कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास की पहचान, नागरिकता और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच की मांग को लेकर मद्रास हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई है। अदालत ने सौरव दास और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।
नई दिल्ली: पत्रकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने सौरव दास और उनके माता-पिता की पहचान तथा पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा न्यायपालिका के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर उनके सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराने की अपील भी की गई है। अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है।
सौरव दास के खिलाफ याचिका में क्या आरोप लगाए गए?
सौरव दास के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में कांचीपुरम के रहने वाले गणेश कुमार ने जनहित याचिका लगाई है। इसमें उन्होंने सौरव दास की पहचान, नागरिकता और उनके माता-पिता के बारे में जांच कराने की मांग की है। याचिका में सौरव दास को 'योगेश शर्मा उर्फ सौरव दास' बताया गया है। हालांकि, अभी यह सिर्फ याचिकाकर्ता का दावा है। कोर्ट ने उनकी पहचान या नागरिकता को लेकर कोई फैसला नहीं दिया है।
गणेश कुमार ने मांग की है कि केंद्र सरकार इस मामले की जांच कराए, ताकि सौरव दास और उनके परिवार से जुड़ी जानकारी साफ हो सके। उनका कहना है कि जांच में नागरिकता या दस्तावेजों से जुड़ी कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो कानून के हिसाब से कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पासपोर्ट और आधार कार्ड को लेकर भी जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी उठाए सवाल
याचिका में सौरव दास की सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र किया गया है। गणेश कुमार का आरोप है कि सौरव दास ने एक्स और इंस्टाग्राम पर सुप्रीम कोर्ट के जजों और न्यायपालिका को लेकर गलत और आपत्तिजनक बातें लिखी हैं। इसी को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट से मांग की है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौरव दास के सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराने के निर्देश दिए जाएं। फिलहाल ये सभी आरोप याचिका में लगाए गए हैं। इनमें कितनी सच्चाई है, इस पर कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है।
इसके अलावा उन्हें भविष्य में न्यायपालिका के खिलाफ कथित अपमानजनक बयान देने से रोकने की भी मांग की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील बी. जगन्नाथ ने कहा कि न्यायपालिका के बारे में जिस तरह की टिप्पणियां की गई हैं, उनकी जांच जरूरी है। उन्होंने अदालत को बताया कि इस संबंध में 7 अक्टूबर 2026 को संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद हाई कोर्ट का रुख किया गया।
हाई कोर्ट ने किन लोगों से मांगा जवाब?
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मामले की सुनवाई मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने सौरव दास की पहचान और पते से जुड़े कुछ दस्तावेज अदालत के सामने रखे। पीठ ने इन दस्तावेजों को देखा और उनमें दर्ज कुछ जानकारियों पर स्पष्टीकरण मांगा।
अदालत ने सौरव दास के साथ केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। इनमें केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, चेन्नई का क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) शामिल हैं।
इसके अलावा एक्स और इंस्टाग्राम के शिकायत निवारण अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी। फिलहाल हाई कोर्ट ने याचिका में लगाए गए आरोपों को सही नहीं ठहराया है और न ही सौरव दास के दस्तावेज रद्द करने का कोई आदेश दिया है।
दिल्ली में भी चल रही है अलग कानूनी कार्यवाही
सौरव दास से जुड़ा एक अन्य मामला दिल्ली में भी चल रहा है। यहां विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड से संबंधित कार्यवाही जारी है। इस मामले में सौरव दास और सीजेपी नेता आशुतोष रांका को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 12 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बाद हिरासत में लिया गया था।
बाद में दोनों को व्यक्तिगत और जमानती बॉन्ड जमा करने तथा शांति बनाए रखने का लिखित आश्वासन देने के बाद रिहा कर दिया गया। दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने सौरव दास से उनके मौजूदा आवासीय पते के दस्तावेज जमा करने को कहा है। सुनवाई के दौरान बताया गया कि प्रस्तुत दस्तावेजों में रेंट एग्रीमेंट या लीज से संबंधित प्रमाण शामिल नहीं थे। सौरव दास के वकीलों ने ये दस्तावेज जुटाने के लिए समय मांगा था। मजिस्ट्रेट ने अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को तय की है।










