राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 20 जून को ओडिशा के मयूरभंज जिले में संताली समुदाय के पवित्र स्थल ‘गोसानी’ में पूजा-अर्चना करेंगे।
नई दिल्ली: ओडिशा में 20 जून को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण दौरा होने जा रहा है, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ मयूरभंज जिले के संताली समुदाय के पवित्र स्थल ‘गोसानी’ में पूजा-अर्चना करेंगे। इस कार्यक्रम को आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी काफी अहम माना जा रहा है।
संताली पवित्र स्थल ‘गोसानी’ में विशेष अनुष्ठान
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मयूरभंज जिले के ‘गोसानी’ स्थल पर पारंपरिक संताली अनुष्ठानों में हिस्सा लेंगे। यह स्थल संताली समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, जहां लोग नई शुरुआत, यात्रा की सुरक्षा और सामुदायिक कल्याण के लिए पूजा करते हैं। पद्मश्री सम्मानित संताली शोधकर्ता दमयंती बेशरा के अनुसार, गोसानी केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि पूर्वजों और ग्राम देवताओं की आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र है। यहां समुदाय अपने जीवन की महत्वपूर्ण गतिविधियों से पहले आशीर्वाद लेने आता है।
कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी दोपहर के आसपास पहाड़पुर स्थित हेलीपैड पर उतरेंगे और वहां से सीधे गोसानी स्थल जाएंगे। इसके बाद वे राष्ट्रपति मुर्मू के साथ पूजा-अर्चना में शामिल होंगे। इसके अलावा, प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के पैतृक गांव पहाड़पुर का भी दौरा करेंगे, जहां वे उनके परिवार से जुड़े स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और स्थानीय ग्रामीणों से संवाद करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू का 19 जून को रायरांगपुर पहुंचने का कार्यक्रम भी तय है, जहां वे स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी।
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राष्ट्रपति के जन्मदिन से जुड़ा सांस्कृतिक महत्व
इस दौरे का एक विशेष पहलू यह भी है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 68वें जन्मदिन के अवसर पर संताली परंपराओं के अनुसार विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। यह कार्यक्रम आदिवासी संस्कृति के प्रति सम्मान और जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है। संताली परंपरा के अनुसार, गोसानी स्थल पर आने वाले लोग पारंपरिक परिधान पहनते हैं। यहां तक कि सुरक्षा में तैनात कर्मियों के लिए भी पारंपरिक संताली वस्त्र धारण करने की परंपरा निभाई जाती है।
इस उच्चस्तरीय दौरे को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। लगभग 5,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी। पूरे क्षेत्र को ड्रोन निगरानी और नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। जिला प्रशासन ने मीडिया के प्रवेश पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने पत्रकारों से अनुरोध किया है कि वे सुरक्षा और प्रोटोकॉल कारणों से कार्यक्रम स्थल में प्रवेश न करें।









