Reliance Communications: अनिल अंबानी की RCOM का स्पेक्ट्रम रद्द, जानें सरकार के फैसले की वजह

Reliance Communications और Reliance Telecom का स्पेक्ट्रम DoT ने तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। जानें 2010 से 2016 तक के स्पेक्ट्रम, भुगतान और रोलआउट शर्तों

रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने कंपनी और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) को आवंटित स्पेक्ट्रम को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।

बिजनेस न्यूज़: अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) को दूरसंचार क्षेत्र में बड़ा झटका लगा है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) को आवंटित कुछ स्पेक्ट्रम तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं। इस फैसले के बाद संबंधित स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल कर कंपनी वायरलेस टेलीकॉम सेवाएं संचालित नहीं कर सकेगी।

कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसे 5 अक्टूबर 2026 को दूरसंचार विभाग की ओर से इस संबंध में पत्र मिले। इन पत्रों में 2010, 2013, 2014, 2015 और 2016 की स्पेक्ट्रम नीलामी के तहत आवंटित स्पेक्ट्रम को रद्द करने की जानकारी दी गई है।

क्यों रद्द किया गया RCOM का स्पेक्ट्रम?

दूरसंचार विभाग के मुताबिक, कंपनी ने स्पेक्ट्रम से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण शर्तों का पालन नहीं किया। इनमें नेटवर्क रोलआउट से संबंधित दायित्व और स्पेक्ट्रम के लिए तय भुगतान प्रमुख हैं। विभाग का कहना है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस की ओर से स्पेक्ट्रम की कुछ किस्तों, स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज (SUC) और अन्य संबंधित बकाया रकम का भुगतान नहीं किया गया था।

इसके अलावा, वर्ष 2010 की नीलामी के तहत मिले स्पेक्ट्रम के मामले में कंपनी पर निर्धारित रोलआउट दायित्व पूरा नहीं करने का भी आरोप है। इन शर्तों के उल्लंघन को देखते हुए DoT ने संबंधित स्पेक्ट्रम को रद्द करने का फैसला लिया।

कंपनी ने दिवाला प्रक्रिया का दिया हवाला

RCOM फिलहाल Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) से गुजर रही है। कंपनी ने DoT के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए दिवाला और दिवालियापन संहिता यानी Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत मिलने वाली सुरक्षा का हवाला दिया था। कंपनी की ओर से यह तर्क दिया गया कि दिवाला समाधान प्रक्रिया के दौरान उस पर लागू कानूनी सुरक्षा को ध्यान में रखा जाना चाहिए। हालांकि, दूरसंचार विभाग ने कंपनी की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और स्पेक्ट्रम रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब RCOM की वित्तीय स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण है और कंपनी अपने कर्ज तथा अन्य दायित्वों के समाधान के लिए दिवाला प्रक्रिया में है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भी जुड़ा मामला

स्पेक्ट्रम रद्द करने की कार्रवाई का संबंध सुप्रीम कोर्ट के 13 फरवरी 2026 के फैसले से भी बताया गया है। कंपनी ने इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर किए जाने का हवाला दिया था। हालांकि, DoT के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित रिव्यू पिटीशन को 7 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया। इसके बाद विभाग ने स्पेक्ट्रम से जुड़े अपने फैसले को आगे बढ़ाया।

इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल और उससे जुड़ी कानूनी तथा वित्तीय जिम्मेदारियों को लेकर कंपनी और सरकार के बीच विवाद काफी समय से चल रहा था।

कंपनी की सेवाओं पर क्या होगा असर?

DoT ने RCOM और RTL को निर्देश दिया है कि वे रद्द किए गए स्पेक्ट्रम के आधार पर संचालित होने वाले सभी संबंधित वायरलेस नेटवर्क और सेवाओं का इस्तेमाल बंद करें। इस फैसले का कंपनी की कारोबारी और वित्तीय स्थिति पर असर पड़ने की संभावना है। स्पेक्ट्रम किसी भी टेलीकॉम कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण कारोबारी संसाधन होता है। ऐसे में उसके रद्द होने से कंपनी की परिसंपत्तियों और भविष्य की समाधान योजना पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

रिलायंस कम्युनिकेशंस की प्रस्तावित रिजॉल्यूशन प्लान में स्पेक्ट्रम को कंपनी की परिसंपत्ति के रूप में बेचने की योजना भी शामिल बताई गई है। इस योजना का उद्देश्य कंपनी की परिसंपत्तियों के जरिए समाधान प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में स्पेक्ट्रम रद्द होने के बाद इस प्रस्ताव और कंपनी की परिसंपत्तियों के मूल्यांकन पर भी असर पड़ सकता है।

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