Rahul Gandhi का PM मोदी पर हमला, एंटी पेपर लीक कानून को लेकर छात्र मुद्दों पर घेरा

एंटी पेपर लीक कानून को लेकर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने छात्रों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था के मुद्दे उठाते हुए केंद्र

पेपर लीक कानून में संशोधन और छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर देश की सियासत तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि वे देश के अतीत का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्हें भारत के भविष्य यानी Gen Z के साथ संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए।

नई दिल्ली: भारत में सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारित किए गए संशोधित एंटी-पेपर लीक कानून को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर केंद्र सरकार का कहना है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में निष्पक्षता बनाए रखने और पेपर लीक माफिया पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है, वहीं विपक्ष इसे छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश के रूप में पेश कर रहा है।

इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई कर रही है और असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

राहुल गांधी का सरकार पर सीधा हमला

सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी, विशेषकर जेनरेशन-ज़ी (Gen Z), को डराकर चुप नहीं कराया जा सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को संबोधित करते हुए कहा कि वे “भारत का अतीत” हैं और उन्हें देश के भविष्य के साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलनों से जुड़े युवाओं पर एफआईआर दर्ज की जा रही हैं, सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कार्रवाई की जा रही है और उन्हें दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों और युवाओं को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार होना चाहिए।

एंटी-पेपर लीक कानून को लेकर विवाद क्यों?

हाल ही में संसद ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी है। यह कानून 2024 में लागू किए गए एंटी-पेपर लीक कानून को और अधिक सख्त बनाता है। सरकार का दावा है कि नए प्रावधानों के जरिए संगठित परीक्षा धोखाधड़ी, पेपर लीक नेटवर्क और तकनीकी माध्यमों से होने वाली अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया था। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने कानून को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया। हालांकि विपक्षी दलों का तर्क है कि कानून के कुछ प्रावधानों का उपयोग प्रदर्शनकारी छात्रों और असहमति जताने वाले समूहों के खिलाफ किया जा सकता है। यही कारण है कि संसद और संसद के बाहर इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दिया सख्त कार्रवाई का संदेश

नए कानून के पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पेपर लीक और परीक्षा घोटालों से लाखों युवाओं के सपनों को नुकसान पहुंचता है, इसलिए ऐसे अपराधों के प्रति सरकार ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति अपनाएगी।सरकार का मानना है कि कठोर दंडात्मक प्रावधान संभावित अपराधियों के लिए निवारक साबित होंगे और भर्ती तथा प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।

विधेयक को लेकर संसद के दोनों सदनों में व्यापक चर्चा हुई। राज्यसभा में विपक्षी दलों ने कानून के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई और विरोध दर्ज कराया। बहस के दौरान राजनीतिक मतभेद इतने बढ़ गए कि विपक्षी गठबंधन के कुछ सदस्यों ने सदन से वॉकआउट भी किया। इसके बावजूद विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। सरकार ने इसे युवाओं के हित में उठाया गया आवश्यक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की।

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