Renewable Energy: अगले चार साल में 220 अरब डॉलर निवेश की जरूरत, भारत में सोलर सेक्टर सबसे आगे

भारत में अगले चार साल में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को 220 अरब डॉलर निवेश की जरूरत होगी। सोलर एनर्जी सबसे आगे है। जानें निवेश और विकास की संभावनाएं

भारत को 2027 से 2030 के बीच रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में करीब 220 अरब डॉलर निवेश की जरूरत होगी। इसमें सोलर सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रहेगी। सरकार निवेश जुटाने की योजना बना रही है। इस पर नवंबर में दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होगा।

बिजनेस न्यूज़: भारत में सोलर, विंड और दूसरी स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के लिए आने वाले चार साल काफी महत्वपूर्ण होंगे। सरकार का अनुमान है कि 2027 से 2030 के बीच इस क्षेत्र में करीब 220 अरब डॉलर, यानी लगभग 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश की जरूरत पड़ेगी। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने बताया कि इस रकम को जुटाने के लिए सरकार रोडमैप तैयार कर रही है। सबसे ज्यादा निवेश सोलर एनर्जी में होने की संभावना है।

सोलर एनर्जी में सबसे ज्यादा निवेश की जरूरत

सरकार के अनुमान के मुताबिक, अगले चार वर्षों में सोलर एनर्जी क्षेत्र को करीब 70 से 75 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। यह बाकी ऊर्जा क्षेत्रों के मुकाबले सबसे बड़ी रकम है। इसके बाद बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क का नंबर आता है, जिसके लिए 40 से 45 अरब डॉलर की जरूरत बताई गई है। ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार से नए सोलर और विंड प्लांट में बनने वाली बिजली को अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

विंड एनर्जी के लिए 25 से 30 अरब डॉलर और ग्रीन हाइड्रोजन के लिए 20 से 25 अरब डॉलर का अनुमान है। इसी तरह ऊर्जा भंडारण और उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग में 15 से 20 अरब डॉलर का निवेश जरूरी होगा। हाइड्रो पावर के लिए 12 से 15 अरब डॉलर और बायो-एनर्जी के लिए तीन से पांच अरब डॉलर की जरूरत बताई गई है। ये आंकड़े भविष्य की निवेश जरूरतों के अनुमान हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी राशि का निवेश पहले ही तय हो चुका है।

दो साल में आया 63.7 अरब डॉलर का निवेश

भारत के रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में हाल के वर्षों में निवेश बढ़ा है। मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2024 से जून 2026 के बीच इस क्षेत्र में कुल 63.7 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। इसमें करीब 6.2 अरब डॉलर का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) शामिल था। घरेलू निजी कंपनियों और सरकारी योजनाओं की भी इसमें भूमिका रही।

इस दौरान सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं पर करीब छह अरब डॉलर खर्च किए। सरकार का मानना है कि उसकी योजनाओं और प्रोत्साहन से निजी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने में मदद मिली है। हालांकि, 2030 तक तय लक्ष्य हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में निवेश की रफ्तार और बढ़ानी होगी।

2030 तक 500 गीगावाट का लक्ष्य

भारत ने वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 500 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मंत्रालय के मुताबिक, देश में फिलहाल ऐसी बिजली उत्पादन क्षमता करीब 308 गीगावाट है। इसमें सोलर और विंड के अलावा जलविद्युत तथा परमाणु ऊर्जा जैसी श्रेणियां भी शामिल हैं। नई ऊर्जा परियोजनाएं लगाने के साथ बिजली की आपूर्ति बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है। 

सोलर प्लांट से दिन में बिजली बनती है, जबकि विंड एनर्जी का उत्पादन हवा की उपलब्धता पर निर्भर करता है। इसी वजह से बैटरी स्टोरेज और मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क में निवेश को जरूरी माना जा रहा है।

Renewable Energy: अगले चार साल में 220 अरब डॉलर निवेश की जरूरत, भारत में सोलर सेक्टर सबसे आगे

2 नवंबर से दिल्ली में शुरू होगा रिन्यूएबल एनर्जी समिट

निवेश की इन्हीं जरूरतों को लेकर नई दिल्ली के भारत मंडपम में 2 से 5 नवंबर 2026 तक भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो आयोजित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 नवंबर को इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। चार दिनों के इस आयोजन में 130 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

सम्मेलन में 400 से अधिक कंपनियां और प्रदर्शक नई ऊर्जा तकनीक, उपकरण और परियोजनाएं पेश करेंगे। इसके अलावा 500 से ज्यादा विशेषज्ञ वक्ताओं और करीब 75 हजार प्रतिभागियों के शामिल होने का अनुमान है। यहां निवेशकों, ऊर्जा कंपनियों और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच वित्तीय सहयोग, नई तकनीक और परियोजनाओं को लेकर बातचीत होगी।

ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी स्टोरेज पर भी होगी चर्चा

इस सम्मेलन के साथ इंटरनेशनल सोलर अलायंस की नौवीं बैठक और ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल स्टील, परिवहन और दूसरे उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए किया जा सकता है। भारत इस क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ विदेशी बाजारों में अवसर तलाश रहा है। ऊर्जा भंडारण के लिए नई बैटरी तकनीक, उपकरणों का घरेलू निर्माण और बिजली नेटवर्क को बेहतर बनाने पर भी चर्चा होगी।

निवेश बढ़ने से रोजगार और उद्योगों को मिलेगा मौका

रिन्यूएबल एनर्जी में बड़े निवेश से सोलर पैनल, बैटरी, पावर उपकरण और दूसरी मशीनों का निर्माण करने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा नए बिजली संयंत्रों के निर्माण, रखरखाव और तकनीकी सेवाओं में रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। हालांकि, इन संभावनाओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए वित्तीय संसाधन, जरूरी मंजूरियां और बिजली खरीद की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

सरकार की कोशिश है कि नवंबर में होने वाले सम्मेलन के जरिए देश और विदेश के निवेशकों को एक मंच पर लाया जाए। सम्मेलन और निवेश योजनाओं की जानकारी नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की वेबसाइट तथा भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट के आधिकारिक पोर्टल पर देखी जा सकती है।

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