पुतिन बोले- मोदी मेरे अच्छे दोस्त, फिर भी हर मुलाकात में उठाते हैं यूक्रेन युद्ध का मुद्दा

पुतिन ने कहा कि PM मोदी हर मुलाकात में यूक्रेन युद्ध खत्म करने की बात करते हैं और उनके पास समाधान के अच्छे सुझाव हैं। रूस-नाटो तनाव पर भी चेतावनी दी।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर मुलाकात में यूक्रेन युद्ध समाप्त करने का मुद्दा उठाते हैं। पुतिन ने मोदी के सुझावों को अच्छा बताया। उन्होंने भारत की विविधता की तारीफ की और रूस के क्षेत्र पर हमले को लेकर चेतावनी भी दी।

मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने संबंधों और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की उनकी लगातार अपील का उल्लेख करते हुए कहा है कि मोदी हर मुलाकात में संघर्ष खत्म करने का मुद्दा उठाते हैं। पुतिन ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री के पास यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए ऐसे विचार हैं, जो दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान तलाशने में मदद कर सकते हैं। पुतिन ने यह टिप्पणी 1 अक्टूबर 2026 को मॉस्को में आयोजित वाल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब के वार्षिक कार्यक्रम में की। रूसी राष्ट्रपति के अनुसार, मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय प्रधानमंत्री यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने और शांति का रास्ता तलाशने की जरूरत पर लगातार चर्चा करते हैं।

पुतिन ने कहा- मोदी के पास 'बहुत अच्छे विचार'

वाल्दाई फोरम में पुतिन से प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन संघर्ष को लेकर भूमिका के बारे में पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि मोदी उन नेताओं में शामिल हैं जो रूस के साथ अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध होने के बावजूद हर मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का मुद्दा उठाते हैं।

पुतिन ने कहा कि मोदी इस विषय में लगातार रुचि लेते हैं और दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान खोजने के उद्देश्य से उनके पास "बहुत अच्छे विचार" हैं। रूसी राष्ट्रपति ने मोदी के इस रुख के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के समाधान के लिए लगातार संवाद और कूटनीति को महत्व देने की बात कहता रहा है। भारत ने सार्वजनिक रूप से संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया है।

BRICS बैठक से पहले भी हुई थी मोदी-पुतिन की बातचीत

पुतिन और मोदी की हालिया मुलाकात सितंबर 2026 में नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने 2026 में इससे पहले 31 अगस्त को बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान भी मुलाकात की थी।

BRICS बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने की भारत की स्थिति दोहराई।

पुतिन ने हालिया वाल्दाई संबोधन में भी बताया कि BRICS शिखर सम्मेलन से पहले हुई बातचीत के दौरान उन्होंने मोदी को यूक्रेन की स्थिति और शांति प्रयासों के बारे में जानकारी दी थी।

रूस पहले ही भारत की शांति पहल का कर चुका है समर्थन

पुतिन की टिप्पणी से कुछ सप्ताह पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी भारत की ओर से यूक्रेन संघर्ष के समाधान के किसी भी प्रयास का स्वागत करने की बात कही थी।

सितंबर 2026 में पेस्कोव ने कहा था कि रूस यूक्रेन संघर्ष का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से चाहता है और इस मुद्दे पर भारत की स्थिति संवाद एवं कूटनीति के जरिए समाधान की दिशा में है। उन्होंने यह भी कहा था कि मॉस्को भारत की शांति संबंधी कोशिशों के लिए खुला है।

रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अलग-अलग स्तरों पर कूटनीतिक प्रयास होते रहे हैं। सितंबर में भी रूस ने अमेरिका और यूक्रेन के साथ त्रिपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीद जताई थी।

मोदी ने कई मौकों पर बातचीत और कूटनीति पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में भारत की स्थिति को कई बार स्पष्ट किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, मोदी ने रूस के साथ अपनी बातचीत में संघर्ष समाप्त करने, संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने तथा स्थायी शांति की जरूरत पर जोर दिया है।

