Soumya Swaminathan, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research) की पूर्व महानिदेशक रह चुकी हैं, को प्रतिष्ठित Royal Society का फेलो चुना गया है।
नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक Soumya Swaminathan को प्रतिष्ठित Royal Society की फेलोशिप के लिए चुना गया है। यह चयन वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में एक बड़ी मान्यता माना जाता है और इसे विज्ञान के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मानों में से एक माना जाता है। यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए भी एक ऐतिहासिक क्षण है।
भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
Soumya Swaminathan का चयन इसलिए भी विशेष है क्योंकि वह और उनके पिता, भारत रत्न से सम्मानित कृषि वैज्ञानिक प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन, दोनों ही अब Royal Society के फेलो बन चुके हैं। यह भारत के इतिहास में पहली बार है जब किसी पिता-पुत्री की जोड़ी को इस प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्था में फेलोशिप मिली है। वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि यह उपलब्धि भारत की अनुसंधान क्षमता और वैश्विक वैज्ञानिक नेतृत्व में बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
कौन हैं डॉ. सौम्या स्वामीनाथन?

Soumya Swaminathan एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं। उन्होंने ट्यूबरकुलोसिस (TB), एचआईवी/एड्स और कोविड-19 महामारी जैसे गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य संकटों पर महत्वपूर्ण काम किया है। वे लंबे समय तक भारत में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की महानिदेशक भी रह चुकी हैं और बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन में मुख्य वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत रहीं। उनके नेतृत्व में कई वैश्विक स्वास्थ्य नीतियों और शोध कार्यक्रमों को दिशा मिली।
कोविड-19 महामारी के दौरान Soumya Swaminathan ने WHO के भीतर वैज्ञानिक सलाह और वैश्विक रणनीति निर्माण में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने टीकों, उपचार रणनीतियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करने में योगदान दिया। इसके अलावा, टीबी और एचआईवी अनुसंधान में उनका काम विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से उपयोगी रहा है, जहां स्वास्थ्य संसाधन सीमित होते हैं।
रॉयल सोसाइटी क्या है?
Royal Society, जिसे “द रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन फॉर इम्प्रूविंग नेचुरल नॉलेज” के नाम से जाना जाता है, दुनिया की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। इसकी स्थापना 1660 में हुई थी और इसे ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय से रॉयल चार्टर प्राप्त हुआ था। यह संस्था विज्ञान को बढ़ावा देने, उत्कृष्ट शोध को मान्यता देने और वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने के लिए जानी जाती है। इसके फेलो में दुनिया के कई नोबेल पुरस्कार विजेता और प्रमुख वैज्ञानिक शामिल रहे हैं।
Soumya Swaminathan का फेलो चुना जाना भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह चयन इस बात का संकेत है कि भारतीय वैज्ञानिक अब वैश्विक शोध और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वैज्ञानिक समुदाय के अनुसार, यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के शोधकर्ताओं और डॉक्टरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।










