G7 Summit में प्रधानमंत्री Narendra Modi शामिल हुए और उन्होंने होर्मुज संकट का मुद्दा उठाया, जहां भारतीयों की मौत पर चर्चा हुई। बैठक में Donald Trump भी मौजूद थे और द्विपक्षीय वार्ता की संभावना बनी रही है इस समिट में चर्चा जारी।
पेरिस: फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें G7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्किंग सेशन में हिस्सा लिया। इस उच्च स्तरीय बैठक का विषय है— “सभी के हित में संतुलित, समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास को फिर से गति देना”। इस सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता वैश्विक आर्थिक स्थिरता, सुरक्षा, व्यापार और जलवायु जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में भारतीयों की मौत का मुद्दा उठा
समिट के पहले दिन आउटरीच सेशन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट में हुई भारतीय नागरिकों की मौतों का मुद्दा मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां नाविकों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में तनाव और बाधाओं का सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद थे और वे पीएम मोदी के पास बैठे दिखाई दिए।
मोदी-ट्रंप मुलाकात: 16 महीने बाद आमने-सामने
G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की 16 महीने बाद मुलाकात हुई। दोनों नेता पहले ग्रुप फोटो सेशन में मिले, जहां ट्रंप ने मोदी का हाथ पकड़कर गर्मजोशी से अभिवादन किया।
इसके बाद आउटरीच सेशन में दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत भी हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बातचीत करीब 5 मिनट तक चली। व्हाइट हाउस के संकेतों के अनुसार, दोनों नेताओं की एक औपचारिक द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है, जिसमें व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत और अमेरिका के बीच पिछले महीनों में टैरिफ और वीजा नीतियों को लेकर कुछ असहमति रही है, जिससे इस बैठक को और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पीएम मोदी का संबोधन: “भरोसा सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति”
G7 आउटरीच सेशन में प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक साझेदारी और आर्थिक सहयोग पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आज दुनिया पहले से ज्यादा जुड़ी हुई है, लेकिन साझेदारी तभी सफल हो सकती है जब उसके आधार में विश्वास हो। उन्होंने कहा कि “भरोसा आज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति है, जबकि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में सबसे बड़ी कमी भी भरोसे की ही है।मोदी ने जोर देकर कहा कि विकास तभी प्रभावी होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो और देशों के बीच साझेदारी समानता के आधार पर होनी चाहिए।
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ग्लोबल साउथ को साझेदारी चाहिए, सिर्फ समर्थन नहीं”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों की अपेक्षा केवल सहायता नहीं, बल्कि वास्तविक साझेदारी की है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेन-देन आधारित सोच से आगे बढ़कर एक समान भागीदारी के रूप में देखा जाना चाहिए, जहां सभी देशों को बराबरी का स्थान मिले।
वैश्विक नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें
G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात की। इनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), केन्या, मिस्र, दक्षिण कोरिया और जापान के नेता शामिल रहे।
इन बैठकों में मुख्य रूप से व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई। विशेष रूप से UAE के राष्ट्रपति के साथ बैठक में दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री ने यूएई में रह रहे भारतीय प्रवासियों की देखभाल के लिए वहां की सरकार का आभार भी व्यक्त किया।
G7 समिट में किन देशों की भागीदारी?
G7 समिट में कुल सात सदस्य देशों के अलावा कई आमंत्रित देशों के नेता भी शामिल हुए हैं। सदस्य देशों में शामिल हैं:
अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा।
इसके अलावा यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिनिधि भी इस बैठक में भाग ले रहे हैं। फ्रांस ने भारत, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, केन्या और मिस्र जैसे देशों के नेताओं को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है, जिससे इस समिट का दायरा और वैश्विक महत्व बढ़ गया है।
NATO प्रमुख का बयान और वैश्विक सुरक्षा चर्चा
इस बीच NATO के महासचिव मार्क रूट ने कहा कि संगठन चीन की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। उन्होंने वैश्विक सुरक्षा संतुलन और बदलते भू-राजनीतिक हालात पर चिंता जताई। समिट के दौरान कुछ अनौपचारिक बातचीत के हिस्सों में हल्के-फुल्के विषयों जैसे मौसम, खेल और अन्य सामान्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जो नेताओं के बीच मानवीय संवाद को दर्शाता है।
भारत की कूटनीतिक सक्रियता पर जोर
G7 समिट में भारत की सक्रिय भागीदारी को वैश्विक कूटनीति में उसके बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की अलग-अलग देशों के नेताओं के साथ बैठकें इस बात का संकेत हैं कि भारत वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक चर्चाओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिट में भारत ने ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से रखा है।









