दीपिका के बाद राधिका आप्टे ने उठाया शूटिंग शिफ्ट का मुद्दा, हिंसक फिल्मों पर भी साधा निशाना

बॉलीवुड एक्ट्रेस राधिका आप्टे ने 16 घंटे की शूटिंग पर सवाल उठाए। मां बनने के बाद 12 घंटे की शिफ्ट चाहती हैं। हिंसक फिल्मों से दूरी और 'अक्का' पर भी बात की।

राधिका आप्टे ने फिल्मों में बढ़ती हिंसा और लंबी शूटिंग शिफ्ट पर सवाल उठाए हैं। मां बनने के बाद वह रोज 16 घंटे की जगह 12 घंटे काम करना चाहती हैं। उनकी सीरीज ‘अक्का’ 30 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर आएगी।

बॉलीवुड: फिल्मों की शूटिंग के दौरान लंबे समय तक काम करने को लेकर अभिनेत्री राधिका आप्टे ने अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि मां बनने के बाद अब वह 16 घंटे की शिफ्ट नहीं करना चाहतीं। उन्हें काम के साथ अपनी छोटी बेटी के लिए भी समय चाहिए। राधिका ने फिल्मों में बढ़ते खून-खराबे पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जिस तरह आजकल पर्दे पर हिंसा दिखाई जा रही है, वह उसे मनोरंजन नहीं मानतीं। अभिनेत्री ने ये बातें अपनी नई नेटफ्लिक्स सीरीज 'अक्का' की रिलीज से पहले पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहीं। इस दौरान उन्होंने बताया कि वह इन दिनों फिल्मों का चुनाव करते समय किन बातों का ध्यान रखती हैं।

राधिका आप्टे बोलीं- अब 16 घंटे काम नहीं कर सकती

राधिका आप्टे ने बताया कि बेटी के जन्म के बाद उनकी दिनचर्या बदल गई है। पहले वह काम के लिए लंबा समय दे पाती थीं, लेकिन अब ऐसा करना संभव नहीं है। वह चाहती हैं कि शूटिंग का पूरा दिन 12 घंटे के भीतर समाप्त हो जाए। उनके मुताबिक, कई बार फिल्म के सेट पर 16 घंटे तक काम करना पड़ता है और बीच में छुट्टी मिलना भी आसान नहीं होता।

अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना है। वह अभी बहुत छोटी है और इस उम्र में उसके साथ रहना उनके लिए जरूरी है। राधिका ने यह भी बताया कि हर प्रोजेक्ट में उनकी शर्तें मान ली जाएं, ऐसा नहीं होता। कई बार लंबे समय तक काम करने से इनकार करने पर असहमति भी होती है।

शूटिंग के साथ मेकअप और आने-जाने का समय भी जरूरी

राधिका इससे पहले भी फिल्म इंडस्ट्री में काम के घंटों पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं। जनवरी 2026 में उन्होंने बताया था कि 12 घंटे की शिफ्ट में केवल कैमरे के सामने बिताया गया समय नहीं गिना जाना चाहिए। घर से सेट तक पहुंचने, मेकअप, हेयर स्टाइलिंग और शूटिंग खत्म होने के बाद लौटने में भी काफी समय लगता है।

उनके मुताबिक, अगर किसी कलाकार को सेट तक पहुंचने में दो घंटे लगते हैं, तो शूटिंग का कार्यक्रम उसी हिसाब से बनाया जाना चाहिए। वह सप्ताह में नियमित छुट्टी भी चाहती हैं। राधिका का मानना है कि लगातार कई दिन काम करने से परिवार के साथ समय बिताना मुश्किल हो जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ फिल्मों की जरूरत के मुताबिक कभी-कभी बदलाव करना पड़ सकता है।

बेटी के जन्म के बाद काम को लेकर बदल गई सोच

राधिका आप्टे ने साल 2024 में बेटी को जन्म दिया था। उनके पति बेनेडिक्ट टेलर ब्रिटेन के संगीतकार और वायलिन वादक हैं। मां बनने के बाद राधिका ने अपने काम के तरीके में बदलाव किया है। वह अब हर प्रस्ताव को स्वीकार करने की जल्दी में नहीं रहतीं।

इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अभिनय उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन पूरी जिंदगी नहीं। फिलहाल बेटी के साथ रहना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए अगर कुछ समय काम से दूर रहना पड़े तो भी उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

राधिका ने यह भी बताया कि वह कुछ समय लेखन पर ध्यान देना चाहती थीं। हालांकि बेटी की देखभाल के बीच लिखने के लिए समय निकालना आसान नहीं रहा। कई बार वह कंप्यूटर पर लिखने बैठती हैं, लेकिन थकान के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाता।

फिल्मों में दिखाए जा रहे खून-खराबे पर उठाए सवाल

काम के घंटों के अलावा राधिका ने हिंदी फिल्मों में बढ़ती हिंसा पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि इन दिनों सिनेमाघरों में ऐसी फिल्में अच्छा कारोबार कर रही हैं, जिनमें मारपीट और हिंसक दृश्य काफी अधिक होते हैं। लेकिन वह खुद इस तरह की फिल्में देखना पसंद नहीं करतीं।

राधिका ने सवाल उठाया कि लोग आराम से पॉपकॉर्न खाते हुए पर्दे पर बेरहमी से लोगों को पीटे जाने के दृश्य कैसे देख लेते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई फिल्मों में हिंसा दिखाने के लिए बार-बार नए और ज्यादा क्रूर तरीके अपनाए जाते हैं। किसी का सिर तोड़ना या बड़ी संख्या में लोगों की पिटाई को मनोरंजन बनाकर पेश करना उन्हें समझ नहीं आता।

अभिनेत्री ने साफ किया कि वह केवल फिल्मों के मौजूदा चलन को देखते हुए ऐसी कहानियों का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं।

हिंसक फिल्मों से दूर रहने के पीछे बताई अपनी वजह

राधिका आप्टे का कहना है कि बॉक्स ऑफिस पर इस समय क्या चल रहा है, इसका असर कलाकारों को मिलने वाले काम पर भी पड़ता है। उनके मुताबिक, जब निर्माता एक खास तरह की फिल्मों को ज्यादा महत्व देते हैं, तो अलग विषयों पर बनने वाली कहानियों के अवसर सीमित हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि उन्हें हिंसा से भरी फिल्में आकर्षित नहीं करतीं। वह ऐसी कहानियों में काम करने से बचना चाहती हैं, जिनमें क्रूरता को दर्शकों के मनोरंजन का मुख्य साधन बनाया जाता है।

राधिका पहले भी अलग-अलग तरह की फिल्मों में काम कर चुकी हैं। उन्होंने गंभीर सामाजिक विषयों से लेकर थ्रिलर और कॉमेडी तक में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। अब वह अपने काम के चुनाव में निजी पसंद और परिवार की जरूरतों को भी जगह दे रही हैं।

आलिया और दीपिका को लेकर भी कही बड़ी बात

राधिका ने फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्रियों की बॉक्स ऑफिस स्थिति पर भी बात की। उनका कहना है कि आज सिनेमाघरों में किसी महिला कलाकार के मुख्य किरदार वाली फिल्म को बड़ी ओपनिंग दिलाना आसान नहीं है। उन्होंने आलिया भट्ट और दीपिका पादुकोण का उदाहरण दिया।

राधिका के मुताबिक, आलिया और दीपिका जैसी अभिनेत्रियों के नाम पर निर्माता टिकट बिक्री की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन बाकी कलाकारों के लिए स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य भूमिका वाली फिल्म अच्छी होने के बावजूद सिनेमाघरों में पर्याप्त दर्शक नहीं जुटा पाए, ऐसा हो सकता है।

दीपिका के बाद राधिका आप्टे ने उठाया शूटिंग शिफ्ट का मुद्दा, हिंसक फिल्मों पर भी साधा निशाना

इसी कारण कई बार उन्हें ऐसी फिल्मों में काम करना पड़ता है, जिनमें पुरुष कलाकार का किरदार प्रमुख होता है। हालांकि राधिका ने बताया कि वह किसी प्रोजेक्ट को केवल इस आधार पर नहीं चुनतीं कि वह सिनेमाघरों में रिलीज होगा या ओटीटी पर।

