पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का करीब साढ़े चार साल का कार्यकाल अब खत्म हो गया है। वड़िंग ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।
चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सितंबर 2026 के आखिर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उनका करीब साढ़े चार साल का कार्यकाल अब समाप्त हो गया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब कांग्रेस पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेद और संगठन को लेकर मिले फीडबैक के बीच यह फैसला लिया गया।
वड़िंग का इस्तीफा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका राजनीतिक सफर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ लंबे संगठनात्मक जुड़ाव से जुड़ा रहा है। हालांकि, इस रिश्ते को समझने के लिए यूथ कांग्रेस से लेकर 2022 में पंजाब कांग्रेस की कमान और 2024 के लोकसभा चुनाव तक की पूरी राजनीतिक यात्रा को देखना जरूरी है।
यूथ कांग्रेस से शुरू हुआ राजनीतिक जुड़ाव
राजा वड़िंग ने कांग्रेस की राजनीति में अपनी पहचान यूथ कांग्रेस के जरिए बनाई। वह दिसंबर 2014 से 2018 तक इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। इससे पहले वह संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके थे। यूथ कांग्रेस में काम करने के दौरान उनका कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ संपर्क मजबूत हुआ। 2022 में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के समय भी उनके संगठनात्मक अनुभव और केंद्रीय नेतृत्व के साथ काम करने के अनुभव को महत्वपूर्ण माना गया था।
2022 में पंजाब कांग्रेस की कमान
2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। 117 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस को सिर्फ 18 सीटें मिलीं, जबकि आम आदमी पार्टी ने 92 सीटों के साथ सरकार बनाई। इसी चुनाव के बाद अप्रैल 2022 में कांग्रेस ने नवजोत सिंह सिद्धू की जगह राजा वड़िंग को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया।
उस समय पार्टी को संगठन को दोबारा मजबूत करने और अलग-अलग गुटों के बीच समन्वय बनाने की चुनौती थी। वड़िंग के सामने केवल चुनावी हार से उबरने की चुनौती नहीं थी, बल्कि पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों को संभालना भी एक अहम जिम्मेदारी थी।
2024 लोकसभा चुनाव से मजबूत हुआ राजनीतिक आधार

राजा वड़िंग के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए 2024 का लोकसभा चुनाव पंजाब कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण रहा। पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में कांग्रेस ने सात सीटों पर जीत दर्ज की। वड़िंग खुद लुधियाना से चुनाव मैदान में उतरे और उन्होंने भाजपा के रवनीत सिंह बिट्टू को हराया। निर्वाचन परिणामों के अनुसार वड़िंग को 3,22,224 वोट मिले, जबकि बिट्टू को 3,01,282 वोट मिले। जीत का अंतर 20,942 वोट रहा।
यह परिणाम उनके राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बना। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पार्टी के सात लोकसभा सीटें जीतने और खुद सांसद बनने से पंजाब कांग्रेस में उनकी स्थिति को मजबूती मिली।
लेकिन अंदरूनी मतभेद खत्म नहीं हुए
2024 के चुनाव के बाद भी पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक और नेतृत्व से जुड़े मतभेद बने रहे। पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं और समूहों की राजनीतिक प्राथमिकताएं सामने आती रहीं। 2026 में ये मतभेद ज्यादा स्पष्ट हुए। पार्टी नेतृत्व ने स्थिति का आकलन करने के लिए पंजाब में संगठनात्मक फीडबैक लिया। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, पंजाब के नए प्रभारी बनाए गए सचिन पायलट ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद संगठन की स्थिति पर रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को दी।
इससे पहले भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था। पायलट ने प्रदेश के नेताओं के साथ बैठकों के जरिए संगठन की स्थिति को समझने की कोशिश की।
2026 में बदला राजनीतिक समीकरण
राजा वड़िंग का इस्तीफा पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम है। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी अब नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश कर रही है और कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इस बदलाव को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, नए अध्यक्ष के चयन और पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व को करना है।











