Vladimir Putin ने शनिवार को रूस का वार्षिक विक्ट्री डे मनाया, जिसमें राजधानी मॉस्को के रेड स्क्वायर पर भव्य सैन्य परेड आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति पुतिन ने हिस्सा लिया और पारंपरिक भाषण देते हुए रूस की सैन्य ताकत और इतिहास को रेखांकित किया।
Russia Victory Day: मॉस्को में आयोजित वार्षिक विक्ट्री डे परेड के दौरान रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने एक बार फिर पश्चिमी देशों और नाटो पर तीखा हमला बोला। रेड स्क्वायर पर दिए गए अपने भाषण में उन्होंने यूक्रेन युद्ध को “जायज” बताते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और ऐतिहासिक संघर्ष का हिस्सा बताया।
यह समारोह द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की स्मृति में हर साल मनाया जाता है और रूस के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों में से एक माना जाता है।
रेड स्क्वायर पर भव्य सैन्य परेड
मॉस्को के रेड स्क्वायर में आयोजित इस परेड में हजारों सैनिकों ने हिस्सा लिया। हालांकि इस बार परंपरागत रूप से दिखाए जाने वाले भारी सैन्य उपकरणों की संख्या सीमित रही। कई वर्षों में पहली बार इस परेड में बैलिस्टिक मिसाइलें और बड़े बख्तरबंद वाहन शामिल नहीं किए गए, जिसे अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं।
पुतिन का नाटो पर सीधा हमला
अपने संबोधन में पुतिन ने NATO को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि रूस एक ऐसे सैन्य गठबंधन का सामना कर रहा है जो यूक्रेन को लगातार हथियार और सैन्य सहायता प्रदान कर रहा है। पुतिन ने नाटो को “आक्रामक शक्ति” बताते हुए दावा किया कि पश्चिमी समर्थन ने यूक्रेन संघर्ष को और अधिक जटिल बना दिया है।
Ukraine में चल रहे युद्ध को लेकर पुतिन ने एक बार फिर अपने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि रूस अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए यह सैन्य अभियान चला रहा है। उनके अनुसार, यह संघर्ष ऐतिहासिक बलिदानों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, जिसे वह “न्यायसंगत युद्ध” मानते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र
अपने भाषण की शुरुआत में पुतिन ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत सैनिकों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आज के सैनिक उन्हीं मूल्यों और परंपराओं से प्रेरणा ले रहे हैं। विक्ट्री डे को रूस में “महान देशभक्ति युद्ध” की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जो देश की राष्ट्रीय पहचान का अहम हिस्सा है।
इस साल के विक्ट्री डे समारोह से पहले रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, इस अस्थायी सीजफायर की घोषणा वैश्विक मध्यस्थता प्रयासों के तहत की गई थी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब युद्ध को लेकर वैश्विक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी
इस समारोह में कई देशों के नेता भी शामिल हुए, जिनमें बेलारूस के राष्ट्रपति Alexander Lukashenko प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा लाओस के राष्ट्रपति और मलेशिया के राजा जैसे अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की मौजूदगी ने इस आयोजन को वैश्विक महत्व दिया। पिछले वर्षों में इस परेड में चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping की उपस्थिति भी देखी गई थी, जिससे रूस के अंतरराष्ट्रीय संबंधों की व्यापकता का संकेत मिलता है।
परेड के बाद सैन्य बैंड की धुन और तोपों की सलामी ने माहौल को और भी औपचारिक और शक्ति प्रदर्शन से भरा बना दिया। विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन केवल ऐतिहासिक स्मरण नहीं बल्कि रूस की सैन्य और राजनीतिक स्थिति का भी संदेश देता है।










