रॉकेट-कम-मिसाइल फोर्स एकीकृत सैन्य कमान होगी, जिससे भारत की मिसाइल क्षमता और जवाबी ताकत बढ़ेगी। बदलते युद्ध और चीन-पाकिस्तान की चुनौती को देखते हुए आर्मी चीफ ने इसे समय की जरूरत बताया है।
बदलती जंग और नई सैन्य रणनीति
आधुनिक समय में युद्ध अब आमने-सामने की लड़ाई तक सीमित नहीं रहा। तकनीक, मिसाइल और सटीक हमले किसी भी जंग का रुख तय कर देते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच हुए युद्ध ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि शुरुआती कुछ घंटों में किए गए मिसाइल हमले ही जीत और हार का फैसला कर सकते हैं। ऐसे हालात में हर देश अपनी मिसाइल क्षमता को मजबूत करने में लगा हुआ है।
भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान पहले से ही अपनी-अपनी रॉकेट और मिसाइल फोर्स विकसित कर चुके हैं। इसी वजह से भारत के लिए भी अब अपनी सैन्य ताकत को नए स्तर पर ले जाना जरूरी हो गया है।
रॉकेट-कम-मिसाइल फोर्स क्या होती है?
आसान भाषा में समझें तो रॉकेट-कम-मिसाइल फोर्स एक ऐसी विशेष सैन्य कमान होती है, जिसके तहत सभी मिसाइल और रॉकेट सिस्टम एक ही कमांड के अंतर्गत काम करते हैं। इसका फायदा यह होता है कि फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं और हमले बहुत कम समय में किए जा सकते हैं।

फिलहाल भारत में मिसाइलें थल सेना, नौसेना और वायुसेना के अलग-अलग नियंत्रण में हैं। लेकिन भविष्य की योजना के अनुसार, सभी मिसाइल सिस्टम को एकीकृत कर एक ही कमांड से ऑपरेट किया जा सकता है। इससे बेहतर तालमेल और सटीक रणनीति बनाना आसान होगा।
आर्मी चीफ ने क्यों कहा ‘नीड ऑफ द ऑवर’?
आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रॉकेट-कम-मिसाइल फोर्स को समय की जरूरत बताया है। उनका कहना है कि आज की जंग तकनीक आधारित हो चुकी है और इसमें मिसाइलों की भूमिका सबसे अहम है।
अलग-अलग कमांड के बजाय एकीकृत कमांड से काम करने पर प्रतिक्रिया समय कम होगा और दुश्मन को तुरंत जवाब दिया जा सकेगा। चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली चुनौतियों को देखते हुए यह कदम भारत की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
भारत को रॉकेट मिसाइल फोर्स से क्या फायदा होगा?
रॉकेट-कम-missile फोर्स के गठन से भारत की सैन्य ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। इस फोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि कमांड चेन छोटी होगी, जिससे निर्णय लेने में देरी नहीं होगी।
मिसाइलों की मदद से दुश्मन के रडार सिस्टम, एयरबेस, सैन्य ठिकाने और कमांड सेंटर पर सटीक हमला किया जा सकेगा। इसके अलावा थल, जल, वायु, साइबर और स्पेस-सभी क्षेत्रों की सेनाएं मिलकर एक साथ रणनीति बना सकेंगी। इससे दुश्मन पर शुरुआती चरण में ही बड़ा दबाव बनाया जा सकता है।
कौन-कौन से हथियार हो सकते हैं शामिल?
भारत के पास पहले से ही कई आधुनिक और ताकतवर मिसाइलें मौजूद हैं। रॉकेट-कम-मिसाइल फोर्स में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, प्रलय मिसाइल और निर्भय क्रूज मिसाइल जैसे हथियार शामिल किए जा सकते हैं।
ब्रह्मोस अपनी तेज रफ्तार और सटीक हमले के लिए जानी जाती है, प्रलय कम समय में घातक वार करने में सक्षम है, जबकि निर्भय लंबी दूरी तक निशाना लगाने की क्षमता रखती है। ये सभी हथियार भारत की सुरक्षा को और मजबूत बना सकते हैं।









