मिडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि रूस से जुड़े नेटवर्क ने ब्रिटेन में पीएम की संपत्तियों पर आगजनी और तोड़फोड़ की साजिश रची। मामले में कई लोग दोषी पाए गए और ऑनलाइन माध्यम से साजिश चलाने के संकेत मिले है।
लदंन: BBC की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीयर स्टार्मर से जुड़े ठिकानों पर हुई आगजनी घटनाओं के पीछे रूस से जुड़े एक डिजिटल नेटवर्क का हाथ हो सकता है। यह नेटवर्क सोशल मीडिया और Telegram जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए सक्रिय था और लोगों को धीरे-धीरे भर्ती कर आपराधिक गतिविधियों में शामिल करता था। जांच में इसे एक संगठित “ऑनलाइन प्रभाव अभियान” के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य केवल अपराध नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता फैलाना बताया गया है।
“EL” नाम के रहस्यमय हैंडलर की भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे नेटवर्क को “EL” नाम का एक गुप्त हैंडलर संचालित कर रहा था। वह Telegram पर यूक्रेनी और पूर्वी यूरोपीय प्रवासियों के समूहों में सक्रिय था और वहां से लोगों को टारगेट करता था। शुरुआती चरण में वह छोटे-मोटे काम जैसे पोस्टर लगवाना या ग्राफिटी करवाना देता था, लेकिन धीरे-धीरे इन्हीं लोगों को गंभीर आपराधिक गतिविधियों की ओर धकेला जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि वह पैसों और अन्य लालच जैसे प्रलोभनों का इस्तेमाल करके लोगों को प्रभावित करता था, जिससे वे कानून तोड़ने के लिए तैयार हो जाते थे।
रोमन लाव्रीनोविच को दोषी ठहराया गया
इस मामले में 22 वर्षीय यूक्रेनी नागरिक रोमन लाव्रीनोविच को आगजनी की साजिश का दोषी पाया गया है। अदालत में पेश सबूतों के अनुसार उसे ऑनलाइन माध्यम से निर्देश दिए गए थे और वह धीरे-धीरे बढ़ते अपराधों में शामिल होता गया। लाव्रीनोविच की भूमिका को इस नेटवर्क के एक “एक्सीक्यूटर” के रूप में देखा गया, जिसे मुख्य रूप से निर्देशों का पालन करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
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प्रधानमंत्री से जुड़े ठिकानों पर आगजनी की घटनाएं
लंदन में पिछले वर्ष कई आगजनी घटनाएं हुई थीं, जिनका संबंध सीधे प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर से जोड़ा गया। इनमें एक पुरानी टोयोटा कार को आग लगाना शामिल था, जो पहले प्रधानमंत्री के नाम पर इस्तेमाल होती थी। इसके अलावा नॉर्थ लंदन में एक फ्लैट के प्रवेश द्वार पर हमला किया गया और एक अन्य आवासीय संपत्ति पर भी आगजनी की घटना हुई। यह संपत्ति प्रधानमंत्री के परिवार से जुड़े लोगों द्वारा उपयोग की जा रही थी। इन सभी घटनाओं को बाद में एक ही साजिश के हिस्से के रूप में देखा गया।
Telegram और डिजिटल भर्ती का नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि Telegram और अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का उपयोग भर्ती और समन्वय के लिए किया जा रहा था। “EL” नाम का अकाउंट यूक्रेनी नागरिकों के लिए बने नौकरी समूहों में घुसकर लोगों से संपर्क करता था। वहां वह उन्हें आसान पैसे और छोटे कामों का लालच देकर अपनी ओर खींचता था। धीरे-धीरे यही लोग और गंभीर अपराधों में शामिल किए जाते थे। इस प्रक्रिया को एक तरह का “ग्रूमिंग पैटर्न” बताया गया है, जिसमें व्यक्ति को छोटे अपराधों से बड़े अपराधों की ओर धकेला जाता है।
ऑनलाइन प्रोपेगेंडा और वैचारिक प्रभाव
BBC रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह नेटवर्क केवल अपराध तक सीमित नहीं था, बल्कि ऑनलाइन प्रोपेगेंडा फैलाने में भी शामिल था। इसके जरिए समाज में विभाजन पैदा करने, राजनीतिक भ्रम फैलाने और विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बढ़ाने की कोशिश की गई। कुछ अकाउंट्स ने झूठी जानकारी फैलाकर आगजनी की घटनाओं को अलग-अलग वैचारिक और राजनीतिक संदर्भों से जोड़ने का प्रयास किया। इससे सोशल मीडिया पर अफवाहों और गलत सूचनाओं का प्रसार भी बढ़ा।
रूस से जुड़े होने के आरोप और आधिकारिक खंडन
BBC की जांच में इस नेटवर्क को रूस से जुड़ा बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार “EL” खुद को रूसी राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़कर प्रस्तुत करता था और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सराहना करता था। हालांकि, इन आरोपों को रूस ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। रूसी दूतावास ने बयान जारी कर कहा है कि रूस किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों में शामिल नहीं है और वह ब्रिटेन के लिए कोई खतरा नहीं है। इस बयान में इन सभी आरोपों को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया गया।
अदालत की कार्यवाही और अन्य आरोपी
इस मामले में कुल तीन लोगों पर आरोप लगाए गए थे। रोमन लाव्रीनोविच को दोषी ठहराया गया, जबकि एक अन्य आरोपी को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। तीसरे व्यक्ति की भूमिका सीमित पाई गई। अदालत की सुनवाई मुख्य रूप से आपराधिक साजिश और वित्तीय लाभ के पहलू पर केंद्रित रही। हालांकि, BBC की रिपोर्ट का दावा है कि असली मास्टरमाइंड और डिजिटल नेटवर्क की पूरी संरचना अदालत में पूरी तरह उजागर नहीं हो पाई।
साइबर युद्ध और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियां
यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि आधुनिक समय में साइबर स्पेस केवल संवाद का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव का एक महत्वपूर्ण उपकरण बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का उपयोग अब केवल व्यक्तिगत संचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने और अस्थिरता पैदा करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती पेश करती हैं, जहां डिजिटल नेटवर्क्स को ट्रैक करना और उनकी वास्तविक संरचना को समझना बेहद जटिल हो गया है।









