रांची की वाइन शॉप में घुसी गर्भवती बंदरिया, शराब पीकर कर्मचारी को काटा ढाई घंटे तक मचाया उत्पात,

रांची के ओरमांझी में गर्भवती बंदरिया वाइन शॉप में घुसी और मैजिक मोमेंट्स की बोतल पीकर कर्मचारी को काट लिया। ढाई घंटे बाद बिरसा जू टीम ने रेस्क्यू किया।
रांची की वाइन शॉप में घुसी गर्भवती बंदरिया, शराब पीकर कर्मचारी को काटा ढाई घंटे तक मचाया उत्पात,
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रांची के ओरमांझी प्रखंड चौक स्थित बांके बिहारी मार्केट, चकला की एक वाइन शॉप में शुक्रवार शाम अचानक ऐसी घटना हुई, जिसने दुकान के कर्मचारियों और आसपास मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। एक बंदरिया अचानक शराब की दुकान के अंदर घुस गई। बताया जा रहा है कि बंदरिया गर्भवती थी। दुकान में घुसने के बाद उसने वहां रखी मैजिक मोमेंट्स की एक क्वार्टर बोतल खोल ली और शराब पी गई। इसके बाद उसका व्यवहार आक्रामक हो गया और उसने दुकान में मौजूद कर्मचारी रामाशंकर तिवारी पर हमला कर दिया। बंदरिया के हमले में कर्मचारी को पीठ और पैर में चोट लगी।

घटना शुक्रवार शाम करीब सात बजे की बताई जा रही है। अचानक बंदरिया के दुकान के अंदर पहुंचने से वहां मौजूद कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआत में लोगों को समझ नहीं आया कि बंदरिया को बाहर कैसे निकाला जाए। शराब की बोतल खोलकर पीने के बाद जब उसने कर्मचारी पर हमला किया तो स्थिति और गंभीर हो गई। रामाशंकर तिवारी को बंदरिया ने काट लिया, जिसके बाद दुकान के दूसरे कर्मचारी डरकर बाहर निकल गए। घायल कर्मचारी को इलाज के लिए सिटी अस्पताल, हरचंडा ले जाया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बंदरिया शराब पीने के बाद काफी देर तक दुकान के अंदर ही घूमती रही। उसके व्यवहार में आक्रामकता दिखाई दे रही थी। कर्मचारी पहले ही बाहर निकल चुके थे, इसलिए किसी ने उसके पास जाकर उसे भगाने या पकड़ने की कोशिश नहीं की। दुकान के अंदर शराब की पेटियों और सामान के बीच बंदरिया काफी देर तक इधर-उधर घूमती रही। आसपास के लोगों की भीड़ भी जमा होने लगी, लेकिन आक्रामक बंदरिया के कारण लोग दूरी बनाए रहे।

बताया गया कि करीब ढाई घंटे तक वाइन शॉप में बंदरिया का उत्पात जारी रहा। इस दौरान दुकान के कर्मचारियों के साथ-साथ आसपास के लोग भी उसके पास जाने से बचते रहे। घटना की सूचना वन विभाग और भगवान बिरसा जैविक उद्यान की रेस्क्यू टीम को दी गई। सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची और बंदरिया को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की तैयारी शुरू की।

रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बंदरिया डर और आक्रामक व्यवहार के कारण आसानी से काबू में नहीं आ रही थी। ऐसे में टीम ने सावधानी के साथ उसे पकड़ने की कार्रवाई की। रेस्क्यू अभियान का नेतृत्व भगवान बिरसा जैविक उद्यान की वन क्षेत्र पदाधिकारी गायत्री देवी ने किया। टीम में उद्यान के जीव वैज्ञानिक विवेक कुमार, वनरक्षी राकेश अवस्थी और अन्य रेस्क्यू कर्मी शामिल रहे। काफी मशक्कत के बाद बंदरिया को सुरक्षित पकड़ लिया गया।

बंदरिया को पकड़ने के बाद उसे भगवान बिरसा जैविक उद्यान ले जाया गया। वहां उसकी स्वास्थ्य जांच और निगरानी की व्यवस्था की गई। स्थानीय स्तर पर उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आने के बाद रेस्क्यू टीम ने उसे पकड़ते समय अतिरिक्त सावधानी बरती। वन्यजीवों को रेस्क्यू करते समय उन्हें चोट न पहुंचे और आसपास मौजूद लोगों को भी नुकसान न हो, इस बात का ध्यान रखा गया।

घटना में घायल रामाशंकर तिवारी को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। बंदरिया के काटने के बाद उन्हें चिकित्सकीय उपचार दिया गया। वन्यजीव के काटने की घटना होने के कारण आगे स्वास्थ्य विभाग की सलाह के अनुसार आवश्यक उपचार और निगरानी की जरूरत हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों में कर्मचारी की हालत को लेकर किसी गंभीर खतरे की जानकारी सामने नहीं आई है।

इस घटना ने ओरमांझी क्षेत्र में वन्यजीवों के आबादी वाले इलाकों में पहुंचने और इंसानों के साथ उनके टकराव का मुद्दा भी सामने ला दिया है। रांची और उसके आसपास के इलाकों में जंगल तथा आबादी के बीच कई जगह सीधा संपर्क है। ऐसे क्षेत्रों में बंदर और दूसरे जंगली जानवर अक्सर भोजन की तलाश में मानव बस्तियों तक पहुंच जाते हैं। हालांकि इस मामले में बंदरिया शराब की दुकान के अंदर कैसे पहुंची, यह स्पष्ट नहीं है।

