उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का 75 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। जून 2028 तक ब्यासी और दिसंबर 2029 तक कर्णप्रयाग तक रेल सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
ऋषिकेश: उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के अनुसार परियोजना का 75 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। सुरंग निर्माण और ट्रैक से जुड़े अधिकांश कार्य अंतिम चरण में हैं, जबकि वर्ष 2028 तक ब्यासी और 2029 तक कर्णप्रयाग तक ट्रेन संचालन शुरू करने की तैयारी है।
परियोजना का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल है। आरवीएनएल के अधिकारियों के अनुसार अब तक कुल कार्य का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरा किया जा चुका है। परियोजना के तहत बनने वाली 213 किलोमीटर लंबी सुरंगों में से लगभग 206 किलोमीटर की खुदाई पूरी हो चुकी है।

इसके अलावा 150 किलोमीटर से अधिक हिस्से में सुरंगों की लाइनिंग का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। निर्माण एजेंसियां शेष कार्य को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
जून 2028 तक ब्यासी, 2029 तक कर्णप्रयाग पहुंचेगी ट्रेन
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यदि कार्य निर्धारित गति से चलता रहा तो जून 2028 तक ब्यासी तक रेल सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। इसके बाद दिसंबर 2029 तक पूरी परियोजना को चालू कर कर्णप्रयाग तक ट्रेन संचालन शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है।
रेल संपर्क शुरू होने के बाद गढ़वाल क्षेत्र के लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। साथ ही पर्यटन और धार्मिक यात्रा को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
भूवैज्ञानिक चुनौतियां बनीं सबसे बड़ी बाधा
निर्माण कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ी क्षेत्रों की जटिल भूवैज्ञानिक परिस्थितियां रही हैं। विशेष रूप से टनल नंबर-1, टनल नंबर-5 और टनल नंबर-14 में कठिन चट्टानी संरचना और भूगर्भीय परिस्थितियों के कारण कार्य अपेक्षा से अधिक समय ले रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक इन सुरंगों का ब्रेकथ्रू अभी बाकी है और इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तकनीकी चुनौतियों के बावजूद परियोजना की प्रगति संतोषजनक बताई जा रही है।
रोजगार और विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना ने निर्माण चरण के दौरान बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए हैं। परियोजना में अब तक करीब 10 हजार लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से काम किया है। वहीं बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को अस्थायी रोजगार और कौशल विकास का अवसर मिला है।
अधिकारियों के अनुसार परियोजना से जुड़े कई लोगों ने तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे भविष्य में उन्हें अन्य परियोजनाओं में भी रोजगार मिलने की संभावना बढ़ी है।
आगे पीपलकोटी तक विस्तार की तैयारी
फिलहाल रेल लाइन को कर्णप्रयाग तक विकसित किया जा रहा है, लेकिन भविष्य में इसे और आगे बढ़ाने की योजना भी बनाई जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि पीपलकोटी तक विस्तार के लिए प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया गया है और इसकी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजी जा चुकी है।
परियोजना पूरी होने के बाद उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और चारधाम यात्रा मार्ग को भी नई गति मिलेगी।









