अगले महीने होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक को लेकर बाजार में अटकलें तेज हो गई हैं कि Reserve Bank of India (RBI) ब्याज दरों में बदलाव कर सकता है।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अगले महीने होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। वैश्विक आर्थिक दबाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोरी के बीच यह फैसला लिया जा सकता है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि RBI महंगाई और मुद्रा स्थिरता को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे हो सकते हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की मासिक EMI पर सीधा असर पड़ेगा।
रेपो रेट बढ़ने का क्या होगा असर?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंक भी ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन पर ब्याज दर बढ़ा देते हैं। इसका सीधा प्रभाव होगा—
- होम लोन की EMI में वृद्धि
- फ्लोटिंग रेट लोन महंगे होना
- नए लोन लेना पहले की तुलना में अधिक महंगा
वहीं, फिक्स्ड रेट लोन लेने वाले ग्राहकों पर इसका तत्काल प्रभाव नहीं पड़ता।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड का अनुमान: जल्द बढ़ सकती हैं दरें
स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अर्थशास्त्रियों अनुभूति सहाय और सौरव आनंद के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव भारत के लिए महंगाई का दबाव बढ़ा रहे हैं। इसके चलते RBI जून की नीति बैठक से ही दरों में बढ़ोतरी की शुरुआत कर सकता है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25% के आसपास है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ब्याज दरों में क्रमिक बढ़ोतरी संभव है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी और एशियाई केंद्रीय बैंकों द्वारा नीतिगत सख्ती भी RBI पर दबाव बना रही है। कई देशों में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पहले ही ब्याज दरें बढ़ाई जा चुकी हैं, जिसका असर भारतीय नीति पर भी देखा जा सकता है। बाजार संकेतों के अनुसार, अगले 12 महीनों में 100 से 125 बेसिस पॉइंट तक की दर वृद्धि की संभावना भी जताई जा रही है।
रुपये की कमजोरी बनी चिंता का विषय
भारतीय रुपया हाल के दिनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में रहा है। यह 96 के ऊपर कारोबार कर रहा है और हाल ही में 96.970 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंच चुका है। रुपये में गिरावट को रोकने के लिए RBI बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय बैंक सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री कर मुद्रा को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है।
हाल ही में इंटरबैंक मार्केट में रुपये में अचानक 70 पैसे तक की मजबूती भी देखी गई, जो RBI के हस्तक्षेप का संकेत माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा जोखिम मानी जा रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है।








