राम मंदिर ट्रस्ट में सीमित सदस्यों की सक्रिय भूमिका, चढ़ावा विवाद के बाद बढ़े सवाल

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच ट्रस्ट के कुछ सदस्यों की सक्रिय भूमिका पर सवाल उठे। अधिकांश सदस्य केवल बैठकों और आयोजनों तक सीमित बताए जा रहे हैं।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच सामने आया है कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य केवल बैठकों तक सीमित हैं। ट्रस्ट के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी मुख्य रूप से कुछ सक्रिय सदस्यों के पास है, जिससे उन पर सवाल उठ रहे हैं।

अयोध्या: श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सदस्यों की संख्या सीमित होने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद ट्रस्ट के दैनिक संचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने वाले कुछ प्रमुख सदस्यों पर ही सवाल केंद्रित हो गए हैं। ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य बैठकों और विशेष आयोजनों में ही भाग लेते हैं।

मंदिर निर्माण के लिए गठित किया गया था 15 सदस्यीय ट्रस्ट

सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में ट्रस्ट गठन की घोषणा की थी। मंदिर निर्माण, वित्तीय प्रबंधन और समग्र प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी इसी ट्रस्ट को सौंपी गई थी।

राम मंदिर ट्रस्ट में सीमित सदस्यों की सक्रिय भूमिका, चढ़ावा विवाद के बाद बढ़े सवाल

ट्रस्ट में प्रारंभिक रूप से 15 सदस्यों को शामिल किया गया था, जिनमें संत, धर्माचार्य, विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधि, मंदिर आंदोलन से जुड़े पक्षकार और प्रशासनिक प्रतिनिधि शामिल थे। वर्तमान में ट्रस्ट में 14 सदस्य हैं। अयोध्या राजपरिवार के मुखिया रहे बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक पद रिक्त चल रहा है।

कुछ सदस्यों पर ही है प्रमुख जिम्मेदारियों का भार

सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य बैठकों और विशेष आयोजनों में भाग लेते हैं, जबकि दैनिक प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी जिम्मेदारियां सीमित सदस्यों द्वारा संभाली जाती हैं। अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास और वरिष्ठ सदस्य के. परासरण लंबे समय से स्वास्थ्य कारणों से बैठकों में अक्सर ऑनलाइन शामिल होते हैं।

महासचिव चंपत राय ट्रस्ट की बैठकों, कार्यक्रमों और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी संभालते हैं। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि वित्तीय मामलों और दान प्रबंधन की निगरानी करते हैं। वहीं डॉ. अनिल कुमार मिश्र प्रशासनिक कार्यों का संचालन देखते हैं। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र निर्माण कार्यों की समीक्षा और प्रगति पर नजर रखते हैं।

राम मंदिर के व्यवस्थापक के रूप में विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव भी दर्शन व्यवस्था, आरती पास और मंदिर संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों का दायित्व निभाते हैं।

कार्य विभाजन के लिए बनाई गईं पांच समितियां

ट्रस्ट ने कार्यों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए नवंबर 2020 में पांच अलग-अलग समितियों का गठन किया था। इनमें निर्माण समिति, ऑडिट समिति, वित्त समिति, धार्मिक समिति और प्रबंध समिति शामिल हैं। इन समितियों को अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल करने का अधिकार भी दिया गया है।

हाल के दिनों में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हुई है। चूंकि अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय और प्रबंधन संबंधी जिम्मेदारियां कुछ सक्रिय सदस्यों के पास हैं, इसलिए आरोपों और सवालों का केंद्र भी वही सदस्य बने हुए हैं।

हालांकि ट्रस्ट की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि सभी कार्य निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संचालित किए जाते हैं। वहीं जांच एजेंसियां और संबंधित अधिकारी मामले से जुड़े तथ्यों की समीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और आधिकारिक निष्कर्षों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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