राजस्थान में 16 दवाइयां गुणवत्ता मानक पर खरी नहीं उतरीं। इनमें खांसी, जुकाम, बुखार और विटामिन की दवाइयां शामिल हैं। राज्य आयुक्तालय ने मेडिकल स्टोर्स को इनकी बिक्री रोकने के आदेश दिए और दवा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।
Rajasthan: खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने जनवरी 2026 के पहले पखवाड़े में राज्य के अलग-अलग जिलों से 16 दवाइयों के नमूने लिए। लैब रिपोर्ट में कई दवाइयों में गंभीर खामियां पाई गईं। कुछ दवाओं में सक्रिय तत्व निर्धारित मात्रा से कम पाए गए, जबकि कुछ भारतीय औषधि संहिता (IP) के मानक भी पूरा नहीं कर सकीं। इसलिए इन दवाइयों को NSQ यानी ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ घोषित किया गया। NSQ दवाइयां न सुरक्षित होती हैं और न ही इलाज में प्रभावी।
कौन-कौन सी दवाइयां शामिल हैं
बाजार में रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां भी इस सूची में शामिल हैं। इनमें कैल्शियम और विटामिन D3 की गोलियां, बुखार और दर्द की दवा पैरासिटामोल, खांसी और जुकाम की दवाइयां जैसे एम्ब्रोक्सोल, टर्ब्यूटालिन और गुइफेनेसिन शामिल हैं। इसके अलावा कुछ एंटीबायोटिक दवाइयां और ब्लड प्रेशर की दवाइयां भी फेल पाई गईं।

आयुक्तालय ने सभी मेडिकल स्टोर्स और दवा विक्रेताओं को इन दवाइयों की बिक्री तुरंत रोकने के आदेश दिए हैं। साथ ही संबंधित दवा कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और नियम 1945 के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
मरीजों के लिए खतरा
अधिकारियों का कहना है कि घटिया गुणवत्ता की दवाइयां मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। निर्धारित मात्रा में दवा न मिलने पर इलाज असरदार नहीं होता और बीमारी और बढ़ सकती है। यही वजह है कि दवाइयों की नियमित जांच और सख्त निगरानी जरूरी मानी जा रही है।
राजस्थान में दवाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आयुक्तालय लगातार बाजार पर नजर रख रहा है। NSQ घोषित दवाइयों को तुरंत हटाना मरीजों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
NSQ क्या है
NSQ का मतलब है “Not of Standard Quality”, यानी वह दवा जो तय मानकों और गुणवत्ता पर खरी नहीं उतरे। जब किसी दवा में सक्रिय तत्व निर्धारित मात्रा से कम हो, भारतीय औषधि संहिता (IP) के नियमों का पालन न हो, या उसमें अशुद्धियां हों, तो उसे NSQ माना जाता है। ऐसी दवाइयां सुरक्षित नहीं होतीं और इलाज में असरदार भी नहीं होतीं।
मरीज को सही मात्रा में दवा न मिलने पर बीमारी ठीक नहीं होती और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए NSQ दवाइयों को तुरंत बाजार से हटाना जरूरी है। राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियां नियमित जांच करके घटिया दवाइयों पर सख्त कार्रवाई करती हैं।








