RBI Bulletin: वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत बनी भारतीय अर्थव्यवस्था, घरेलू मांग और मानसून से मिला सहारा

RBI Bulletin में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। वैश्विक चुनौतियों के बीच घरेलू मांग और अच्छे मानसून से आर्थिक गतिविधियों को सहारा

वैश्विक चुनौतियों और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत लचीलापन दिखाया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अगस्त 2026 के बुलेटिन के मुताबिक, घरेलू मांग में मजबूती और विनिर्माण व सेवा गतिविधियों में बढ़ोतरी ने आर्थिक रफ्तार को सहारा दिया है।

बिजनेस न्यूज़: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती बनाए रखी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम बुलेटिन के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी और बेहतर मानसूनी परिस्थितियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी चुनौतियों से निपटने में मदद की है।

आरबीआई के आकलन के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी व्यापार नीतियों में बदलाव, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता से प्रभावित है। इसके बावजूद भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं। केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि घरेलू मांग और उत्पादन से मिलने वाला समर्थन आगे भी आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

अमेरिकी टैरिफ का भारत पर सीमित असर

आरबीआई बुलेटिन में अमेरिकी व्यापार शुल्क के संभावित प्रभाव का भी आकलन किया गया है। इसके मुताबिक, अमेरिका की ओर से भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क कुछ अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत कम प्रभावित कर सकता है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि भारत के कुछ महत्वपूर्ण निर्यात उत्पाद अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर हैं। इनमें स्मार्टफोन, पेट्रोलियम उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इससे अमेरिका के साथ भारत के व्यापार पर संभावित दबाव को कुछ हद तक सीमित रखने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, आरबीआई ने वैश्विक व्यापार में जारी अनिश्चितता को एक महत्वपूर्ण जोखिम के रूप में रेखांकित किया है। लंबे समय तक व्यापारिक तनाव रहने की स्थिति में निर्यात, निवेश और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर पड़ सकता है।

घरेलू मांग बनी अर्थव्यवस्था की ताकत

भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती में घरेलू मांग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उपभोक्ता खर्च के साथ-साथ विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में गतिविधियां आर्थिक गति को समर्थन दे रही हैं। आरबीआई के अनुसार, औद्योगिक गतिविधियों में सुधार और घरेलू बाजार की मांग ने बाहरी क्षेत्र में मौजूद अनिश्चितताओं के प्रभाव को कम करने में मदद की है। 

निवेश गतिविधियों और ऋण वृद्धि को भी बेहतर तरलता की स्थिति से समर्थन मिला है। इससे संकेत मिलता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि केवल वैश्विक मांग पर निर्भर नहीं है, बल्कि घरेलू खपत और निवेश भी इसके प्रमुख आधार बने हुए हैं।

बेहतर मानसून से कृषि क्षेत्र को राहत

मानसून की स्थिति में सुधार को भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना गया है। जून में कमजोर रहने के बाद जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने रफ्तार पकड़ी। इससे खरीफ फसलों की बुवाई सामान्य क्षेत्रफल के आसपास पहुंचने में मदद मिली। बारिश में सुधार के साथ देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडार भी बेहतर हुआ। 

जुलाई में अखिल भारतीय जलाशय भंडारण पिछले स्तर से ऊपर रहा और दीर्घकालिक औसत के करीब पहुंच गया। बेहतर मानसून से कृषि उत्पादन को सहारा मिलने की उम्मीद है। इसका असर ग्रामीण आय, खाद्य कीमतों और ग्रामीण मांग पर भी पड़ सकता है।

महंगाई पर आरबीआई की नजर

बुलेटिन के मुताबिक, खाद्य महंगाई में बदलाव के कारण मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई में कुछ बढ़ोतरी हुई। हालांकि, मुख्य महंगाई यानी खाद्य और ईंधन जैसे अधिक अस्थिर घटकों को छोड़कर महंगाई अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही। आरबीआई के लिए महंगाई और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव पर मानसून और कृषि उत्पादन का सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मोर्चे पर भी जून 2026 में सुधार देखने को मिला। आरबीआई के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से सकल एफडीआई प्रवाह बढ़ने के कारण हुई। कुल इक्विटी एफडीआई प्रवाह का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा सिंगापुर, नीदरलैंड, अमेरिका और कनाडा से आया। विनिर्माण क्षेत्र को सबसे अधिक इक्विटी निवेश मिला। इसके बाद बिजली उत्पादन तथा कंप्यूटर और संचार सेवाओं का स्थान रहा।

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