रुपाली सुराना ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में लगातार पांच असफलताओं के बाद छठे प्रयास में सफलता हासिल की। मिरांडा हाउस से पढ़ाई करने वाली रुपाली ने CSAT और टाइम मैनेजमेंट की चुनौतियों को पार कर AIR 386 प्राप्त की और IRS अधिकारी बनीं।
UPSC Success Story: राजस्थान के ब्यावर से ताल्लुक रखने वाली रुपाली सुराना की कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार असफल होने के बावजूद सिविल सेवा में जाने का सपना देखते हैं। दिल्ली के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। शुरुआती प्रयासों में मिली निराशा, CSAT की चुनौती और परीक्षा के दबाव के बावजूद उन्होंने अपनी रणनीति बदली और छठे प्रयास में सफलता हासिल की।
मिरांडा हाउस से पढ़ाई, बचपन से था सिविल सेवा का सपना
UPSC की तैयारी करने वाले कई अभ्यर्थियों के लिए असफलता के बाद दोबारा शुरुआत करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। रुपाली सुराना की कहानी भी इसी संघर्ष को दिखाती है। राजस्थान के ब्यावर से संबंध रखने वाली रुपाली बचपन से ही सिविल सेवा में जाने का सपना देखती थीं। परिवार से मिले प्रोत्साहन ने उन्हें इस लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का हौसला दिया।

रुपाली ने दिल्ली के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने अपने विषयों की समझ मजबूत करने के साथ परीक्षा की रणनीति पर काम किया। हालांकि, शुरुआती प्रयासों में उन्हें उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली और उन्हें अपनी तैयारी के तरीके में कमियां समझने का मौका मिला।
पांच असफलताओं के बाद भी नहीं छोड़ी तैयारी
रुपाली ने साल 2018 में UPSC का पहला प्रयास किया। शुरुआती दौर में उन्होंने टॉपर्स की रणनीतियों को अपनाने की कोशिश की, लेकिन बाद में उन्हें महसूस हुआ कि दूसरों की तैयारी के तरीके को बिना अपनी जरूरत समझे फॉलो करना सही नहीं था। हर अभ्यर्थी की कमजोरियां और सीखने का तरीका अलग होता है, इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से रणनीति बनाना जरूरी है।
अगले प्रयासों में टाइम मैनेजमेंट और परीक्षा के दबाव ने उनकी मुश्किलें बढ़ाईं। परीक्षा हॉल में घबराहट के कारण सवालों को हल करने में भी परेशानी हुई। तीसरे प्रयास के दौरान CSAT उनके लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया। गणित में कमजोरी और CSAT में असफलता के कारण उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ।
लगातार पांच बार असफल होने के बाद किसी भी अभ्यर्थी के लिए निराश होना स्वाभाविक है। रुपाली के सामने भी सामाजिक और पारिवारिक अपेक्षाओं का दबाव था। एक समय उन्हें लगा कि शायद यह परीक्षा उनके लिए नहीं है। लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को छोड़ने के बजाय अपनी कमियों को पहचानने और उन पर काम करने का फैसला किया।
IPS पति और परिवार के सहयोग से मिली नई ताकत
रुपाली की तैयारी में एक अहम मोड़ उनकी शादी के बाद आया। उनके पति अमृत जैन IPS अधिकारी हैं। रुपाली को अपने पति और ससुराल पक्ष से भावनात्मक सहयोग मिला, जिससे उन्हें एक और प्रयास के लिए खुद को तैयार करने में मदद मिली।
उनके पति ने तैयारी के दौरान उनका मार्गदर्शन किया और आंसर राइटिंग में भी सहायता की। आंसर शीट का मूल्यांकन करने और अलग-अलग विषयों पर सुझाव देने से रुपाली को अपनी तैयारी बेहतर करने का अवसर मिला। इस सहयोग ने उन्हें अपनी गलतियों को समझने और परीक्षा की जरूरतों के अनुसार काम करने में मदद की।
हालांकि, सफलता का श्रेय केवल सहयोग को नहीं दिया जा सकता। रुपाली ने अपनी कमजोरियों पर काम किया, तैयारी की रणनीति में बदलाव किए और अंतिम प्रयास में खास तौर पर उन विषयों पर ध्यान दिया, जिनमें उन्हें कठिनाई होती थी।
छठे प्रयास में AIR 386, बनीं IRS अधिकारी
अपने छठे और अंतिम प्रयास में रुपाली ने CSAT को प्राथमिकता दी। उन्होंने गणित की बुनियादी समझ मजबूत करने के लिए स्कूल स्तर की NCERT किताबों की मदद ली। इससे उन्हें सवालों को समझने और हल करने का अभ्यास करने में सहायता मिली।
इसके साथ ही उन्होंने मेन्स परीक्षा की तैयारी पर भी ध्यान दिया। निबंध लेखन में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उन्होंने दार्शनिक विषयों पर काम किया। तैयारी में किए गए इन बदलावों का असर उनके प्रदर्शन पर दिखाई दिया और उनके मेन्स स्कोर में करीब 50 अंकों का सुधार हुआ।
आखिरकार, UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में रुपाली सुराना ने ऑल इंडिया रैंक 386 हासिल की और IRS अधिकारी बनीं। पांच असफलताओं के बाद मिली इस सफलता ने उनके लंबे संघर्ष को एक नई दिशा दी।
रुपाली की कहानी से UPSC अभ्यर्थी यह सीख सकते हैं कि लगातार प्रयास करने के साथ अपनी गलतियों का विश्लेषण करना और तैयारी की रणनीति बदलना भी जरूरी है। कमजोर विषयों पर काम करना, परीक्षा के दबाव को संभालना और सही मार्गदर्शन लेना सफलता की संभावना बढ़ा सकता है। उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि असफलता किसी लक्ष्य का अंतिम पड़ाव नहीं होती, बशर्ते व्यक्ति उससे सीखकर आगे बढ़ने के लिए तैयार हो।











