भारत और मेक्सिको ने तरजीही व्यापार समझौते (PTA) के लिए औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। दोनों देशों ने बातचीत की शर्तों पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित समझौते से ऑटोमोबाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि और केमिकल सेक्टर में कारोबार के नए अवसर मिल सकते हैं।
बिजनेस न्यूज़: अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील की चर्चाओं के बीच भारत ने मेक्सिको के साथ व्यापार बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। दोनों देशों ने तरजीही व्यापार समझौते (PTA) पर बातचीत शुरू करने के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर हस्ताक्षर किए हैं। 28 अक्टूबर को हुई इस पहल से भारतीय कंपनियों के लिए मेक्सिको के बाजार में नए अवसर खुलने की उम्मीद है। हालांकि अभी अंतिम व्यापार समझौता नहीं हुआ है। दोनों देश आयात शुल्क, बाजार तक पहुंच और कारोबार से जुड़े नियमों पर बातचीत करेंगे।
भारत और मेक्सिको के बीच व्यापार को लेकर क्या तय हुआ?
भारत और मेक्सिको अब एक-दूसरे के साथ कारोबार बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है। बैठक में तय किया गया कि व्यापार समझौते में किन बातों को शामिल किया जाएगा और आगे की चर्चा कैसे होगी। इसे टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) कहा जाता है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देश प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) पर काम कर रहे हैं। इस समझौते के तहत कुछ सामानों पर आयात शुल्क कम किया जा सकता है। यानी भारत से मेक्सिको जाने वाले कुछ उत्पादों पर टैक्स में छूट मिल सकती है। इसी तरह मेक्सिको से भारत आने वाले सामान पर भी राहत दी जा सकती है।
हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि किन चीजों पर टैक्स घटेगा। दोनों देशों के बीच फिलहाल बातचीत का तरीका तय हुआ है। समझौते की शर्तों पर सहमति बनने के बाद ही पता चलेगा कि किस सामान पर कितनी छूट मिलेगी।
गाड़ियों, दवाओं और खेती के सामान का बढ़ सकता है कारोबार
भारत और मेक्सिको के बीच गाड़ियों, दवाओं, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खेती से जुड़े उत्पादों और केमिकल के कारोबार पर खास ध्यान दिया जा रहा है। दोनों देश इन क्षेत्रों में खरीद-बिक्री बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। मेक्सिको में गाड़ियां बनाने का बड़ा उद्योग है। वहां कई विदेशी कंपनियों की फैक्ट्रियां हैं। भारत में भी गाड़ियों के पुर्जे बनाने वाली कई कंपनियां काम करती हैं। ऐसे में भारतीय कंपनियों को मेक्सिको में अपना सामान बेचने के नए मौके मिल सकते हैं।
दवा कंपनियों के लिए भी इस समझौते को अहम माना जा रहा है। भारत में बनी दवाएं पहले से कई देशों में भेजी जाती हैं। अगर मेक्सिको के साथ व्यापार की शर्तें आसान होती हैं, तो भारतीय दवा कंपनियों को वहां अपना कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है। मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं।
इसके अलावा मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान, खेती के उत्पाद और खाने-पीने की चीजों के व्यापार पर भी बात होगी। केमिकल उद्योग के साथ बिजली, ईंधन और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी खनिजों को लेकर भी दोनों देश मिलकर काम करने की संभावनाएं देख रहे हैं।
विदेश सामान भेजने के नियम भी आसान करने पर होगी बात
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भारत से मेक्सिको सामान भेजने वाले व्यापारियों को कई तरह के नियम पूरे करने पड़ते हैं। सामान की जांच, कस्टम के कागजात और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया से गुजरना होता है। दोनों देशों के अधिकारी इन कामों को आसान बनाने पर भी चर्चा करेंगे। बैठक में इस बात को भी शामिल किया गया है कि किसी सामान को भारत में बना हुआ माना जाएगा या मेक्सिको में। इसके लिए अलग नियम होते हैं, जिन्हें रूल्स ऑफ ओरिजिन कहते हैं। व्यापार समझौते में इन नियमों की भी अहम भूमिका रहेगी।
खेती और खाने-पीने के सामान के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े नियमों पर भी बातचीत होगी। इसके अलावा अगर व्यापार के दौरान कोई विवाद होता है, तो उसे कैसे सुलझाया जाएगा, इस पर भी सहमति बनाने की कोशिश होगी।
इन बातों पर दोनों देश राजी होते हैं, तो कारोबारियों को सामान भेजने और मंगाने में कम परेशानी हो सकती है। हालांकि, नियमों में वास्तव में क्या बदलाव होगा, यह समझौता होने के बाद ही साफ होगा।
मोदी और मेक्सिको की राष्ट्रपति के बीच भी हुई थी बातचीत
भारत और मेक्सिको के बीच कारोबार बढ़ाने की बात नई नहीं है। जून 2025 में कनाडा में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की मुलाकात हुई थी। उस समय दोनों नेताओं ने व्यापार और आर्थिक रिश्ते मजबूत करने पर चर्चा की थी। अब भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल की मेक्सिको यात्रा के दौरान इस दिशा में आगे बात हुई है। मेक्सिको की तरफ से विदेश व्यापार के अवर सचिव लुइस रोसेंदो गुतिएरेज रोमानो बैठक में शामिल हुए।
अधिकारियों ने दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के साथ काम करने के मौके देने पर चर्चा की। इसके अलावा निवेश बढ़ाने और सामान बनाने से लेकर उसकी सप्लाई तक के काम में सहयोग बढ़ाने की बात भी हुई।
2027 में भारत आ सकते हैं मेक्सिको के कारोबारी
भारत और मेक्सिको चाहते हैं कि दोनों देशों की कंपनियां भी सीधे एक-दूसरे के संपर्क में आएं। इसी को देखते हुए 2027 के शुरुआती तीन महीनों में मेक्सिको से कारोबारियों का एक दल भारत आ सकता है। इस दौरे में मेक्सिको के व्यापारी भारतीय कंपनियों से मिलकर कारोबार की संभावनाओं पर बात कर सकेंगे। उन्हें भारत में किस तरह के सामान की मांग है और किन क्षेत्रों में मिलकर काम किया जा सकता है, इसकी जानकारी मिलेगी। भारतीय कारोबारियों को भी मेक्सिको की कंपनियों से संपर्क बढ़ाने का मौका मिलेगा।