31 अगस्त 2026 को बिश्केक में पुतिन से मुलाकात के दौरान भी मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने की बात कही थी। सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई बातचीत में भी उन्होंने भारत की शांति प्रयासों में मदद करने की तत्परता दोहराई।

भारत की यह नीति केवल रूस के साथ बातचीत तक सीमित नहीं रही है। नई दिल्ली ने यूक्रेन संघर्ष को लेकर लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की आवश्यकता बताई है।

पुतिन ने भारत की विविधता और एकता की भी तारीफ की

वाल्दाई फोरम में पुतिन ने भारत की विशाल आबादी, सांस्कृतिक विविधता और भाषाई विविधता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत का आकार और विविधता उन्हें प्रभावित करती है।

पुतिन ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बताया था कि भारत की लगभग 1.5 अरब आबादी में करीब 60 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं, जबकि अन्य लोग अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं और इसके बावजूद देश में लोग साथ रहते हैं।

यह आंकड़ा पुतिन द्वारा कार्यक्रम में कही गई बात का हिस्सा है। इसे भारत की आधिकारिक भाषाई जनगणना के आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पुतिन ने इसी संदर्भ में भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता को एक ऐसा उदाहरण बताया, जिससे दूसरे देश सीख सकते हैं।

रूस-नाटो तनाव के बीच पुतिन की 'सभी हथियारों' वाली चेतावनी

वाल्दाई फोरम में पुतिन ने रूस और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ते तनाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि रूस यूरोप के किसी देश पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रूसी क्षेत्र पर हमला किया जाता है तो रूस अपनी रक्षा के लिए अपने पास उपलब्ध सभी हथियारों का इस्तेमाल करेगा।

पुतिन ने पश्चिमी देशों और यूरोप पर रूस के खिलाफ संभावित सैन्य टकराव की तैयारी करने का आरोप लगाया। उन्होंने बाल्टिक सागर में सैन्य अभ्यास और रूसी जहाजों को जब्त किए जाने का भी उल्लेख किया।

यह बयान रूस की ओर से कलिनिनग्राद को लेकर NATO को दी गई हालिया चेतावनी के बाद आया। कलिनिनग्राद रूस का बाल्टिक सागर स्थित अलग भू-भाग है, जो पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है।

कलिनिनग्राद को लेकर परमाणु हथियारों की चेतावनी

सितंबर के अंत में रूस ने NATO को चेतावनी दी थी कि यदि किसी NATO देश ने कलिनिनग्राद को रूस के बाकी हिस्से से अलग करने की कोशिश की, तो मॉस्को अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियारों समेत उपलब्ध सैन्य क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है।

रॉयटर्स के अनुसार, रूस की ओर से NATO को भेजे गए राजनयिक संदेश में कलिनिनग्राद को लेकर सैन्य गठबंधन की गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई गई थी। NATO ने रूस की परमाणु बयानबाजी को गैर-जिम्मेदाराना बताया और खुद को रक्षात्मक गठबंधन बताया है।

पुतिन ने वाल्दाई फोरम में कहा कि रूस की ओर से दी जा रही चेतावनियां डराने की कोशिश नहीं बल्कि कथित दबाव और धमकियों का जवाब हैं। उन्होंने रूस और पश्चिम के बीच मौजूदा तनाव को व्यापक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति के संदर्भ में रखा।

यूक्रेन युद्ध और भारत की कूटनीतिक भूमिका

पुतिन की ताजा टिप्पणी भारत-रूस संबंधों और यूक्रेन संघर्ष को लेकर नई दिल्ली की कूटनीतिक स्थिति के बीच आई है। भारत रूस के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए रखते हुए यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति की वकालत करता रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की 2026 में कई स्तरों पर बातचीत हुई है और दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया है। आधिकारिक भारतीय रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों नेता आगे भी संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं।

पुतिन की ओर से मोदी के सुझावों की सार्वजनिक प्रशंसा ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत फिर शुरू करने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, पुतिन के बयान से किसी शांति समझौते या युद्ध समाप्ति की तारीख की पुष्टि नहीं होती। रूस और यूक्रेन के बीच किसी अंतिम समझौते के लिए दोनों पक्षों की सहमति और आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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