प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 54वीं प्रगति बैठक में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 16 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण, दवा निर्माण में आत्मनिर्भरता और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने तीन प्रमुख क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 28 अक्टूबर को 54वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की। इसमें रेलवे, फार्मा मैन्युफैक्चरिंग और पीएम एकता मॉल से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा हुई। अगले दिन प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता योजनाओं को समय पर पूरा करना और लोगों तक उनका लाभ पहुंचाना है।
16 हजार करोड़ की परियोजनाओं पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के सेवा तीर्थ में आयोजित बैठक में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ी 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की प्रगति जानी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि निर्माण कार्यों में कहां परेशानियां आ रही हैं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने साफ किया कि सरकारी परियोजनाओं की सफलता केवल बजट खर्च करने से नहीं मापी जानी चाहिए। जरूरी यह है कि काम समय पर पूरा हो और आम लोगों को उसका फायदा मिले। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल बनाने तथा अटकी परियोजनाओं की समस्याएं जल्द दूर करने के निर्देश दिए।
रेलवे स्टेशनों को आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब बनाने की तैयारी
बैठक में अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की समीक्षा भी हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के बड़े रेलवे स्टेशनों को ऐसे ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां यात्रियों को अलग-अलग परिवहन सेवाएं आसानी से मिल सकें। इसका मतलब है कि यात्रियों को ट्रेन से उतरने के बाद मेट्रो, बस या दूसरे सार्वजनिक परिवहन तक पहुंचने में ज्यादा परेशानी न हो।
सरकार अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर में 1,300 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों को विकसित करने पर काम कर रही है। इन स्टेशनों पर यात्रियों के बैठने की जगह, साफ-सफाई, प्रवेश और निकास मार्ग, सूचना प्रणाली तथा दूसरी सुविधाओं में सुधार की योजना है। रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और भीड़भाड़ कम करने के लिए मल्टी ट्रैकिंग जैसी परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है।
दवाओं के निर्माण में विदेशी निर्भरता घटाने पर जोर
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प्रधानमंत्री ने फार्मा सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले जरूरी कच्चे माल और दवा बनाने वाले प्रमुख तत्वों का उत्पादन भारत में बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विकसित किए जा रहे बल्क ड्रग पार्कों की प्रगति की समीक्षा की। इन पार्कों का उद्देश्य दवा कंपनियों को उत्पादन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना और देश में ही महत्वपूर्ण दवा सामग्री का निर्माण बढ़ाना है।
सरकार फार्मा उद्योग के लिए 15 हजार करोड़ रुपये और बल्क ड्रग्स के लिए 6,940 करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं भी चला रही है। इन योजनाओं से घरेलू उत्पादन बढ़ाने और जरूरी दवाओं के कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
पीएम एकता मॉल से छोटे कारोबारियों को क्या फायदा मिलेगा?
बैठक में पीएम एकता मॉल योजना को लेकर भी बात हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन मॉल के जरिए छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारीगरों के बनाए सामान को ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए। एकता मॉल में अलग-अलग राज्यों के मशहूर हस्तशिल्प, हाथ से बने सामान और एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना से जुड़े उत्पाद बेचे जाएंगे। इससे छोटे कारोबारियों को अपना सामान बेचने के लिए नई जगह मिल सकेगी।
अब तक 27 राज्यों में एकता मॉल बनाने की विस्तृत रिपोर्ट को मंजूरी मिल चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन मॉल को पर्यटन वाली जगहों से भी जोड़ा जाए। इससे घूमने आने वाले लोग स्थानीय सामान खरीद सकेंगे और कारीगरों की कमाई बढ़ सकती है। इस योजना से गांवों में भी काम बढ़ने की उम्मीद है। सामान बनाने के अलावा उसकी पैकिंग, गोदाम में रखने और एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने जैसे कामों में भी लोगों को रोजगार मिल सकता है।
हर महीने सरकारी योजनाओं का हिसाब लेंगे अधिकारी
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा कि वे हर महीने जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक करें। इसमें देखा जाए कि सरकारी योजनाओं का काम कहां तक पहुंचा है और लोगों को उनका फायदा मिल रहा है या नहीं। अगर किसी जिले में काम रुका हुआ है या लोगों को योजना का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है, तो अधिकारी उसकी वजह पता करें और समस्या दूर कराएं।
प्रधानमंत्री ने आकांक्षी जिला और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रमों की भी बात की। ये कार्यक्रम उन इलाकों के लिए चलाए जा रहे हैं, जो विकास के मामले में पीछे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों में काम की लगातार निगरानी होनी चाहिए और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। प्रगति बैठक के जरिए प्रधानमंत्री केंद्र और राज्य सरकारों की बड़ी योजनाओं और परियोजनाओं का काम देखते हैं। इस बैठक में यह भी पता किया जाता है कि कौन-सा काम समय पर चल रहा है और कहां देरी हो रही है।









