अमेरिका अपने 8 साल पुराने फैसले को बदलते हुए यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (United States Indo-Pacific Command) का नाम फिर से यूएस पैसिफिक कमांड रखने जा रहा है।
नई दिल्ली: अमेरिका की रक्षा नीति से जुड़ा एक बड़ा प्रतीकात्मक बदलाव सामने आया है, जिसने भारत समेत पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका ने अपने आठ साल पुराने फैसले को पलटते हुए “यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड” का नाम बदलकर फिर से “यूएस पैसिफिक कमांड” करने का निर्णय लिया है। इस कदम को रणनीतिक संदेश में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
यह कमांड प्रशांत महासागर और हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है और इसका दायरा अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर दक्षिण एशिया तक फैला हुआ है।
अमेरिका का तर्क: सिर्फ नाम बदला गया, नीति नहीं
अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल नाम तक सीमित है और इससे कमांड की जिम्मेदारियों या ढांचे में कोई बदलाव नहीं होगा। विभाग के अनुसार, “यूएस पैसिफिक कमांड” नाम 1947 में इसकी स्थापना के ऐतिहासिक संदर्भ को दर्शाता है। अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रीय प्रतिबद्धताएं, संयुक्त सैन्य अभ्यास और साझेदार देशों के साथ सहयोग पहले की तरह जारी रहेगा।
यह निर्णय 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में किए गए बदलाव को पलटता है, जब “पैसिफिक कमांड” का नाम बदलकर “इंडो-पैसिफिक कमांड” किया गया था। उस समय इस बदलाव को हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते रणनीतिक महत्व और भारत सहित एशियाई देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के संकेत के रूप में देखा गया था।
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भारत की चिंता और क्वाड पर सवाल
इस नए बदलाव ने भारत में रणनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। विश्लेषकों का मानना है कि नाम से “इंडो” हटने का संदेश यह संकेत दे सकता है कि अमेरिका अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति में फोकस बदल रहा है। इसी संदर्भ में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “क्या यह ‘क्वाड’ के ताबूत में एक और कील है?” उन्होंने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय साझेदारी की दिशा को लेकर अनिश्चितता पैदा कर सकता है। क्वाड समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं और इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।
कमांड का रणनीतिक दायरा
हवाई में मुख्यालय वाला यह सैन्य कमांड प्रशांत महासागर के साथ-साथ हिंद महासागर के बड़े हिस्से, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों की निगरानी करता है। पिछले वर्षों में यह कमांड भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का एक अहम संस्थागत आधार बन चुका है, जिसके तहत संयुक्त अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, खुफिया साझेदारी और सैन्य समन्वय को मजबूती मिली है।









