RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत आज दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लोकतंत्र मजबूत है, बावजूद विपक्षी आरोपों के। राजनीतिक विवाद के बीच देश की वैश्विक उपस्थिति बढ़ रही है।
RSS Chief: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में राजस्थान के सीकर में एक कार्यक्रम के दौरान भारत की वैश्विक उपस्थिति और विकास को लेकर महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उन्होंने भारत के लोकतंत्र और देश की प्रगति को लेकर अपने विचार साझा किए, जो आज के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में काफी चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस लेख में हम भागवत के बयान का विश्लेषण करेंगे और साथ ही विपक्ष की वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों पर भी नजर डालेंगे।
मोहन भागवत का भारत के विकास पर विश्वास
मोहन भागवत ने कहा कि आज जब भी दुनिया को किसी बड़ी ताकत की जरूरत होती है, भारत आगे बढ़ता है। यह कहना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज़ादी के बाद देश की प्रगति को लेकर कई नकारात्मक भविष्यवाणियां की गई थीं। भागवत ने कहा कि इतिहास के आधार पर कोई यह नहीं कह सकता था कि भारत इस तरह तेजी से विकसित होगा।
उन्होंने भारत के लोकतंत्र की भी प्रशंसा की और कहा कि यह प्रणाली देश के आलोचकों को गलत साबित कर रही है। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था ने कई देशों को पीछे छोड़ दिया है और आज कई देशों के लिए आदर्श बन गई है। यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लोकतंत्र भारत के लिए सिर्फ एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं बल्कि देश की एक बड़ी ताकत बन चुका है।
वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती उपस्थिति

भागवत ने बताया कि भारत की वैश्विक उपस्थिति लगातार मजबूत हो रही है। दुनिया में कई बड़ी ताकतें मौजूद हैं, लेकिन भारत अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लचीलेपन और विकास की क्षमता वैश्विक स्तर पर साफ दिख रही है।
राजनीतिक आलोचनाओं के बीच भारत का लोकतंत्र
मोहन भागवत की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगा रहे हैं। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत कर चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
विशेष रूप से विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2024 के आम चुनावों में “वोट चोरी” का आरोप लगाया है। इसके अलावा बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर भी भारी विवाद है। विपक्ष का मानना है कि इस प्रक्रिया से कई लोग वोटिंग से वंचित हो सकते हैं।