शराब की बोतल खोलकर बंदरिया के शराब पीने की घटना ने लोगों को हैरान कर दिया। सोशल मीडिया पर भी घटना को लेकर चर्चा हुई। हालांकि वन्यजीव के व्यवहार को केवल इस एक घटना के आधार पर सामान्य व्यवहार नहीं माना जा सकता। बंदरिया ने दुकान में उपलब्ध बोतल से शराब पी, इसके बाद उसका व्यवहार आक्रामक दिखाई दिया और उसने कर्मचारी पर हमला किया। घटना के बाद उसे सुरक्षित रूप से रेस्क्यू करना प्राथमिकता रही।

कुछ स्थानीय रिपोर्टों में बंदरिया द्वारा एक से अधिक बोतलें तोड़े जाने या शराब पीने के बाद दुकान में सोने जैसी बातें भी सामने आई हैं, लेकिन इन विवरणों में स्रोतों के बीच अंतर है। इसलिए फिलहाल पुष्ट जानकारी के अनुसार इतना ही कहा जा सकता है कि बंदरिया दुकान में घुसी, शराब की एक क्वार्टर बोतल पीने की बात सामने आई, कर्मचारी को काटा और करीब ढाई घंटे तक दुकान में उत्पात मचाती रही।

घटना के दौरान आसपास के लोगों में कौतूहल के साथ डर का माहौल भी बना रहा। आमतौर पर दुकान में आने वाले ग्राहक और कर्मचारी ऐसी स्थिति के लिए तैयार नहीं होते। बंदरिया के अचानक आक्रामक होने के बाद किसी के लिए भी उसके पास जाना जोखिम भरा हो सकता था। इसी कारण वन विभाग की रेस्क्यू टीम को बुलाना जरूरी समझा गया।

रेस्क्यू टीम के मौके पर पहुंचने के बाद भी बंदरिया को पकड़ने में समय लगा। वन्यजीव को सीधे पकड़ने की कोशिश करने के बजाय प्रशिक्षित टीम ने स्थिति को नियंत्रित किया और उसे सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में लिया। इस कार्रवाई के बाद दुकान के आसपास मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। बंदरिया को वहां से हटाए जाने के बाद दुकान में सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

भगवान बिरसा जैविक उद्यान रांची के ओरमांझी क्षेत्र में स्थित है और वन्यजीवों के संरक्षण तथा देखभाल का प्रमुख केंद्र है। उद्यान की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यह रांची-रामगढ़ मार्ग पर स्थित है और यहां वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराया गया है। उद्यान में वन क्षेत्र अधिकारी, वनरक्षी, जीव वैज्ञानिक और पशु चिकित्सा से जुड़े कर्मचारी भी तैनात हैं।

इसी वजह से आबादी वाले इलाके में वन्यजीव के फंसने या आक्रामक होने की सूचना मिलने पर रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। इस मामले में भी टीम ने मौके पर पहुंचकर बंदरिया को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। उसके बाद उसे उद्यान ले जाया गया, जहां उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

स्थानीय लोगों के लिए यह घटना इसलिए भी असामान्य रही क्योंकि बंदरिया सीधे शराब की दुकान में पहुंच गई। दुकान में मौजूद शराब की बोतलों के बीच उसका घूमना और फिर एक बोतल से शराब पीना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। लेकिन कर्मचारी के घायल होने के बाद मामला केवल कौतूहल तक सीमित नहीं रहा और सुरक्षा का मुद्दा बन गया।

वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए ऐसे मामलों में यह महत्वपूर्ण होता है कि जानवर को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए और उसे अनावश्यक नुकसान न पहुंचे। इस मामले में भी रेस्क्यू टीम ने बंदरिया को पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य जांच के बाद आगे उसके संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

घटना के बाद इलाके में इस बात को लेकर भी चर्चा रही कि बंदरिया आसपास के जंगल या आबादी वाले क्षेत्र से दुकान तक कैसे पहुंची। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में उसके दुकान में प्रवेश करने के सटीक रास्ते या कारण की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इस बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि बंदरिया को रेस्क्यू कर लिया गया है और घायल कर्मचारी का इलाज कराया गया। करीब ढाई घंटे तक दुकान में बनी रही स्थिति रेस्क्यू टीम के पहुंचने और कार्रवाई के बाद खत्म हुई। बंदरिया को भगवान बिरसा जैविक उद्यान ले जाया गया है, जहां उसकी देखभाल और स्वास्थ्य जांच की जा रही है।

रांची के ओरमांझी में हुई यह घटना भले ही अपने असामान्य घटनाक्रम के कारण चर्चा में आई हो, लेकिन इसके साथ वन्यजीव और मानव आबादी के बीच बढ़ते संपर्क का पहलू भी जुड़ा है। खासकर जंगल से सटे इलाकों में लोगों को जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखने और उनके आक्रामक व्यवहार की स्थिति में खुद पकड़ने या भगाने के बजाय वन विभाग को सूचना देने की जरूरत होती है।

इस घटना में भी अगर कर्मचारियों या स्थानीय लोगों ने बंदरिया को खुद पकड़ने की कोशिश की होती तो चोट का खतरा बढ़ सकता था। कर्मचारी रामाशंकर तिवारी के घायल होने के बाद वन विभाग की रेस्क्यू टीम को बुलाया गया और प्रशिक्षित कर्मियों ने कार्रवाई की। इसके बाद स्थिति नियंत्रण में आई।

फिलहाल बंदरिया बिरसा जैविक उद्यान की टीम के संरक्षण में है और घायल कर्मचारी का इलाज चल रहा है। ओरमांझी की शराब दुकान में अचानक घुसी बंदरिया, शराब पीने और फिर कर्मचारी पर हमला करने की यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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