उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय बना हुआ है। बुधवार को प्रदेश के सभी जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार अधिकांश क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की भी संभावना है। देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें प्रभावित हुई हैं और राज्य के 9 जिलों में कुल 78 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई है।
बारिश के कारण पहाड़ों में जनजीवन पर असर पड़ रहा है। कई जगह सड़क मार्ग बाधित होने से लोगों की आवाजाही मुश्किल हुई है। पहाड़ी इलाकों में बारिश के दौरान भूस्खलन और मलबा आने का खतरा लगातार बना रहता है। ऐसे में बंद सड़कों को खोलने के लिए संबंधित विभागों की टीमें काम कर रही हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा करने और संवेदनशील इलाकों में जाने में सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज प्रदेश के सभी जिलों में बारिश का असर देखने को मिल सकता है। कहीं हल्की बारिश होगी तो कुछ इलाकों में तेज बौछारें पड़ सकती हैं। इसके साथ ही कई जगह गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना भी जताई गई है। देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी बारिश को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
देहरादून में बारिश का असर शहर और आसपास के इलाकों में भी देखने को मिल सकता है। मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पर्वतीय जिलों में बारिश के दौरान सड़क और यातायात व्यवस्था ज्यादा प्रभावित होती है। पहाड़ों में सड़कें संकरी होने और कई जगह ढलान पर बनी होने के कारण भारी बारिश के बाद मलबा आने से रास्ते बंद हो सकते हैं। इसी वजह से प्रशासन संवेदनशील मार्गों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
पिथौरागढ़ में भी बारिश को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सीमावर्ती और पर्वतीय इलाकों में लगातार बारिश के कारण छोटी-बड़ी सड़कों पर मलबा आने का खतरा बना रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग बाधित होने पर लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बागेश्वर में भी भारी बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश हैं। मौसम विभाग ने लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।
राज्य में बंद हुई 78 सड़कों का असर कई क्षेत्रों में सीधे तौर पर दिखाई दे रहा है। सड़क बंद होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से बाजार और जिला मुख्यालय तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। पहाड़ी इलाकों में सड़कें सिर्फ आवागमन का साधन नहीं बल्कि जरूरी सामान, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजमर्रा की जरूरतों की आपूर्ति का प्रमुख माध्यम भी हैं। ऐसे में लंबे समय तक सड़क बंद रहने से स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।
बारिश के कारण सबसे ज्यादा खतरा उन इलाकों में रहता है जहां पहले से भूस्खलन की घटनाएं होती रही हैं। लगातार बारिश होने पर पहाड़ों से पत्थर और मिट्टी खिसककर सड़क पर आ सकती है। कई बार अचानक मलबा आने से वाहन भी फंस जाते हैं। इसलिए प्रशासन की ओर से वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने और रास्ते में मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर रुकने की सलाह दी जाती है।
उत्तराखंड में मानसून के दौरान चारधाम और अन्य पर्यटन स्थलों पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में मौसम खराब होने पर पर्यटकों और यात्रियों के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। पहाड़ी रास्तों पर बारिश के दौरान वाहन चलाना सामान्य दिनों की तुलना में अधिक जोखिम भरा होता है। सड़क पर पानी, मलबा और पत्थर आने के अलावा दृश्यता भी कम हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार बारिश का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है। 27 से 29 अगस्त के बीच पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता बढ़ने की संभावना जताई गई है। इस दौरान पहाड़ी जिलों में कहीं-कहीं तेज बारिश हो सकती है, जबकि मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रह सकता है।
बारिश के साथ आकाशीय बिजली को लेकर भी सावधानी जरूरी है। खुले मैदान, खेत, नदी किनारे और ऊंचे स्थानों पर मौजूद लोगों को गरज-चमक के दौरान विशेष सतर्क रहना चाहिए। मौसम खराब होने पर पेड़ के नीचे खड़े होने के बजाय किसी सुरक्षित और पक्के स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है।
लगातार बारिश के कारण नदियों और बरसाती नालों के जलस्तर पर भी प्रशासन की नजर है। पहाड़ों में तेज बारिश का पानी अचानक निचले इलाकों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। लोगों से अपील की गई है कि वे उफनते नालों या तेज बहाव वाली जगहों को पार करने की कोशिश न करें।
सड़क बंद होने की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है जिन्हें जरूरी काम से दूसरे इलाकों में जाना पड़ता है। हालांकि प्रशासन और संबंधित विभाग बंद मार्गों को खोलने के लिए मशीनरी और कर्मचारियों की मदद ले रहे हैं। बारिश रुकने या कम होने के बाद कई मार्गों पर मलबा हटाने का काम तेजी से किया जा सकता है।
उत्तराखंड में मानसून के दौरान सड़क बंद होना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहता है। एक ओर बारिश लगातार जारी रहती है और दूसरी ओर सड़क खोलने के बाद दोबारा मलबा आने का खतरा बना रहता है। ऐसे में कई स्थानों पर सड़क खोलने का काम मौसम और परिस्थितियों के अनुसार किया जाता है। अधिकारियों की प्राथमिकता पहले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उसके बाद यातायात बहाल करना होती है।
मंगलवार को भी प्रदेश के कई जिलों में बारिश दर्ज की गई थी और अब बुधवार को सभी जिलों में बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक सप्ताह तक राज्य के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।
फिलहाल देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर के लिए जारी यलो अलर्ट को देखते हुए लोगों को मौसम की जानकारी लेते रहने की सलाह दी गई है। खासकर पर्वतीय इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को निकलने से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। यदि किसी मार्ग पर मलबा आने या सड़क बंद होने की सूचना हो तो वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल करना बेहतर होगा।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। संवेदनशील इलाकों में सड़क खोलने वाली मशीनों और कर्मचारियों को तैयार रखा जा रहा है। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत टीमों को सक्रिय किया जा सकता है।
कुल मिलाकर उत्तराखंड में मानसून का असर अभी कम होता नहीं दिख रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में बारिश की संभावना, तीन जिलों में यलो अलर्ट और 9 जिलों में 78 सड़कों का बंद होना पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की चुनौती को साफ दिखाता है। आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहने की संभावना के बीच लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की जरूरत है।