर रूप से घायल थे, पुलिस अधिकारियों को लगातार बताते हैं कि उन्हें चाकू मारा गया है और वे सांस लेने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें हथकड़ी पहनाई और हिरासत में ले लिया।

फुटेज सामने आने के बाद पूरे देश में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे गंभीर लापरवाही करार दिया है।

पुलिस प्रमुख का बयान और माफी

हैम्पशायर और आइल ऑफ वाइट कॉन्स्टेबुलरी के चीफ कॉन्स्टेबल एलेक्सिस बून ने बीबीसी को दिए बयान में कहा कि वह इस पूरे मामले से बेहद व्यथित हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि फुटेज देखना अत्यंत दुखद और परेशान करने वाला है।

उन्होंने पीड़ित परिवार से कहा:

“मुझे बहुत खेद है कि आपको इस दर्द से गुजरना पड़ा।”

उन्होंने यह भी दोहराया कि बल की ओर से परिवार से ईमानदारी से माफी मांगी जाती है कि जिस तरह से हेनरी को हथकड़ी लगाई गई और गिरफ्तार किया गया, वह स्थिति अत्यंत दुखद है।

हत्या और आरोपी को सजा

यह घटना दिसंबर में हुई थी, जब 23 वर्षीय विक्रम दिग्वा ने हेनरी नोवाक पर हमला किया था। अदालत में यह साबित हुआ कि यह एक जानलेवा हमला था, जिसमें छात्र की हत्या कर दी गई।

आरोपी विक्रम दिग्वा को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जिसमें कम से कम 21 साल की सजा अनिवार्य रखी गई है।

सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि आरोपी ने अपने परिवार और समुदाय दोनों के लिए शर्मनाक कार्य किया है।

साथ ही, आरोपी की मां किरण कौर को भी सबूत छुपाने और अपराध में सहायता करने का दोषी पाया गया।

परिवार का दर्द और बयान

हेनरी नोवाक के पिता ने अदालत के फैसले के बाद कहा कि उनके बेटे के साथ जो हुआ वह अत्यंत दर्दनाक है। उन्होंने कहा कि परिवार इस दुख को जीवन भर नहीं भूल पाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह देखकर और अधिक पीड़ा हुई कि उनके बेटे के साथ पुलिस का व्यवहार उस समय ठीक नहीं था, जब वह पहले से ही गंभीर रूप से घायल था।

हालांकि, उन्होंने यह भी अपील की कि इस घटना का उपयोग समाज में विभाजन या नफरत फैलाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद

इस मामले ने ब्रिटेन की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा इस मामले को “विभाजन और आक्रोश” फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

वहीं विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बैडेनोच ने कहा कि इस मामले में “कई स्तरों पर गंभीर विफलताएं” सामने आई हैं।

शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिलिप ने भी आरोप लगाया कि पुलिस शुरुआती प्रतिक्रिया में “रोगी की मदद करने के बजाय गलत प्राथमिकताओं” पर केंद्रित दिखी।

पुलिस प्रमुख ने इस्तीफे से किया इनकार

विवाद बढ़ने के बावजूद चीफ कॉन्स्टेबल एलेक्सिस बून ने स्पष्ट किया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वे स्वतंत्र पुलिस शिकायत आयोग (IOPC) की जांच का सम्मान करते हैं और उसके निष्कर्ष आने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके कुछ अधिकारी अब फ्रंटलाइन ड्यूटी पर नहीं हैं और एक अधिकारी पहले ही विभाग छोड़ चुका है, हालांकि यह घटना से संबंधित नहीं था।

जांच और निगरानी एजेंसियों की भूमिका

इस पूरे मामले की जांच अब इंडिपेंडेंट ऑफिस ऑफ पुलिस कंडक्ट (IOPC) कर रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि पुलिस की प्रतिक्रिया उचित थी या नहीं और क्या घायल व्यक्ति को समय पर मेडिकल सहायता मिलनी चाहिए थी।

इसके अलावा, नेशनल पुलिस चीफ्स काउंसिल (NPCC) भी इस बात की समीक्षा कर रहा है कि क्या पुलिस की नीतियों और एंटी-रेसिज्म दिशानिर्देशों में बदलाव की आवश्यकता है।

“मैं सांस नहीं ले पा रहा था” – आखिरी क्षण

फुटेज में यह भी देखा गया कि हेनरी नोवाक पुलिस को बार-बार बताते हैं कि उन्हें चाकू मारा गया है और वे सांस नहीं ले पा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें हथकड़ी लगाई गई और जमीन पर बैठाया गया।

कुछ समय बाद उनकी वहीं मौके पर ही मौत हो गई।

यह दृश्य सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश फैल गया है और लोग पुलिस प्रशिक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

मानवाधिकार और पुलिसिंग पर बहस

इस घटना ने एक बार फिर पुलिसिंग सिस्टम, आपातकालीन प्रतिक्रिया और मानवाधिकारों पर गंभीर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को मेडिकल इमरजेंसी और अपराध जांच के बीच सही संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।

कई मानवाधिकार संगठनों ने मांग की है कि इस घटना की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

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