हरियाणा सरकार ने NEP 2020 के तहत कक्षा 1 में दाखिले की न्यूनतम उम्र 6 साल तय कर दी है। यह नियम सत्र 2026-27 से लागू होगा और छोटे बच्चों को बाल वाटिका में प्रवेश दिया जाएगा।
NEP 2020 के तहत लिया गया अहम फैसला
हरियाणा सरकार ने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2011 में बदलाव किया है। संशोधन के अनुसार अब 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को राज्य के किसी भी स्कूल में कक्षा 1 में दाखिला नहीं मिलेगा।
पहले कई स्कूलों में 5 या 5.5 साल के बच्चों को भी पहली कक्षा में दाखिला दे दिया जाता था, लेकिन अब इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सरकार का मानना है कि कम उम्र में बच्चों को औपचारिक पढ़ाई में डालने से उन पर अनावश्यक दबाव पड़ता है, जो उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए सही नहीं है।
इसी शैक्षणिक सत्र से होगा नियम लागू
राज्य सरकार ने साफ किया है कि यह नया नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ही लागू कर दिया जाएगा। यानी आगामी एडमिशन प्रक्रिया में स्कूलों को इस आयु सीमा का सख्ती से पालन करना होगा।
सरकार की ओर से कहा गया है कि यह फैसला बच्चों के हित में लिया गया है, ताकि वे सही उम्र में औपचारिक शिक्षा शुरू कर सकें और सीखने की प्रक्रिया उनके लिए सहज रहे।
स्कूलों को जारी होंगे सख्त निर्देश

शिक्षा विभाग की ओर से सभी सरकारी और निजी स्कूलों को इस संबंध में लिखित निर्देश भेजे जाएंगे। स्कूलों को आदेश दिया गया है कि वे किसी भी स्थिति में 6 साल से कम उम्र के बच्चे को कक्षा 1 में प्रवेश न दें।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों में यह नियम पहले से ही लागू है, अब राज्य के सभी स्कूलों में भी इसे अनिवार्य किया जा रहा है।
छोटे बच्चों को बाल वाटिका में मिलेगा प्रवेश
सरकार के फैसले के अनुसार, जिन बच्चों की उम्र 6 साल पूरी नहीं हुई है, उन्हें कक्षा 1 के बजाय बाल वाटिका (प्री-प्राइमरी) में दाखिला दिया जाएगा। स्कूलों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे समय रहते अभिभावकों को इस बदलाव की जानकारी दें, ताकि एडमिशन के समय किसी तरह की परेशानी या भ्रम की स्थिति न बने। इससे माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा की योजना पहले से बना सकेंगे।
पहले क्या था नियम और क्यों हुआ बदलाव
पुराने नियमों के अनुसार, कक्षा 1 में दाखिले के लिए बच्चों की उम्र 5 से 6 साल के बीच तय की गई थी। वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्पष्ट रूप से पहली कक्षा के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की गई है। नियमों में स्पष्टता न होने के कारण कई अभिभावकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। इससे शिक्षा विभाग को कानूनी उलझनों का सामना करना पड़ रहा था।
इस पूरे विवाद के बीच हरियाणा के प्राथमिक शिक्षा निदेशक विवेक अग्रवाल ने हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर सरकार का पक्ष रखा और नई नीति को स्पष्ट किया। इसके बाद सरकार ने नियमों में संशोधन कर अंतिम फैसला लिया।