दीपिका पादुकोण की आठ घंटे वाली मांग पर हुआ था विवाद

बॉलीवुड में कलाकारों के काम के घंटे तय करने की बहस पिछले साल दीपिका पादुकोण की वजह से भी चर्चा में आई थी। दीपिका ने शूटिंग के लिए आठ घंटे की शिफ्ट की बात कही थी। इसके बाद फिल्म इंडस्ट्री में इस मांग को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'स्पिरिट' से दीपिका के अलग होने के बाद भी यह मुद्दा उठा था। मीडिया रिपोर्टों में उनके काम के घंटे और दूसरे पेशेवर मतभेदों को इसकी संभावित वजह बताया गया था। हालांकि विवाद की सभी शर्तों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।

दीपिका ने बाद में कहा था कि काम के निर्धारित घंटे मांगना गलत नहीं है। अब राधिका आप्टे ने भी अपने अनुभव सामने रखे हैं। हालांकि दोनों अभिनेत्रियों की मांग अलग है। दीपिका ने आठ घंटे की शिफ्ट का समर्थन किया था, जबकि राधिका 12 घंटे के भीतर अपना कार्यदिवस पूरा करना चाहती हैं।

30 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी 'अक्का'

राधिका आप्टे इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज 'अक्का' को लेकर चर्चा में हैं। इस सीरीज में उनके साथ अभिनेत्री कीर्ति सुरेश मुख्य भूमिका निभा रही हैं। नेटफ्लिक्स ने इसकी रिलीज 30 अक्टूबर 2026 तय की है। शो का ट्रेलर भी सामने आ चुका है।

'अक्का' की कहानी 1980 के दशक में दक्षिण भारत के एक काल्पनिक शहर पेरनूर में दिखाई गई है। यहां कई पीढ़ियों से महिलाओं का दबदबा रहा है। कहानी में सत्ता, परिवार, बदला और दो ताकतवर महिलाओं के बीच टकराव दिखाया जाएगा।

कीर्ति सुरेश भवानी का किरदार निभा रही हैं, जबकि राधिका आप्टे रुद्रा की भूमिका में दिखाई देंगी। दोनों किरदारों के अपने उद्देश्य हैं और इनके बीच मतभेद कहानी को आगे बढ़ाते हैं।

'अक्का' में राधिका के साथ नजर आएंगे ये कलाकार

नेटफ्लिक्स और वाईआरएफ एंटरटेनमेंट की इस सीरीज का लेखन और निर्देशन धर्मराज शेट्टी ने किया है। यह उनका पहला निर्देशन प्रोजेक्ट है। राधिका और कीर्ति के अलावा तन्वी आजमी, महेश मांजरेकर, अंशुमन पुष्कर और मोनिका पंवार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

निर्माताओं के मुताबिक, कहानी में महिलाओं के नेतृत्व वाली एक ऐसी दुनिया दिखाई गई है, जहां सत्ता पर पकड़ बनाए रखने के लिए अलग-अलग समूहों के बीच संघर्ष चलता रहता है। एक बाहरी व्यक्ति के आने के बाद पुराने संबंध और सत्ता का संतुलन बिगड़ने लगता है।

इस गैंगस्टर ड्रामा में भी संघर्ष और हिंसा की पृष्ठभूमि है। हालांकि राधिका ने अपने इंटरव्यू में जिस तरह की जरूरत से ज्यादा क्रूरता को लेकर आपत्ति जताई है, उसे इस सीरीज के बारे में दिया गया कोई विशेष बयान नहीं माना जाना चाहिए।

अब काम और परिवार दोनों को देना चाहती हैं समय

राधिका आप्टे ने 'अंधाधुन', 'बदलापुर', 'पार्च्ड', 'पैडमैन' और 'मांझी: द माउंटेन मैन' जैसी फिल्मों में काम किया है। ओटीटी पर 'सेक्रेड गेम्स' और 'घूल' जैसी सीरीज से भी उन्हें पहचान मिली। लगभग दो दशक के अभिनय करियर के बाद वह अब अपने लिए काम की अलग सीमाएं तय कर रही हैं।

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