Punjab Government Action: आंगनवाड़ी घोटाले में 2 सीनियर IAS अधिकारी सस्पेंड, जानिए पूरा मामला

पंजाब सरकार ने आंगनवाड़ी स्मार्टफोन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो सीनियर IAS अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आदेश जारी।

पंजाब सरकार ने आंगनवाड़ी स्मार्टफोन वितरण से जुड़े मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। सरकार ने दो सीनियर IAS अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने शनिवार को एक अहम प्रशासनिक फैसला लेते हुए राज्य के दो सीनियर IAS अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। इस कार्रवाई ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। हालांकि सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आदेशों में निलंबन की वजह साफ तौर पर नहीं बताई गई, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह मामला आंगनवाड़ी से जुड़े एक बड़े घोटाले से जुड़ा हुआ है। इस फैसले को मौजूदा सरकार की सख्त प्रशासनिक नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

किन अधिकारियों पर गिरी गाज

जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें IAS जसप्रीत सिंह और IAS कमल किशोर यादव शामिल हैं। जसप्रीत सिंह पंजाब सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी निगम लिमिटेड यानी Punjab Infotech के प्रबंध निदेशक के पद पर तैनात थे। वहीं कमल किशोर यादव उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव थे और निवेश प्रोत्साहन तथा सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग प्रोत्साहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। दोनों अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा अनुशासन एवं अपील नियम 1969 के तहत निलंबित किया गया है।

आदेश किस नियम के तहत जारी हुआ

सरकार द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई All India Services Discipline and Appeal Rules 1969 के नियम 3(1) के तहत की गई है। इस नियम के अंतर्गत सरकार को यह अधिकार होता है कि वह किसी अधिकारी को जांच या अनुशासनात्मक प्रक्रिया के दौरान निलंबित कर सके। आदेश पंजाब के राज्यपाल के नाम से जारी किए गए हैं और इन पर पंजाब सरकार के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के हस्ताक्षर हैं। आदेश की प्रतियां भारत सरकार समेत सभी संबंधित विभागों को भेज दी गई हैं।

निलंबन अवधि में क्या रहेगा दर्जा

सरकारी आदेश के मुताबिक निलंबन अवधि के दौरान दोनों IAS अधिकारियों का मुख्यालय चंडीगढ़ में ही रहेगा। उन्हें बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की इजाजत नहीं होगी। साथ ही नियमों के अनुसार उन्हें निर्वाह भत्ता यानी subsistence allowance मिलता रहेगा। सरकार का कहना है कि निलंबन का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं है, बल्कि यह जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से पूरा करने के लिए उठाया गया कदम है।

आंगनवाड़ी स्मार्टफोन घोटाले से जुड़ता मामला

हालांकि आदेशों में वजह का जिक्र नहीं है, लेकिन सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई मिशन सक्षम आंगनवाड़ी योजना से जुड़े स्मार्टफोन वितरण मामले से संबंधित है। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन दिए जाने थे ताकि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पोषण, स्वास्थ्य और बच्चों से जुड़ा डेटा अपडेट कर सकें। आरोप है कि इन मोबाइल फोन की खरीद प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुईं।

छह साल की देरी ने बढ़ाया विवाद

सूत्रों के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए स्मार्टफोन खरीदने की प्रक्रिया में करीब छह साल की देरी हुई। इस देरी को लेकर चयनित vendor यानी सप्लायर ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था। आरोप है कि समय पर निर्णय न होने और प्रक्रियात्मक खामियों की वजह से सरकारी योजना प्रभावित हुई और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को समय पर डिजिटल सुविधाएं नहीं मिल सकीं। इसी पूरे मामले की जांच के दौरान यह सख्त कार्रवाई की गई है।

अन्य अधिकारियों पर भी असर

इस मामले में सिर्फ दो अधिकारियों का निलंबन ही नहीं हुआ, बल्कि दो अन्य IAS अधिकारियों का तबादला भी किया गया है। इनमें विकास प्रताप का नाम शामिल है, जो सामाजिक सुरक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के तौर पर कार्यरत थे। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

सरकार का सख्त संदेश

इस फैसले को पंजाब सरकार का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि सरकारी योजनाओं में देरी, लापरवाही या अनियमितता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आंगनवाड़ी जैसी योजनाएं सीधे महिलाओं और बच्चों से जुड़ी होती हैं, इसलिए इनमें किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाता है। सरकार चाहती है कि योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से ज़मीनी स्तर तक पहुंचे।

विपक्ष के सवाल

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद विपक्ष ने भी सरकार से जवाब मांगा है। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर इतना बड़ा घोटाला हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी सिर्फ अधिकारियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं सरकार का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

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