ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सैयारा’ के टाइटल ट्रैक की रॉयल्टी को लेकर संगीतकार तनिष्क बागची और यशराज फिल्म्स के बीच विवाद सामने आया है। तनिष्क ने 8 लाख रुपये बकाया होने का दावा किया, जबकि YRF ने कहा कि अनुबंध के अनुसार पूरा भुगतान किया जा चुका है।
बॉलीवुड: सुपरहिट फिल्म ‘सैयारा’ की रिलीज के लगभग एक वर्ष बाद इसके संगीत को लेकर नया विवाद सामने आया है। फिल्म के टाइटल ट्रैक से जुड़े संगीतकार तनिष्क बागची ने दावा किया है कि उन्हें इस गीत की रॉयल्टी का पूरा भुगतान अब तक नहीं मिला है और लगभग 8 लाख रुपये अभी भी बकाया हैं। दूसरी ओर, फिल्म का निर्माण करने वाले यशराज फिल्म्स (YRF) ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि अनुबंध के अनुसार सभी भुगतान पहले ही किए जा चुके हैं। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और फिल्म उद्योग में संगीतकारों की रॉयल्टी व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
तनिष्क बागची ने सोशल मीडिया पर साझा किया अनुभव
तनिष्क बागची ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए ‘सैयारा’ के संगीत निर्माण की पूरी प्रक्रिया का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह यशराज फिल्म्स के साथ उनका पहला प्रोजेक्ट था और उन्होंने इस फिल्म के संगीत को केवल एक पेशेवर जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत जुनून की तरह तैयार किया।
उन्होंने लिखा कि गीत की कंपोजिशन, प्रोडक्शन, रिकॉर्डिंग, गायकों के साथ काम, साउंड डिजाइन और अंतिम प्रस्तुति तक हर चरण में उन्होंने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ योगदान दिया। उनके अनुसार यह गीत उनकी रचनात्मक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा था। हालांकि विवाद बढ़ने के कुछ समय बाद उन्होंने यह पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दी।
रॉयल्टी को लेकर क्या है तनिष्क का दावा
तनिष्क बागची का कहना है कि फिल्म के टाइटल ट्रैक की सफलता के बावजूद उन्हें अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध रॉयल्टी स्टेटमेंट के अनुसार लगभग 8 लाख रुपये का भुगतान अभी भी लंबित है। उन्होंने यह भी कहा कि गीत की अपार लोकप्रियता के मुकाबले उन्हें जो आर्थिक प्रतिफल मिला, वह बेहद सीमित था। उनके अनुसार कई बार रचनात्मक लोग अपने काम में पूरी मेहनत लगा देते हैं, लेकिन सफलता मिलने के बाद उनके योगदान को उचित सम्मान और पारिश्रमिक नहीं मिल पाता।
तनिष्क ने फिल्म के निर्देशक मोहित सूरी और गीतकार इरशाद कामिल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इस परियोजना से जुड़ने का उनका एक प्रमुख कारण निर्देशक पर विश्वास था।
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यशराज फिल्म्स ने आरोपों का किया खंडन
विवाद सामने आने के तुरंत बाद यशराज फिल्म्स ने आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की। प्रोडक्शन हाउस ने स्पष्ट किया कि ‘सैयारा’ के टाइटल ट्रैक पर केवल तनिष्क बागची ही नहीं, बल्कि फहीम अब्दुल्ला और अरसलान निजामी भी सह-संगीतकार थे। YRF के अनुसार इस गीत से प्राप्त रॉयल्टी तीनों संगीतकारों के बीच अनुबंध में तय शर्तों के अनुसार बराबर बांटी गई है और भविष्य में भी उसी व्यवस्था के तहत भुगतान जारी रहेगा। प्रोडक्शन हाउस ने कहा कि उनकी ओर से अनुबंध के अनुसार सभी देय भुगतान पूरे किए जा चुके हैं और किसी भी प्रकार की राशि लंबित नहीं है।
रॉयल्टी प्रणाली कैसे करती है काम
संगीत उद्योग में किसी गीत की कमाई केवल एकमुश्त फीस तक सीमित नहीं होती। कई मामलों में संगीतकार, गीतकार और गायक को भविष्य में रॉयल्टी के रूप में भी भुगतान मिलता है। रॉयल्टी का वितरण आमतौर पर अनुबंध की शर्तों, कॉपीराइट स्वामित्व, प्रकाशन अधिकार और विभिन्न डिजिटल एवं संगीत प्लेटफॉर्म से होने वाली आय के आधार पर किया जाता है। यदि किसी गीत में एक से अधिक संगीतकार शामिल हों, तो उनकी हिस्सेदारी पहले से तय समझौते के अनुसार निर्धारित की जाती है।
सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस
यह विवाद सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने कलाकारों को उनकी रचनात्मक मेहनत का उचित आर्थिक अधिकार मिलने की बात कही, जबकि कुछ ने यह तर्क दिया कि यदि अनुबंध स्पष्ट है तो विवाद का समाधान कानूनी और व्यावसायिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। कई संगीत प्रेमियों ने भी इस अवसर पर संगीत उद्योग में पारदर्शी रॉयल्टी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।
फिल्म ‘सैयारा’ की सफलता
‘सैयारा’ ने रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था। फिल्म ने अपने भावनात्मक कथानक और संगीत के दम पर दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई। फिल्म से अभिनेता अहान पांडे ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी, जबकि अभिनेत्री अनीत पड्डा भी प्रमुख भूमिका में नजर आई थीं। फिल्म के टाइटल ट्रैक समेत कई गीत लंबे समय तक संगीत चार्ट में शीर्ष स्थान पर बने रहे और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करोड़ों बार सुने गए। इसी सफलता के कारण अब रॉयल्टी को लेकर उठा विवाद और अधिक चर्चा में आ गया है।
क्या हो सकता है आगे
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। यदि विवाद आपसी बातचीत से नहीं सुलझता, तो इसकी आगे कानूनी या संविदात्मक समीक्षा भी हो सकती है। हालांकि अभी तक किसी पक्ष ने औपचारिक कानूनी कार्रवाई की घोषणा नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अनुबंध, रॉयल्टी स्टेटमेंट और कॉपीराइट अधिकारों की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।









